गवाह ललित मंगराज की शिकायत के बाद गुसानिनुआगांव थाने में FIR; पुलिस ने जेल डॉक्टर के चैंबर की CCTV फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों की जांच के बाद दर्ज किया मामला
ब्रह्मपुर: वरिष्ठ अधिवक्ता और भाजपा नेता पिताबास पांडा हत्याकांड में एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है। ओडिशा पुलिस ने पूर्व ब्रह्मपुर विधायक बिक्रम कुमार पांडा के खिलाफ जेल के अंदर से कथित तौर पर एक गवाह को फोन कर धमकाने के आरोप में नया मामला दर्ज किया है।
मामले में बिक्रम पांडा के करीबी मदन मोहन दलई और जेल डॉक्टर डॉ. सुषांत पाणिग्राही को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस के अनुसार, गवाह ललित मंगराज की शिकायत के बाद गुसानिनुआगांव पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया।
ब्रह्मपुर के एसपी सरवाना विवेक एम. ने बताया कि शिकायत की जांच के दौरान जेल के डॉक्टर के चैंबर में लगे CCTV कैमरों की फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की गई, जिसके बाद नया मामला दर्ज किया गया।
28 अगस्त की कथित कॉल बनी जांच का केंद्र
पुलिस के अनुसार, कथित घटना 28 अगस्त की है। उस समय बिक्रम पांडा पिताबास पांडा हत्याकांड में न्यायिक हिरासत में ब्रह्मपुर सर्किल जेल में बंद थे।
पुलिस का आरोप है कि बिक्रम पांडा और मदन मोहन दलई ने जेल के अंदर डॉक्टर के चैंबर से डॉ. सुषांत पाणिग्राही के मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर गवाह ललित मंगराज से संपर्क किया और उसे कथित रूप से धमकाया।
गवाह की शिकायत के बाद पुलिस ने केवल बयान के आधार पर कार्रवाई करने के बजाय कथित फोन संपर्क और जेल परिसर में हुई गतिविधियों से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की।
CCTV फुटेज ने बढ़ाई जांच की अहमियत
इस मामले में जेल के भीतर लगे CCTV कैमरे जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं।
एसपी के अनुसार, डॉक्टर के चैंबर में लगे CCTV की फुटेज की जांच की गई। इसके साथ ही फोन से जुड़े तकनीकी साक्ष्य भी जुटाए गए।
इन साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने कथित कॉल की परिस्थितियों और उसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच आगे बढ़ाई है।
हालांकि, पुलिस जांच में सामने आए आरोप अभी अदालत में साबित होना बाकी हैं।
जेल डॉक्टर की भूमिका भी जांच के घेरे में
नए मामले में जेल डॉक्टर डॉ. सुषांत पाणिग्राही की भूमिका भी जांच का हिस्सा बन गई है।
पुलिस का कहना है कि डॉक्टर के मोबाइल फोन का इस्तेमाल कथित तौर पर जेल के अंदर गवाह से बातचीत के लिए किया गया।
एसपी ने संकेत दिया है कि जेल डॉक्टर की भूमिका के संबंध में प्रशासन को भी जानकारी दी जाएगी। पुलिस यह जांच रही है कि न्यायिक हिरासत में मौजूद आरोपी तक मोबाइल फोन की पहुंच कैसे हुई और गवाह से बातचीत की परिस्थितियां क्या थीं।
जमानत के बाद सामने आया नया मामला
बिक्रम पांडा को 1 सितंबर 2026 को जेल से रिहा किया गया था। वह पिताबास पांडा हत्याकांड के सिलसिले में दस महीने से अधिक समय तक हिरासत में रहे थे।
अब सामने आया नया मामला उस कथित फोन बातचीत से जुड़ा है, जो उनकी जेल में रहते हुए 28 अगस्त को हुई बताई जा रही है।
इससे मामले की जांच में एक नया पहलू जुड़ गया है—मूल हत्याकांड के अलावा अब पुलिस को यह भी जांचना है कि न्यायिक हिरासत के दौरान किसी गवाह से कथित संपर्क और धमकी की घटना वास्तव में हुई थी या नहीं।
पिताबास पांडा हत्याकांड की पृष्ठभूमि
वरिष्ठ अधिवक्ता और भाजपा से जुड़े पिताबास पांडा की 6 अक्टूबर 2025 को ब्रह्मपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
पुलिस ने बाद में इस मामले में बिक्रम पांडा सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया था। रिपोर्टों के अनुसार, पूर्व ब्रह्मपुर मेयर शिव शंकर दास, बीजद पार्षद मलय बिसोई और मदन मोहन दलई समेत अन्य लोगों को भी मामले में गिरफ्तार किया गया था।
अब गवाह को कथित धमकी से जुड़ा नया FIR मूल हत्याकांड की जांच के समानांतर एक अलग कानूनी प्रक्रिया शुरू करता है।
अब जांच के सामने तीन बड़े सवाल
नए मामले में पुलिस की जांच मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर केंद्रित हो सकती है—
जेल के अंदर से कथित फोन कॉल किसने की?
डॉक्टर का मोबाइल फोन आरोपी तक कैसे पहुंचा?
क्या बातचीत वास्तव में गवाह को धमकाने या प्रभावित करने के उद्देश्य से की गई थी?
इन सवालों के जवाब CCTV फुटेज, तकनीकी साक्ष्य, कॉल से जुड़े रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बयानों से तलाशे जाएंगे।
गवाह की सुरक्षा पर भी बढ़ा ध्यान
पिताबास पांडा हत्याकांड की न्यायिक प्रक्रिया में गवाहों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में किसी गवाह को कथित धमकी दिए जाने की शिकायत सामने आने के बाद जांच का एक नया आयाम गवाह की सुरक्षा और स्वतंत्र बयान से भी जुड़ गया है।
पुलिस ने अभी आरोपों को अंतिम रूप से साबित नहीं माना है। नया FIR जांच की शुरुआत है और मामले में दोष या निर्दोषता का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
जेल के अंदर से कथित फोन कॉल, CCTV फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों की जांच अब यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि 28 अगस्त को वास्तव में क्या हुआ था और इस पूरी घटना में किसकी क्या भूमिका थी।

