प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत ऋण लेने वाले ग्राहक की बढ़ी मुश्किलें, बैंकिंग प्रक्रिया और बीमा संबंधी मामलों की जांच की मांग
भुवनेश्वर: प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत ऋण लेकर फ्लाई ऐश ईंट निर्माण इकाई स्थापित करने वाले भुवनेश्वर के एक उद्यमी ने भारतीय रिजर्व बैंक के लोकपाल के समक्ष भारतीय स्टेट बैंक की चंदका औद्योगिक परिसर शाखा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में ऋण वितरण, खाते से जुड़ी कथित समस्या, परियोजना शुरू करने में आई बाधा, लगातार ऋण किस्तों के दबाव तथा बीमा दस्तावेजों में दर्ज पते के अंतर सहित कई गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं।

एम/एस तारा फ्लाई ऐश ब्रिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के स्वामी सनातन दलबेहरा ने अपनी शिकायत में कहा है कि उन्होंने एक वैध व्यवसाय स्थापित करने और बैंक ऋण की नियमित अदायगी के उद्देश्य से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत वित्तीय सहायता ली थी। उनका कहना है कि बैंक से वित्तीय स्वीकृति मिलने के बावजूद परियोजना को अपेक्षित समय में पूरी तरह चालू करने में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
44.90 लाख रुपये की वित्तीय सहायता

शिकायत के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक ने 23 जून 2025 को प्रधानमंत्री रोजगार सृजन परियोजना के लिए कुल 44.90 लाख रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की थी। इसमें 36.90 लाख रुपये का सावधि ऋण तथा 8 लाख रुपये की कार्यशील पूंजी सीमा शामिल थी।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने निर्धारित स्वयं का अंशदान भी जमा किया और बैंक की स्वीकृति पर भरोसा करते हुए परियोजना को आगे बढ़ाया।
उनके अनुसार, परियोजना का उद्देश्य मशीनरी स्थापित कर फ्लाई ऐश ईंटों का उत्पादन शुरू करना, बिक्री से आय अर्जित करना और उसी आय से बैंक की ऋण किस्तों का भुगतान करना था।
खाते में बताई गई ‘समस्या’ पर मांगा स्पष्ट जवाब
शिकायत का एक प्रमुख मुद्दा खाते से जुड़ी उस कथित समस्या को लेकर है, जिसकी जानकारी बैंक अधिकारियों ने परियोजना के अगले चरण में ऋण राशि जारी करने के दौरान शिकायतकर्ता को दी थी।
सनातन दलबेहरा का कहना है कि उन्होंने बैंक अधिकारियों से बार-बार पूछा कि समस्या क्या है, कब उत्पन्न हुई, उसका कारण क्या है और उसका परियोजना की आगे की वित्तीय प्रक्रिया पर क्या प्रभाव पड़ा। उनका आरोप है कि उन्हें इस संबंध में स्पष्ट और संतोषजनक लिखित जवाब नहीं मिला।
उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक के लोकपाल से बैंक के अभिलेखों के आधार पर पूरे मामले की जांच कराने तथा भारतीय स्टेट बैंक से स्पष्ट लिखित जवाब दिलाने का अनुरोध किया है।
परियोजना में देरी का भी उठाया मुद्दा
शिकायत में मशीनरी के प्रथम चरण में राशि जारी किए जाने की तारीख 14 अगस्त 2026 बताई गई है। हालांकि, शिकायतकर्ता ने स्वयं भारतीय रिजर्व बैंक से बैंक के खाते और संबंधित अभिलेखों के आधार पर इस तारीख का सत्यापन कराने का अनुरोध किया है।
उनका कहना है कि मशीनरी की स्थापना और उससे जुड़े कार्यों में लगभग डेढ़ महीने का समय लगा तथा विभिन्न परिस्थितियों के कारण निर्माण इकाई अपेक्षित समय में सामान्य उत्पादन शुरू नहीं कर सकी।
शिकायत में 22 जनवरी 2026 को 4.90 लाख रुपये के अतिरिक्त सावधि ऋण का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने इस अतिरिक्त ऋण की प्रक्रिया तथा मूल प्रधानमंत्री रोजगार सृजन परियोजना से उसके संबंध को स्पष्ट करने की मांग की है।
बीमा में दर्ज पते को लेकर बड़ा सवाल
शिकायत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बीमा दस्तावेजों में दर्ज पते को लेकर है।
शिकायतकर्ता के अनुसार उनकी वास्तविक निर्माण इकाई प्लॉट संख्या 3(पी), आईडीसीओ औद्योगिक क्षेत्र, जगन्नाथपुर, गोहाल, बालियांता, भुवनेश्वर, ओडिशा में स्थित है। उनका कहना है कि बीमा दस्तावेजों में इसके स्थान पर अलग पता दर्ज किया गया था।
इसी अंतर को लेकर उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक की भूमिका की जांच की मांग की है। उन्होंने पूछा है कि बैंक के प्रधानमंत्री रोजगार सृजन परियोजना अभिलेखों में कौन-सा पता दर्ज था, बीमा के लिए कौन-सा पता भेजा गया, यह जानकारी किस अधिकारी या विभाग ने उपलब्ध कराई और क्या वास्तविक निर्माण स्थल का सत्यापन किया गया था।
