G20 ऊर्जा बैठक में भारत ने सुरक्षित और किफायती ऊर्जा व्यवस्था पर दिया जोर

मनोहर लाल ने भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए मजबूत आपूर्ति श्रृंखला, बेहतर नियमन और महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग को बताया जरूरी

नई दिल्ली — भारत ने अमेरिका के ह्यूस्टन में आयोजित G20 Energy Abundance Ministerial Meeting में विकासशील देशों के लिए सुरक्षित, भरोसेमंद और किफायती ऊर्जा की उपलब्धता को वैश्विक ऊर्जा एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। 14 से 16 सितंबर तक हुई बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व केंद्रीय विद्युत एवं आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने किया।

अमेरिकी G20 अध्यक्षता के तहत हुई इस बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, बुनियादी ऊर्जा ढांचे के लिए अनुमति प्रक्रिया में सुधार तथा महत्वपूर्ण खनिजों की विश्वसनीय आपूर्ति जैसे विषयों पर चर्चा हुई। भारत ने इन मुद्दों को अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और दीर्घकालिक विकास रणनीति से जोड़ते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

552 GW से अधिक बिजली क्षमता का उल्लेख

बैठक में मनोहर लाल ने भारत के ऊर्जा क्षेत्र में हुए विस्तार का उल्लेख किया। PIB के अनुसार, भारत की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 552 GW तक पहुंच चुकी है और इसमें आधे से अधिक क्षमता गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से आती है। मंत्री ने भारत की राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान यानी NDC लक्ष्यों में हुई शुरुआती उपलब्धियों तथा 2070 तक नेट-जीरो हासिल करने के दीर्घकालिक लक्ष्य को भी रेखांकित किया।

भारत की ऊर्जा प्रणाली को अधिक लचीला और भविष्य के लिए तैयार बनाने के संदर्भ में डिजिटल तकनीक, विकेंद्रीकृत ऊर्जा व्यवस्था और उपभोक्ता-केंद्रित सेवाओं को भी महत्वपूर्ण बताया गया।

ऊर्जा परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया में सुधार पर जोर

भारत ने ऊर्जा और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए अनुमति प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में किए गए सुधारों को भी G20 मंच पर साझा किया। इनमें National Single Window System, PARIVESH और PM Gati Shakti जैसी व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया, जिनका उद्देश्य परियोजनाओं से संबंधित मंजूरियों और समन्वय को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला पर भारत का फोकस

बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर भी भारत ने अपना पक्ष रखा। आधुनिक ऊर्जा प्रणालियों, डिजिटल ढांचे और उभरती तकनीकों के लिए जरूरी खनिजों की आपूर्ति में विविधता और स्थिरता को महत्वपूर्ण बताया गया।

मनोहर लाल ने National Critical Mineral Mission का उल्लेख करते हुए खनिजों की खोज से लेकर प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने पर जोर दिया। भारत ने G20 देशों के बीच पुनर्चक्रण, संसाधनों की रिकवरी और आपूर्ति स्रोतों में विविधता बढ़ाने को लेकर सहयोग की आवश्यकता भी बताई।

स्वच्छ खाना पकाने और जल पुन: उपयोग पर भी पहल

G20 बैठक के दौरान स्वच्छ खाना पकाने की पहुंच बढ़ाने, अनुमति एवं नियामक प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने तथा पानी के पुन: उपयोग से जुड़े कई परिणाम सामने आए।

स्वच्छ खाना पकाने के विषय में G20 ने देशों की अलग-अलग परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तकनीक-तटस्थ दृष्टिकोण का समर्थन किया। वहीं, जल पुन: उपयोग के लिए विज्ञान और प्रमाण आधारित स्वैच्छिक ढांचे को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

अमेरिका और कनाडा के प्रतिनिधियों से द्विपक्षीय बातचीत

बैठक से इतर मनोहर लाल ने अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट, अमेरिकी आंतरिक मामलों के मंत्री डग बर्गम तथा कनाडा के ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री के संसदीय सचिव कोरी होगन के साथ द्विपक्षीय चर्चा की।

बैठकों में ऊर्जा अवसंरचना, आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती, बिजली क्षेत्र में बदलाव और भारत की बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था की ऊर्जा आवश्यकताओं जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई।

भारत का ऊर्जा संदेश

G20 बैठक में भारत का रुख इस व्यापक दिशा पर केंद्रित रहा कि आर्थिक विकास के साथ ऊर्जा की उपलब्धता, विश्वसनीयता और वहनीयता को भी समान महत्व दिया जाए। महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के साथ-साथ नियामक सुधारों पर भारत का जोर उसकी भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए दीर्घकालिक तैयारी को दर्शाता है।
भारत ने G20 ऊर्जा मंच पर अपनी प्राथमिकताओं को केवल ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रखा। सुरक्षित आपूर्ति, बेहतर नियामक व्यवस्था, महत्वपूर्ण खनिजों की वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को एक साथ आगे बढ़ाने का संदेश भारत की व्यापक ऊर्जा रणनीति के रूप में सामने आया।

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