मालकानगिरी, कोरापुट और नबरंगपुर के श्रद्धालु सरकारी योजना के तहत पुरी के लिए रवाना
भुवनेश्वर: मालकानगिरी, कोरापुट और नबरंगपुर के 910 वरिष्ठ नागरिकों के लिए 20 सितंबर केवल एक यात्रा की तारीख नहीं रही। यह उनके पुरी पहुंचकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने की यात्रा की शुरुआत बनी।
उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री प्रवती परिड़ा ने रविवार को ‘श्री जगन्नाथ दर्शन योजना’ के तहत 2026–27 के पहले तीर्थयात्रा चरण को वर्चुअल माध्यम से रवाना किया। इस समूह में मालकानगिरी के 490, कोरापुट के 210 और नबरंगपुर के 210 वरिष्ठ नागरिक शामिल हैं।
इस यात्रा की खासियत केवल इसकी धार्मिक भावना में नहीं, बल्कि इसकी भौगोलिक पहुंच में भी है। दक्षिण ओडिशा के दूरस्थ इलाकों से पुरी तक पहुंचना बुजुर्ग यात्रियों के लिए सामान्य यात्रा की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी दूरी और व्यावहारिक कठिनाइयों को कम करने के लिए योजना के तहत संगठित परिवहन व्यवस्था तैयार की गई है।
पर्यटन विभाग और ओडिशा राज्य सड़क परिवहन निगम मिलकर इस कार्यक्रम को संचालित कर रहे हैं। लाभार्थियों को उनके ग्राम पंचायत क्षेत्रों से जिला मुख्यालय तक लाने और वहां से विशेष बसों के जरिए पुरी ले जाने की व्यवस्था की गई है।
यात्रा के दौरान स्वास्थ्य और सुरक्षा पर भी विशेष व्यवस्था की गई है। प्रत्येक बस के साथ तीन एस्कॉर्ट अधिकारी और एक पैरामेडिकल कर्मचारी तैनात हैं, ताकि यात्रियों की आवश्यकताओं और स्वास्थ्य पर नजर रखी जा सके।
पहला जत्था इस व्यापक कार्यक्रम का केवल शुरुआती हिस्सा है। पहले चरण में 20 सितंबर से 26 अक्टूबर के बीच 13 जिलों से कुल 10,434 तीर्थयात्रियों को पुरी ले जाने की योजना है। पूरी योजना का दीर्घकालिक लक्ष्य एक लाख वरिष्ठ नागरिकों को श्रीमंदिर दर्शन की सुविधा देना है, जबकि इस वर्ष 30,000 पात्र लाभार्थियों के लिए व्यवस्था की जा रही है।
इस योजना में केवल बस यात्रा शामिल नहीं है। स्वास्थ्य जांच, भोजन, किट बैग और तीर्थयात्रियों के ठहरने तथा दर्शन से संबंधित व्यवस्थाएं भी कार्यक्रम का हिस्सा हैं। पर्यटन विभाग की आधिकारिक परिचालन गाइडलाइन के अनुसार योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वरिष्ठ नागरिकों और पात्र विधवाओं के लिए सुरक्षित, व्यवस्थित और सुविधाजनक तीर्थयात्रा उपलब्ध कराना है।
योजना का असली परीक्षण अब इसके संचालन में होगा।
हजारों वरिष्ठ नागरिकों को अलग-अलग जिलों से पुरी तक ले जाने के लिए जिला प्रशासन, परिवहन व्यवस्था, स्वास्थ्यकर्मियों, पर्यटन अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन के बीच लगातार समन्वय जरूरी होगा। यात्रा जितनी बड़ी होगी, उसकी व्यवस्थागत चुनौतियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण होंगी।
दक्षिण ओडिशा से शुरू हुआ यह पहला चरण योजना को एक व्यापक सामाजिक और भौगोलिक स्वरूप देता है। दूरी के कारण श्रीक्षेत्र तक पहुंचना जिन लोगों के लिए कठिन हो सकता था, उनके लिए सरकारी व्यवस्था के माध्यम से यात्रा का रास्ता बनाया गया है।
राज्य के बजट में भी श्री जगन्नाथ दर्शन योजना के लिए वित्तीय प्रावधान किया गया है और नवंबर 2025 में इसकी औपचारिक परिचालन गाइडलाइन अधिसूचित की गई थी।
लेकिन यात्रा पर निकले बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए इन आंकड़ों से ज्यादा महत्वपूर्ण सुरक्षित यात्रा, स्वास्थ्य सुविधा और बिना अनावश्यक परेशानी के श्रीमंदिर तक पहुंचना है।
इसलिए 20 सितंबर से शुरू हुआ यह पहला जत्था केवल एक धार्मिक यात्रा का आरंभ नहीं है। यह इस बात की शुरुआती परीक्षा भी है कि राज्यव्यापी तीर्थयात्रा योजना को कितनी प्रभावी ढंग से जमीन पर लागू किया जा सकता है।
नाई भारत | भुवनेश्वर / NAI BHARAT
20 सितंबर 2026

