नाई भारत | 29 सितंबर 2026 , भुवनेश्वर: ओडिशा विधानसभा ने ओडिशा जन विश्वास बिल, 2026 को पारित कर दिया है। राज्य सरकार के अनुसार, इस कानून का उद्देश्य नागरिकों और कारोबार से जुड़े नियामकीय अनुपालनों को आसान बनाना तथा अनावश्यक प्रक्रियाओं और मंजूरियों को कम करना है।
उद्योग मंत्री संपद चंद्र स्वाईं ने सदन में विधेयक पेश किया। प्रस्तावित सुधारों के तहत राज्य के विभिन्न कानूनों में मौजूद छोटे, तकनीकी और प्रक्रियात्मक उल्लंघनों से संबंधित प्रावधानों को अधिक व्यावहारिक बनाने का प्रयास किया गया है।
इस विधेयक में 16 राज्य कानूनों की 62 धाराओं/प्रावधानों में बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें कुछ छोटे और प्रक्रियात्मक उल्लंघनों के लिए आपराधिक दंड के स्थान पर अधिक अनुपातिक नागरिक दंड की व्यवस्था का प्रावधान है। हालांकि गंभीर, बार-बार किए जाने वाले या जानबूझकर किए गए उल्लंघनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान बनाए रखने की बात कही गई है।
विधेयक का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू विभिन्न नियामकीय मंजूरियों को तर्कसंगत बनाना है। सरकार के अनुसार, प्रस्तावित बदलावों के तहत नौ नियामकीय अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल बनाने, लाइसेंस की वैधता अवधि बढ़ाने तथा कुछ मामलों में बार-बार नवीनीकरण और अतिरिक्त अनुमति की आवश्यकता कम करने पर जोर दिया गया है।
संपद चंद्र स्वाईं ने विधेयक के माध्यम से कागजी कार्रवाई, बार-बार अनुमति लेने की प्रक्रिया और अनुपालन से जुड़ी लागत को कम करने पर जोर दिया। साथ ही सार्वजनिक हित, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े आवश्यक प्रावधानों को बनाए रखने की बात भी सामने रखी गई।
यह कानून ओडिशा में पहले लागू किए गए जन विश्वास कानून, 2025 के बाद नियामकीय सुधारों का अगला चरण माना जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि कारोबार और नागरिकों के लिए सरकारी प्रक्रियाएं अधिक सरल और कम जटिल हों।
जन विश्वास बिल 2026 को विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान पारित किया गया। राज्य में बारिश और बाढ़ की स्थिति तथा सदन में लगातार व्यवधान के बीच 28 सितंबर को विधानसभा का सत्र निर्धारित समय से चार दिन पहले अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
अब विधेयक के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन और उनके वास्तविक प्रशासनिक असर पर नजर रहेगी।
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