तूफान से लगभग 2 लाख रुपये के नुकसान का दावा
शिकायत में 8 जून 2026 को वास्तविक निर्माण परिसर में भारी वर्षा और तूफानी परिस्थितियों के कारण नुकसान होने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता ने इस नुकसान का अनुमान लगभग 2 लाख रुपये बताया है।
उनका कहना है कि उन्होंने बीमा संबंधी मामले के समाधान के लिए भारतीय स्टेट बैंक से कई बार संपर्क किया, लेकिन उन्हें संतोषजनक समाधान नहीं मिला।
29 अगस्त को चोरी, लगभग 3 लाख रुपये के नुकसान का दावा
शिकायत में 29 अगस्त 2026 को निर्माण परिसर के एक कार्यालय कक्ष का ताला टूटने और विभिन्न सामान चोरी होने की भी जानकारी दी गई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार चोरी गए सामान में विद्युत सामग्री, बिजली के तार, पानी का पंप और मोटर, पंखे, प्रकाश उपकरण, गैस सिलेंडर, निर्माण सामग्री तथा अन्य परियोजना से संबंधित सामान शामिल हैं। उन्होंने चोरी से लगभग 3 लाख रुपये के नुकसान का दावा किया है।
मामले की सूचना पहल थाना पुलिस को दी गई। शिकायत में पुलिस मामला संख्या 382/26, दिनांक 29 अगस्त 2026 तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 305(ए) का उल्लेख किया गया है।
चोरी का बीमा दावा भी अस्वीकार
शिकायतकर्ता ने चोरी से संबंधित बीमा दावा संख्या 2027-1713299 तथा बीमा पॉलिसी/संदर्भ संख्या 202601008058000-00 का उल्लेख किया है।
उनके अनुसार, बीमा कंपनी ने 15 सितंबर 2026 के पत्र के माध्यम से दावा अस्वीकार कर दिया। शिकायतकर्ता का कहना है कि पॉलिसी में दर्ज पता और वास्तविक घटना स्थल के बीच अंतर इस मामले में प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा।
हालांकि, उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक के समक्ष स्पष्ट किया है कि उनकी शिकायत केवल बीमा कंपनी से दावा राशि दिलाने तक सीमित नहीं है। उनका मुख्य आग्रह भारतीय स्टेट बैंक की बैंकिंग सेवा, दस्तावेजी प्रक्रिया, सूचना के आदान-प्रदान तथा बीमा व्यवस्था से संबंधित बैंक की भूमिका की जांच से जुड़ा है।
‘ऋण चुकाने से बचने का प्रयास नहीं’
सनातन दलबेहरा ने अपनी शिकायत में कहा है कि उन्होंने बैंक से ऋण किसी वैध देनदारी से बचने के लिए नहीं लिया था। उनका उद्देश्य एक वैध विनिर्माण व्यवसाय स्थापित करना और उससे होने वाली आय के माध्यम से भारतीय स्टेट बैंक की ऋण किस्तों का भुगतान करना था।
उनका कहना है कि परियोजना से अपेक्षित आय नहीं हो पाने के बावजूद ऋण की मासिक किस्तों का दबाव बना रहा, जिससे उन पर गंभीर आर्थिक दबाव पड़ा।
उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक से परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लागू नियमों के तहत ऋण पुनर्गठन, पुनर्निर्धारण अथवा अन्य अनुमत राहत पर विचार करने का अनुरोध किया है।
20 लाख रुपये मुआवजे की मांग
शिकायतकर्ता ने परियोजना से जुड़े कथित वित्तीय और व्यावसायिक नुकसान के लिए 20 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है। इसके अलावा समय, खर्च तथा मानसिक परेशानी से संबंधित लागू मुआवजे पर भी विचार करने का अनुरोध किया गया है।
भारतीय रिजर्व बैंक के एकीकृत लोकपाल ढांचे के तहत विनियमित संस्थाओं की सेवा में कमी से संबंधित शिकायतों की निर्धारित शर्तों और अधिकार-क्षेत्र के अधीन जांच की जा सकती है। मुआवजे की सीमा भी संबंधित योजना के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित होती है।
अतिरिक्त दस्तावेज देने को तैयार
शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि भारतीय रिजर्व बैंक के लोकपाल की ओर से किसी अतिरिक्त दस्तावेज, स्पष्टीकरण, मूल अभिलेख अथवा अन्य जानकारी की आवश्यकता होती है, तो वह उसे उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक से प्रत्येक मुद्दे पर बिंदुवार और लिखित जवाब देने की मांग भी की है।
अब शिकायत में उठाए गए आरोपों और दावों पर भारतीय स्टेट बैंक का पक्ष, बैंक के संबंधित अभिलेख तथा भारतीय रिजर्व बैंक की सक्षम शिकायत निवारण प्रक्रिया के तहत होने वाली जांच आगे की स्थिति स्पष्ट करेगी।
नाई भारत
23 सितंबर 2026 | भुवनेश्वर

