खनन-धातु क्षेत्र में AI और ऑटोमेशन को बढ़ावा, ₹1 लाख करोड़ की RDI योजना से निजी R&D को नई दिशा

FICCI सम्मेलन में डॉ. जितेंद्र सिंह ने तकनीकी बदलाव और डीप-टेक नवाचार की जरूरत रेखांकित की

NEW DELHI — खनन और धातु उद्योग में डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन के बढ़ते इस्तेमाल के बीच केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने निजी क्षेत्र की अनुसंधान एवं विकास क्षमता को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

FICCI के Digitalization, AI, Automation & Technology Integration in Mining & Metals पर आयोजित तीसरे सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश में तकनीकी नवाचार को आगे बढ़ाने में निजी क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

सम्मेलन में चर्चा का केंद्र यह रहा कि खनन और धातु उद्योग पारंपरिक उत्पादन प्रणालियों से आगे बढ़कर डेटा, AI, ऑटोमेशन और उन्नत तकनीकों को अपने संचालन का हिस्सा कैसे बना सकता है। इन तकनीकों का इस्तेमाल उत्पादन प्रक्रियाओं, संसाधन प्रबंधन, सुरक्षा और परिचालन दक्षता को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने ₹1 लाख करोड़ की Research, Development and Innovation (RDI) Scheme को निजी क्षेत्र के लिए अनुसंधान और नवाचार के नए अवसरों से जोड़ते हुए इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। योजना का उद्देश्य उच्च-स्तरीय अनुसंधान और डीप-टेक तकनीकों के विकास में निजी भागीदारी को बढ़ाना है।

खनन और धातु क्षेत्र में तकनीकी बदलाव का महत्व इसलिए भी बढ़ रहा है क्योंकि उद्योग को उत्पादन क्षमता के साथ संसाधन दक्षता, सुरक्षा, पर्यावरणीय मानकों और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

ऐसे में AI आधारित विश्लेषण, स्वचालित प्रणालियां, डिजिटल निगरानी और उन्नत डेटा तकनीकें औद्योगिक प्रक्रियाओं को अधिक तकनीक-केंद्रित बनाने में भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, इन तकनीकों का व्यापक इस्तेमाल कुशल मानव संसाधन, अनुसंधान निवेश और उद्योग-शिक्षा संस्थानों के सहयोग पर भी निर्भर करेगा।

भारत के खनन क्षेत्र में तकनीकी नवाचार की जरूरत ऐसे समय सामने आ रही है जब खनिज संसाधनों से लेकर धातु उत्पादन तक पूरी मूल्य श्रृंखला को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने पर नीति स्तर पर चर्चा जारी है। हालिया NITI Aayog विश्लेषण ने भी खनन क्षेत्र में नियामकीय सुधार, बेहतर भू-वैज्ञानिक डेटा, बुनियादी ढांचे और निवेश वातावरण को मजबूत करने की जरूरत बताई है।

RDI योजना के जरिए निजी कंपनियों को उच्च जोखिम वाले अनुसंधान और डीप-टेक क्षेत्रों में निवेश के लिए बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद जताई गई है। इससे औद्योगिक जरूरतों और अनुसंधान संस्थानों के बीच तकनीकी सहयोग को बढ़ाने की संभावनाएं भी खुल सकती हैं।

खनन और धातु उद्योग में अगला बदलाव केवल अधिक उत्पादन का नहीं, बल्कि अधिक बुद्धिमान उत्पादन प्रणालियों का है। AI, ऑटोमेशन और डीप-टेक के साथ ₹1 लाख करोड़ की RDI योजना निजी R&D को उद्योग की वास्तविक चुनौतियों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीति पहल के रूप में सामने आ रही है।

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