बंगाल की खाड़ी में बना मौसम तंत्र मजबूत हो रहा है; शहरी जलभराव से लेकर तटबंध निगरानी तक कई व्यवस्थाओं पर बढ़ेगा दबाव
भुवनेश्वर: ओडिशा में अगले कुछ दिन केवल बारिश के पूर्वानुमान के कारण महत्वपूर्ण नहीं हैं। असली चुनौती यह होगी कि भारी बारिश के दौरान शहरों की जल निकासी, ग्रामीण इलाकों के तटबंध, सड़क संपर्क और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था कितनी तेजी से काम करती है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के भुवनेश्वर केंद्र ने 20 सितंबर को जारी चेतावनी में 22 सितंबर को बहुत भारी बारिश और 23 तथा 24 सितंबर को अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई है। इसके बाद भी 25 और 26 सितंबर को बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान है। गरज और बिजली गिरने की गतिविधि की चेतावनी भी जारी है।
बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव क्षेत्र धीरे-धीरे मजबूत होने की दिशा में है। उपलब्ध IMD आधारित रिपोर्ट के अनुसार इसके पहले अवदाब और फिर गहरे अवदाब में बदलने की संभावना है। इसके बाद इसके ओडिशा–उत्तर आंध्र तट की ओर बढ़ने का अनुमान है। हालांकि फिलहाल IMD ने इसे चक्रवात के रूप में घोषित नहीं किया है।
इसका अर्थ यह है कि चक्रवात की घोषणा का इंतजार किए बिना तैयारी का स्तर बढ़ाना महत्वपूर्ण है।
भारी बारिश का प्रभाव केवल नदियों के जलस्तर तक सीमित नहीं रहता। शहरों में नालियों की क्षमता, निचले इलाकों में जल निकासी, सड़क यातायात, बिजली व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं पर एक साथ दबाव बन सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में तस्वीर अलग हो सकती है। वहां तटबंध, नदी किनारे बसे गांव, छोटे पुल, संपर्क सड़कें और जल निकासी संरचनाएं अधिक संवेदनशील हो सकती हैं।
ओडिशा का विशेष राहत संगठन आपदा की रोकथाम, तैयारी, प्रतिक्रिया, राहत और पुनर्वास से जुड़े कार्यों का समन्वय करता है तथा जिलों के साथ मिलकर आपात स्थितियों में कार्रवाई करता है।
लेकिन किसी भी आपदा-तैयारी व्यवस्था की वास्तविक परीक्षा कागज पर नहीं, बल्कि जमीन पर होती है।
क्या जलभराव वाले स्थानों की पहले से पहचान हो चुकी है? क्या पंपिंग व्यवस्था काम करने की स्थिति में है? क्या संवेदनशील तटबंधों पर निगरानी बढ़ाई गई है? क्या आपातकालीन सामग्री उपलब्ध है? क्या किसी सड़क के कट जाने या जलमग्न होने की स्थिति में वैकल्पिक संपर्क तैयार है?
ओडिशा के जल संसाधन विभाग की आपदा प्रबंधन संबंधी दिशा-निर्देशों में संवेदनशील तटबंधों की लगातार निगरानी, पुराने कटाव या टूटने वाले स्थानों पर विशेष ध्यान तथा आपातकालीन सामग्री पहले से उपलब्ध रखने पर जोर दिया गया है।
आगामी बारिश इसलिए प्रशासन के लिए एक बहु-स्तरीय परीक्षण बन सकती है।
यह समय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य धीरे-धीरे त्योहारों के व्यस्त मौसम की ओर बढ़ रहा है। भारी बारिश के साथ यदि जलभराव, सड़क व्यवधान, बिजली समस्या या स्थानीय बाढ़ की स्थिति बनती है, तो भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
ओडिशा सरकार ने हाल में पुरी में BRICS Disaster Risk Reduction Working Group की बैठक के दौरान राज्य के शुरुआती चेतावनी तंत्र और “Zero Casualty” आपदा-प्रबंधन दृष्टिकोण को रेखांकित किया था।
अब आने वाला मौसम उस तैयारी की एक और व्यावहारिक परीक्षा पेश कर रहा है।
इसका मतलब यह नहीं कि हर क्षेत्र में जलभराव को पूरी तरह रोका जा सकता है। अत्यधिक बारिश के दौरान स्थानीय स्तर पर पानी जमा होना संभव है। महत्वपूर्ण यह है कि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान पहले से हो, चेतावनी समय पर पहुंचे, आवश्यक सड़क और संचार संपर्क उपलब्ध रहें और राहत-बचाव की कार्रवाई समस्या बढ़ने से पहले शुरू हो सके।
अगले कुछ दिन इसी क्षमता की परीक्षा लेंगे।
मौसम प्रणाली अभी विकसित हो रही है, इसलिए पूर्वानुमान में बदलाव संभव है। लोगों के लिए जिला प्रशासन और IMD की स्थानीय चेतावनियां सबसे महत्वपूर्ण रहेंगी।
प्रशासन के लिए प्राथमिकता तैयारी है।
और ओडिशा के लिए अगले 96 घंटे यह दिखाने का अवसर होंगे कि पूर्व चेतावनी को कितनी तेजी से जमीन पर प्रभावी कार्रवाई में बदला जा सकता है।
नाई भारत | भुवनेश्वर

