अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 262-159 से विधेयक मंजूर किया; भारत और चीन जैसे रूसी ऊर्जा खरीदारों पर भारी शुल्क लगाने का राष्ट्रपति को अधिकार
WASHINGTON/NEW DELHI — रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका में लाया गया ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ प्रतिनिधि सभा से भी पारित हो गया है। अब यह विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास हस्ताक्षर के लिए जाएगा।
प्रतिनिधि सभा में विधेयक के पक्ष में 262 और विरोध में 159 वोट पड़े। इससे पहले अमेरिकी सीनेट इसे अगस्त में मंजूर कर चुकी थी। विधेयक का एक महत्वपूर्ण प्रावधान राष्ट्रपति को उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है जो बड़ी मात्रा में रूसी तेल या प्राकृतिक गैस खरीदते हैं। भारत और चीन इस प्रावधान के संभावित दायरे में आ सकते हैं।
विधेयक का उद्देश्य रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र पर आर्थिक दबाव बढ़ाना तथा उन देशों को भी प्रभावित करना है जो रूसी ऊर्जा की खरीद जारी रखते हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में रूस की प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले तेल परिवहन नेटवर्क पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को भी विधेयक में शामिल किया गया है।
क्या भारत पर तुरंत 100% टैरिफ लगेगा?
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। विधेयक पारित होने से राष्ट्रपति को अधिकतम 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की कानूनी शक्ति मिल सकती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत पर उसी दिन 100 प्रतिशत शुल्क लागू हो जाएगा।
अब अगला महत्वपूर्ण चरण राष्ट्रपति की मंजूरी और उसके बाद प्रशासन द्वारा इस अधिकार के इस्तेमाल से जुड़ा निर्णय होगा। विधेयक में कुछ परिस्थितियों में छूट और अलग-अलग देशों के ऊर्जा आयात से संबंधित प्रावधान भी हैं। इसलिए वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि ट्रंप प्रशासन कानून के तहत कौन-से कदम उठाता है।
भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रूसी कच्चा तेल देश की ऊर्जा खरीद व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। नई अमेरिकी व्यवस्था लागू होने पर भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के साथ-साथ भारतीय रिफाइनिंग और ऊर्जा लागत पर भी असर पड़ने की संभावना पर चर्चा शुरू हो गई है।
भारत सरकार ने इस घटनाक्रम के बीच अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए कच्चे तेल की खरीद से जुड़े फैसले करता है।
अमेरिकी कानून में प्रस्तावित अधिकतम 100 प्रतिशत टैरिफ का प्रावधान ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार से जुड़े मुद्दे पहले से ही संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे में नया कानून दोनों देशों के बीच चल रही व्यापारिक बातचीत में एक अतिरिक्त मुद्दा बन सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि अमेरिकी कानून में 100 प्रतिशत टैरिफ का प्रावधान है या नहीं—वह अब स्पष्ट है। असली सवाल यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप इस अधिकार का इस्तेमाल भारत के मामले में किस तरह और किस सीमा तक करते हैं।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से रूस-ईरान प्रतिबंध विधेयक का पारित होना भारत के लिए तत्काल 100% टैरिफ का आदेश नहीं है, बल्कि संभावित अमेरिकी कार्रवाई का नया कानूनी रास्ता है। अब भारत-अमेरिका संबंधों में अगला महत्वपूर्ण घटनाक्रम ट्रंप प्रशासन द्वारा इस अधिकार के इस्तेमाल और भारत की ऊर्जा सुरक्षा तथा व्यापारिक हितों के बीच बनने वाले संतुलन पर निर्भर करेगा।

