ओडिशा विधानसभा में पहले दिन ही हंगामा, प्लेकार्ड लेकर वेल में पहुंचे BJD-कांग्रेस विधाय

स्कूल की किताबों में कथित गलतियों और MMDR संशोधन कानून पर टकराव; स्पीकर ने दो बार स्थगित की कार्यवाही

भुवनेश्वर: ओडिशा विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन मंगलवार को तीखे राजनीतिक विरोध के बीच शुरू हुआ। BJD और कांग्रेस के विधायक प्लेकार्ड लेकर सदन के वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी।

विरोध के केंद्र में दो प्रमुख मुद्दे रहे—स्कूली पाठ्यपुस्तकों में कथित गलतियां और Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Act, 2026

प्रश्नकाल शुरू होते ही विरोध तेज हुआ और सदन की सामान्य कार्यवाही प्रभावित हो गई।

श्रद्धांजलि से शुरू हुआ सदन, फिर बदला माहौल

सत्र की शुरुआत औपचारिक श्रद्धांजलि कार्यवाही से हुई।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने दिवंगत पूर्व विधायकों की स्मृति में शोक प्रस्ताव रखा। हाल की नेपाल बाढ़ त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति भी सदन ने संवेदना व्यक्त की।

नेता प्रतिपक्ष एवं BJD अध्यक्ष नवीन पटनायक, कांग्रेस विधायक दल के नेता रामचंद्र कदम और CPI(M) नेता लक्ष्मण मुंडा सहित सदस्यों ने श्रद्धांजलि दी। सदन में एक मिनट का मौन भी रखा गया।

इसके बाद प्रश्नकाल शुरू होते ही सदन का माहौल बदल गया।

BJD विधायक वेल में पहुंचे

BJD विधायक प्लेकार्ड लेकर वेल में पहुंच गए। उनका मुख्य विरोध कक्षा I से VIII की पाठ्यपुस्तकों में कथित त्रुटियों को लेकर था।

BJD ने इस मामले में सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की और स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की मांग उठाई। यह मांग BJD की राजनीतिक स्थिति है।

विपक्ष की मुख्य सचेतक प्रमिला मल्लिक ने कहा कि पार्टी मंत्री की जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रही है और पाठ्यपुस्तकों को दोबारा तैयार एवं वितरित करने पर हुए अतिरिक्त सरकारी खर्च की वसूली की भी मांग कर रही है।

MMDR कानून पर कांग्रेस का विरोध

कांग्रेस विधायकों ने MMDR Amendment Act, 2026 को लेकर विरोध जताया।

कांग्रेस ने संशोधित कानून को वापस लेने और ओडिशा के खनिज संसाधनों, राज्य के राजस्व तथा संबंधित अधिकारों पर इसके प्रभाव को लेकर विधानसभा में चर्चा की मांग की।

ये कांग्रेस नेताओं द्वारा रखे गए राजनीतिक दावे और मांगें हैं; इनके प्रभाव को लेकर अंतिम निष्कर्ष अलग विधायी और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

स्पीकर ने बार-बार की अपील

विरोध के दौरान विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने प्रदर्शन कर रहे सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की।

लेकिन विधायक वेल में बने रहे और नारेबाजी जारी रही।

स्थिति को देखते हुए स्पीकर ने करीब 11:36 बजे सदन को दोपहर 1:10 बजे तक स्थगित कर दिया। इससे प्रश्नकाल और जीरो आवर की कार्यवाही प्रभावित हुई।

1:10 बजे फिर शुरू हुआ विरोध

दोपहर 1:10 बजे सदन दोबारा बैठा, लेकिन विपक्षी सदस्यों का विरोध समाप्त नहीं हुआ।

BJD और कांग्रेस सदस्यों ने फिर से अपनी मांगों को लेकर विरोध किया। हंगामा जारी रहने के बाद सदन की कार्यवाही को फिर शाम 4 बजे तक स्थगित कर दिया गया।

