नाई भारत | 29 सितंबर 2026 , भुवनेश्वर: प्रसिद्ध ओड़िया कवि कविवर राधानाथ राय की राज्य स्तरीय जयंती मंगलवार को भुवनेश्वर स्थित गीतगोविंद सदन में मनाई गई। कार्यक्रम में साहित्यकारों, शोधकर्ताओं, संपादकों और साहित्यिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने कविवर राधानाथ राय के साहित्यिक योगदान और ओड़िया अस्मिता में उनकी भूमिका को याद किया।
कार्यक्रम का आयोजन ओड़िया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति विभाग के तत्वावधान में ओडिशा साहित्य अकादमी तथा कविवर साहित्य एवं सेवा प्रतिष्ठान के संयुक्त सहयोग से किया गया। इस अवसर पर साहित्यिक सभा के साथ एक विशेष परिचर्चा भी आयोजित की गई।
कार्यक्रम में संस्कृति मंत्री सूर्यवंशी सूरज मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। अपने संबोधन में उन्होंने राधानाथ राय के जीवन, साहित्यिक यात्रा और उनकी प्रमुख रचनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कविवर की साहित्यिक सृजनशीलता आज भी समाज और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

संस्कृति मंत्री ने कहा कि राधानाथ राय की रचनाओं में ओड़िया पहचान और भारतीय चेतना का विशिष्ट समन्वय दिखाई देता है। उनकी कविताओं में ओड़िया अस्मिता को प्रभावशाली अभिव्यक्ति मिली और स्थानीय अनुभवों को व्यापक मानवीय भावनाओं से जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है।
मंत्री ने कहा कि राधानाथ राय ने अपनी साहित्यिक रचनाओं के माध्यम से निर्जीव प्रतीत होने वाली चीजों में भी जीवन का भाव पैदा किया और सीमित अनुभवों को व्यापक दुनिया से जोड़ने का काम किया। उन्होंने कविवर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए युवा साहित्यकारों से उनके जीवन और साहित्यिक आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
उन्होंने यह भी कहा कि राधानाथ राय की साहित्यिक कृतियां आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन का कार्य करती रहें, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
‘कल और आज के अखबारों में साहित्य’ पर चर्चा
कार्यक्रम में “कल और आज के अखबारों में साहित्य” विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। इसमें संबाद के संस्थापक एवं पूर्व संपादक सौम्य रंजन पटनायक, प्रमेय के संपादक गोपालकृष्ण महापात्र, सुवार्ता के संपादक प्रद्युम्न शतपथी, प्रख्यात साहित्यकार प्रो. डॉ. आदिकंद साहू, साहित्यकार प्रो. डॉ. संघमित्रा मिश्रा तथा उत्कल साहित्य समाज के महासचिव राजीव कुमार षडंगी ने भाग लिया।
परिचर्चा में समाचार पत्रों में साहित्य की बदलती भूमिका, साहित्यिक अभिव्यक्ति के लिए प्रिंट मीडिया के योगदान तथा समय के साथ साहित्य और पत्रकारिता के संबंधों में आए बदलावों पर विचार रखे गए।
कार्यक्रम में ओडिशा साहित्य अकादमी के सचिव डॉ. चंद्रशेखर होता, कविवर साहित्य एवं सेवा प्रतिष्ठान के सचिव देव नारायण सेठी, अध्यक्ष गोपी नाथ बारिक तथा साहित्यकार एवं शोधकर्ता डॉ. अरविंद गिरि सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
राज्य स्तरीय यह आयोजन राधानाथ राय की साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी के संदर्भ में याद करने और ओड़िया साहित्य में उनके योगदान की प्रासंगिकता पर विचार करने का अवसर बना।
#RadhanathRay #OdiaLiterature #OdishaCulture #OdiaLanguage #SuryabanshiSuraj #OdishaSahityaAkademi #Literature #OdishaNews

