भूमि अधिकार और बस्ती उजाड़ने पर रोक की मांग, कटक में बस्तीवासियों का बड़ा प्रदर्शन

संयुक्त मंच ने पांच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा; पुनर्वास को रोजगार के नजदीक रखने और बस्तियों की पूरी सूची सार्वजनिक करने की मांग

कटक, 22 सितंबर:
भूमि अधिकार, बिना पुनर्वास के बस्ती हटाने पर रोक और आजीविका की सुरक्षा की मांग को लेकर कटक में मंगलवार को बस्तीवासियों ने बड़ा प्रदर्शन किया। बस्तीवासियों के संयुक्त मंच के नेतृत्व में निकला जुलूस जिला कलेक्टर कार्यालय के निकट पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराया।

प्रदर्शन के बाद मंच की ओर से पांच सूत्रीय मांगों वाला ज्ञापन जिला कलेक्टर के माध्यम से ओडिशा के गृह एवं नगर विकास मंत्री को सौंपा गया।

भूमि अधिकार से लेकर पुनर्वास तक मांग

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में पात्र बस्तीवासियों को भूमि अधिकार देना, बिना उचित पुनर्वास के चल रही बस्ती हटाने की कार्रवाई रोकना तथा विस्थापित परिवारों को उनके रोजगार और कार्यस्थल के आसपास पुनर्वासित करना शामिल है।

मंच का कहना है कि केवल आवास उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। यदि पुनर्वास स्थल रोजगार के मौजूदा क्षेत्र से बहुत दूर होगा, तो दैनिक मजदूरी, घरेलू काम, छोटे कारोबार और अन्य स्थानीय आजीविका पर असर पड़ सकता है।

प्रदर्शनकारियों ने बस्तियों में सड़क, जल, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं के साथ मानवीय और रहने योग्य वातावरण उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई।

कटक की बस्तियों और निवासियों की पूरी सूची सार्वजनिक करने की मांग

संयुक्त मंच ने कटक महानगर क्षेत्र की बस्तियों तथा वहां रहने वाले परिवारों की पूर्ण सूची सार्वजनिक करने की मांग की है।

मंच के अनुसार, लाभार्थियों की पारदर्शी पहचान भूमि अधिकार, आवास और पुनर्वास से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण है।

प्रदर्शन का संचालन मंच के संयोजक खगेश्वर सेठी ने किया। विश्वावसु दास, राजकिशोर मल्लिक और बसंत नायक सहित अन्य वक्ताओं ने सभा को संबोधित किया।

प्रदर्शन में दीपक दास, स्वाधीन बेहरा, सिप्रा महांति, सुकांत नायक, नयना नायक, गंगाधर दलई, सुजाता महापात्र, बिचित्र पात्र, शिव बेहरा, सुरेंद्र नाथ मुर्मू, चांदू हेम्ब्रम, जीतू मरांडी, बापी मुर्मू, रेणुबाला दास, गीता देवी साहा, सरस्वती सूत्र, ज्योत्स्ना पाल, शांतिलता प्रधान, धरणीधर महाराणा, प्रदीप सेनापति, महेंद्र परिड़ा, रीना मल्लिक, धनी साहू, रीता दलई, कान्हुचरण दास, सुदर्शन बारिक, दीनबंधु नायक और सस्मिता दास समेत कई बस्ती प्रतिनिधि मौजूद रहे।

JAGA Mission और भूमि अधिकार कानून का संदर्भ

ओडिशा में बस्तीवासियों के भूमि अधिकार का मुद्दा नया नहीं है। राज्य सरकार ने Odisha Land Rights to Slum Dwellers Act, 2017 लागू किया था और बाद में JAGA Mission के माध्यम से बस्तियों को रहने योग्य आवासीय क्षेत्रों में बदलने तथा पात्र परिवारों को भूमि अधिकार देने की नीति आगे बढ़ाई गई।

सरकारी JAGA Mission के अनुसार, इसका उद्देश्य केवल भूमि अधिकार देना ही नहीं, बल्कि बस्तियों में आधारभूत नागरिक सुविधाओं, बेहतर आवास और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से जीवन-स्तर में सुधार करना भी है।

2024 के चुनावी वादे का भी उठा मुद्दा

प्रदर्शन के दौरान 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा द्वारा किए गए आवास और बस्ती पुनर्वास संबंधी वादों का भी उल्लेख किया गया।

भाजपा के 2024 ओडिशा विधानसभा घोषणापत्र में बस्तीवासियों के लिए 600 वर्गफुट जमीन/मकान उपलब्ध कराने तथा बस्ती पुनर्वास एवं प्रबंधन नीति लागू करने का वादा दर्ज था।

प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि सरकार के कार्यकाल के दो वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी जिन परिवारों को भूमि और आवास सुरक्षा की अपेक्षा है, उन्हें विस्थापन की स्थिति का सामना क्यों करना पड़ रहा है।

हालांकि, यह प्रदर्शनकारियों द्वारा उठाया गया राजनीतिक आरोप और सवाल है। संबंधित बस्तियों में चल रही कार्रवाई, पात्रता और पुनर्वास की वास्तविक स्थिति के संबंध में प्रशासन का आधिकारिक पक्ष अलग से महत्वपूर्ण होगा।

कटक में अब प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर

भूमि अधिकार, पुनर्वास और शहरी विकास के बीच संतुलन अब कटक में एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दे के रूप में सामने आया है।

बस्तीवासियों का संयुक्त मंच चाहता है कि विकास या भूमि प्रबंधन की किसी भी कार्रवाई के दौरान प्रभावित परिवारों के आवास, भूमि सुरक्षा और आजीविका को साथ में देखा जाए।

पांच सूत्रीय ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब प्रदर्शनकारियों की नजर प्रशासन और राज्य सरकार की आगे की कार्रवाई पर है।

नाई भारत

22 सितंबर 2026