J&K पुलिस का दावा—LeT से जुड़े लॉजिस्टिक नेटवर्क में थे शामिल; राजौरी-रियासी से पीर पंजाल होते हुए आतंकियों की आवाजाही में मदद का आरोप
जम्मू — जम्मू-कश्मीर पुलिस ने राजौरी जिले में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से कथित रूप से जुड़े एक लॉजिस्टिक सपोर्ट नेटवर्क के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान मोहम्मद आजम, जाकिर हुसैन और मोहम्मद मुश्ताक के रूप में हुई है। तीनों राजौरी के कोट चरवाल इलाके के रहने वाले बताए गए हैं।
आतंकियों को शरण और लॉजिस्टिक सहायता देने का आरोप
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान तीनों के कथित रूप से लंबे समय से सक्रिय होने और कई आतंकी समूहों को सहायता देने के संकेत मिले।
आरोप है कि उन्होंने आतंकियों को शरण, लॉजिस्टिक सहायता और सुरक्षित आवाजाही में मदद की। पुलिस के मुताबिक यह नेटवर्क राजौरी-रियासी क्षेत्र से पीर पंजाल इलाके के रास्ते दक्षिण कश्मीर के शोपियां तक आतंकियों की आवाजाही को आसान बनाने में कथित रूप से सक्रिय था।
जांच के दौरान वर्ष 2023 में रियासी के चसाना इलाके में मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों को सहायता और उनके ठहरने से संबंधित कथित भूमिका की जानकारी भी सामने आने की बात पुलिस ने कही है।
IED, पिस्तौल और ग्रेनेड बरामद
पुलिस के अनुसार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर उनके गांव के पास जंगल क्षेत्र से एक Improvised Explosive Device (IED) बरामद किया गया।
इसके अलावा जांच के दौरान एक पिस्तौल, मैगजीन और गोला-बारूद तथा दो चीनी ग्रेनेड बरामद किए जाने की जानकारी पुलिस ने दी है।
पुलिस अब इन बरामद वस्तुओं के स्रोत और संभावित उपयोग सहित पूरे मामले की कड़ियों की जांच कर रही है।
पीर पंजाल के रास्ते आवाजाही पर जांच
इस मामले में जांच का एक प्रमुख हिस्सा आतंकियों की कथित आवाजाही के रास्तों और उन्हें उपलब्ध कराई गई स्थानीय सहायता से जुड़ा है।
पुलिस का आरोप है कि गिरफ्तार किए गए लोग गाइड के रूप में भी काम करते थे और आतंकियों को राजौरी-रियासी क्षेत्र से पीर पंजाल के रास्ते आगे बढ़ने में मदद करते थे।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस कथित नेटवर्क में और कितने लोग जुड़े हो सकते हैं और क्या इसके पीछे अतिरिक्त ठिकाने, संपर्क या वित्तीय सहायता की व्यवस्था थी।
आगे भी हो सकती है जांच
पुलिस ने कहा है कि मामले की जांच अभी जारी है। जांच का उद्देश्य कथित नेटवर्क की पूरी संरचना और उससे जुड़े अन्य लोगों की पहचान करना है।
अधिकारियों के अनुसार आने वाले चरण में आरोपियों के संपर्क, संभावित सहयोगियों, सुरक्षित ठिकानों और आतंकियों को दी गई अन्य सहायता की जांच की जा सकती है।
आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में OGW नेटवर्क पर फोकस
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई अब केवल सक्रिय आतंकियों तक सीमित नहीं है। आतंकियों को कथित रूप से शरण, परिवहन, हथियार रखने की जगह या अन्य लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने वाले Over Ground Worker (OGW) नेटवर्क भी जांच के दायरे में हैं।
राजौरी का यह मामला इसी व्यापक जांच का हिस्सा है, जिसमें सुरक्षा एजेंसियां आतंकियों की आवाजाही और उनके स्थानीय सहयोग तंत्र को तोड़ने पर ध्यान दे रही हैं।
हालांकि पुलिस ने गिरफ्तार लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वे अभी आरोपी हैं और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
नाई भारत | NAI BHARAT NWS DESK
19 सितंबर 2026

