समुद्र से जमीन तक सुरक्षा की परीक्षा: पारादीप में शुरू हुआ ‘सागर कवच-II’

दो दिवसीय बहु-एजेंसी अभ्यास में 18 से अधिक विभाग शामिल; घुसपैठ की काल्पनिक चुनौती के बीच निगरानी, सूचना-साझाकरण और त्वरित कार्रवाई की परखी जा रही क्षमता

पारादीप: ओडिशा के तटीय सुरक्षा तंत्र की तैयारियों को परखने के लिए पारादीप में दो दिवसीय संयुक्त तटीय सुरक्षा अभ्यास ‘सागर कवच-II’ शुरू हो गया है। 18 से अधिक सुरक्षा एजेंसियों और सरकारी विभागों की भागीदारी वाला यह अभ्यास केवल समुद्र में संदिग्ध गतिविधियों की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी जांच रहा है कि समुद्र से उत्पन्न किसी संभावित खतरे के जमीन तक पहुंचने की स्थिति में विभिन्न एजेंसियां कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से एक साथ काम कर सकती हैं।

इस अभ्यास का मुख्य फोकस खतरे की पहचान, सूचना का तत्काल आदान-प्रदान, निगरानी, घेराबंदी, अवरोधन और त्वरित प्रतिक्रिया की पूरी श्रृंखला को परखना है।

अभ्यास में भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल, ओडिशा पुलिस, मरीन पुलिस, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), सीमा शुल्क विभाग, मत्स्य विभाग, खुफिया एजेंसियां, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और वन विभाग सहित कई एजेंसियां हिस्सा ले रही हैं।

काल्पनिक घुसपैठ, वास्तविक सुरक्षा तंत्र की परीक्षा

‘सागर कवच-II’ में सुरक्षा तैयारियों को वास्तविक चुनौती जैसा स्वरूप देने के लिए प्रतिभागियों को रेड टीम और ब्लू टीम में बांटा गया है।

रेड टीम संभावित घुसपैठियों या आतंकियों की भूमिका निभाते हुए समुद्री तथा जमीन के रास्तों से प्रवेश करने की कोशिश करने वाली काल्पनिक स्थिति तैयार करती है।

इसके जवाब में ब्लू टीम का दायित्व संदिग्ध गतिविधि का पता लगाना, उसकी निगरानी करना, संभावित घुसपैठ को रोकना और खतरे को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया को अंजाम देना है।

इस व्यवस्था के जरिए सुरक्षा एजेंसियों को यह परखने का अवसर मिल रहा है कि अचानक सामने आने वाली परिस्थिति में उनका प्रतिक्रिया तंत्र कितना तेजी से सक्रिय होता है।

पारादीप के संवेदनशील इलाकों पर बढ़ी निगरानी

अभ्यास के दौरान महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों, होटल, संभावित लैंडिंग प्वाइंट, नावों के ठिकानों और अन्य संवेदनशील तटीय क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

इसका उद्देश्य यह समझना है कि समुद्र में शुरू होने वाली किसी सुरक्षा चुनौती को तट तक पहुंचने से पहले किस तरह पहचाना और नियंत्रित किया जा सकता है तथा यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति तट तक पहुंच जाता है तो जमीन पर मौजूद एजेंसियां किस तरह प्रतिक्रिया देती हैं।

यानी अभ्यास की निगाह केवल समुद्र पर नहीं, बल्कि समुद्र से तट और तट से जमीन तक पूरे सुरक्षा गलियारे पर है।

18 से अधिक एजेंसियों के बीच तालमेल की अग्निपरीक्षा

इतनी बड़ी संख्या में एजेंसियों की भागीदारी के कारण ‘सागर कवच-II’ का एक महत्वपूर्ण पहलू इंटर-एजेंसी समन्वय है।

समुद्र में किसी संदिग्ध गतिविधि का पता लगने के बाद सूचना को संबंधित समुद्री सुरक्षा एजेंसियों से पुलिस और अन्य जमीनी इकाइयों तक तेजी से पहुंचाना आवश्यक होता है।

अभ्यास के दौरान इसी सूचना श्रृंखला, संचार व्यवस्था, बलों की तैनाती और विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल को परखा जा रहा है।

26/11 के बाद बदली तटीय सुरक्षा की तस्वीर

भारत में तटीय सुरक्षा को लेकर तैयारियों का महत्व 26 नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद और बढ़ा, जब हमलावर समुद्री मार्ग से मुंबई पहुंचे थे।

उस घटना ने समुद्री रास्तों की निगरानी, तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता को सामने रखा।

इसके बाद भारत में तटीय निगरानी, समुद्री क्षेत्र की जागरूकता, खुफिया जानकारी साझा करने और समुद्री तथा जमीनी सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करने पर लगातार जोर दिया गया।

सिर्फ समुद्र की निगरानी नहीं, पूरी सुरक्षा श्रृंखला का परीक्षण

पारादीप में चल रहे अभ्यास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह केवल समुद्र में किसी संदिग्ध नाव या गतिविधि की पहचान की क्षमता को नहीं परख रहा।

यह पूरी सुरक्षा श्रृंखला को एक साथ देख रहा है—

पहचान → सूचना साझा करना → निगरानी → अवरोधन → तटीय प्रतिक्रिया → समन्वय → खतरे को निष्क्रिय करना।

यही वजह है कि इस अभ्यास को तटीय सुरक्षा के विभिन्न स्तरों के बीच वास्तविक समय के तालमेल की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।

ओडिशा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है पारादीप अभ्यास?

ओडिशा की समुद्री सीमा के साथ महत्वपूर्ण बंदरगाह, औद्योगिक प्रतिष्ठान, तटीय बस्तियां और मछली पकड़ने वाले समुदाय जुड़े हुए हैं। ऐसे में समुद्री सुरक्षा केवल सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं रहती, बल्कि पुलिस, प्रशासन, आपदा प्रबंधन और विभिन्न नागरिक विभागों के बीच समन्वय भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

‘सागर कवच-II’ इसी बहुस्तरीय व्यवस्था को एक साथ सक्रिय करके उसकी कार्यक्षमता को परखने का अवसर दे रहा है।

दो दिनों का अभ्यास, लंबे समय की तैयारी का आधार

अभ्यास के दौरान रेड टीम द्वारा पैदा की जाने वाली काल्पनिक सुरक्षा चुनौतियां और ब्लू टीम की प्रतिक्रिया एजेंसियों को अपनी तैयारियों की वास्तविक स्थिति समझने में मदद करेंगी।

ऐसे अभ्यासों से यह पता लगाया जा सकता है कि किसी आपात स्थिति में कहां सूचना पहुंचने में देरी हो सकती है, कहां समन्वय की आवश्यकता बढ़ सकती है और किन स्तरों पर प्रतिक्रिया को और तेज किया जा सकता है।

पारादीप में ‘सागर कवच-II’ का व्यापक उद्देश्य समुद्र में किसी संभावित खतरे की पहचान से लेकर जमीन पर अंतिम प्रतिक्रिया तक एक ऐसी समन्वित सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा करना है, जिसमें किसी भी स्तर पर सूचना और कार्रवाई के बीच अंतर कम से कम हो।

इस अर्थ में पारादीप का यह अभ्यास ओडिशा के लिए केवल दो दिन की सुरक्षा ड्रिल नहीं, बल्कि समुद्र से जमीन तक पूरी तटीय सुरक्षा श्रृंखला की एक व्यावहारिक परीक्षा बन गया है।

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