इस तरह सत्र के पहले ही दिन विधानसभा की कार्यवाही दो बार बाधित हुई।

किताबों का विवाद पहले से गरम

पाठ्यपुस्तकों का मुद्दा विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले ही राजनीतिक विवाद का विषय बन चुका था।

BJD के युवा और छात्र संगठनों ने 22 सितंबर से दो दिन के विधानसभा घेराव का ऐलान किया था। संगठन कक्षा I-VIII की किताबों में कथित त्रुटियों को लेकर मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे और मामले की जांच की मांग कर रहे थे।

दूसरी ओर, स्कूल एवं जन शिक्षा विभाग ने संशोधित पाठ्यपुस्तकों का वितरण शुरू कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार पहले दिन 44,000 से अधिक संशोधित किताबें वितरित की गईं, जिनमें 41,150 ओड़िया और 3,150 उर्दू पाठ्यपुस्तकें शामिल थीं।

सरकार की ओर से सुधारात्मक कार्रवाई का दावा और विपक्ष की जवाबदेही की मांग अब इस विवाद के दो प्रमुख पक्ष हैं।

विधानसभा के बाहर भी प्रदर्शन

पहले स्थगन के बाद BJD विधायक विधानसभा से बाहर निकलकर लोअर PMG/महात्मा गांधी मार्ग क्षेत्र में पार्टी के युवा एवं छात्र संगठनों के प्रदर्शन में शामिल हुए।

यहां भी पाठ्यपुस्तक विवाद और मंत्री की जवाबदेही को लेकर विरोध जारी रहा।

सरकार ने कहा—चर्चा के लिए तैयार

सत्तारूढ़ पक्ष ने कहा है कि सरकार विधानसभा में उठाए जाने वाले मुद्दों पर जवाब देने के लिए तैयार है।

BJP विधायक टंकधर त्रिपाठी ने कहा कि सरकार हर प्रकार की चर्चा के लिए तैयार है और किस नियम के तहत किसी विषय पर चर्चा होगी, इसका निर्णय स्पीकर करेंगे।

सत्र शुरू होने से पहले संसदीय कार्य मंत्री मुकेश महालिंग ने भी कहा था कि सरकार राज्यहित के मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने बताया था कि सत्र के दौरान छह विधेयक लाए जाने की संभावना है।

3 अक्टूबर तक चलेगा मानसून सत्र

ओडिशा विधानसभा का यह मानसून सत्र 3 अक्टूबर 2026 तक चलना निर्धारित है और इसमें नौ कार्य दिवस हैं।

सत्र शुरू होने से पहले ही विपक्ष ने MMDR संशोधन, पाठ्यपुस्तक विवाद, प्रश्नपत्र लीक, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा सहित कई मुद्दों को उठाने की तैयारी की थी।

पहले दिन का हंगामा अब संकेत दे रहा है कि इन मुद्दों पर आने वाले दिनों में विधानसभा के भीतर राजनीतिक बहस तेज रह सकती है।

अब आगे क्या?

अब मुख्य सवाल यह है कि विरोध के बीच सरकार और विपक्ष विवादित मुद्दों को कितनी प्रभावी तरीके से सदन की औपचारिक चर्चा तक ले जाते हैं।

पाठ्यपुस्तक विवाद में सरकार की ओर से संशोधित किताबों का वितरण शुरू करने की बात सामने आई है, जबकि BJD राजनीतिक जवाबदेही की मांग पर कायम है।

इसी तरह MMDR संशोधन को लेकर कांग्रेस चर्चा और कानून वापस लेने की मांग कर रही है।

आने वाले दिनों में विधानसभा में शिक्षा, खनिज नीति, सरकारी खर्च और शासन से जुड़े अन्य मुद्दे प्रमुख बहस का हिस्सा रह सकते हैं।

नाई भारत न्यूज़ डेस्क | भुवनेश्वर