नाई भारत | 29 सितंबर 2026 ,, भुवनेश्वर: ओडिशा की मुख्य सचिव अनु गर्ग ने मंगलवार को राज्य में सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में सेवा वितरण को अधिक प्रभावी बनाने, जमीनी स्तर पर निगरानी मजबूत करने और योजनाओं के परिणामों को मापने योग्य बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
समीक्षा बैठक में महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा स्कूल एवं जन शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। संबंधित विभागों के सचिवों ने अपने-अपने विभागों की प्रमुख योजनाओं की प्रगति, उपलब्ध आंकड़ों और आगामी कार्ययोजना की जानकारी दी। सभी जिलों के जिलाधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में भाग लेकर अपने जिलों की स्थिति और प्रगति से अवगत कराया।

मुख्य सचिव ने शासन व्यवस्था में “डेटा से कार्रवाई और कार्रवाई से परिणाम” की सोच को और मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने जिलास्तर पर नियमित समीक्षा, वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अधिक क्षेत्रीय निरीक्षण तथा किसी जिले में सफल पहल को अन्य जिलों और क्षेत्रों में लागू करने की संभावनाओं पर चर्चा की।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से मातृ स्वास्थ्य से जुड़े संकेतकों की जानकारी प्रस्तुत की गई। समीक्षा के दौरान मातृ मृत्यु दर की स्थिति में पहले की तुलना में सुधार का उल्लेख किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि गर्भवती महिलाओं की निरंतर निगरानी, नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल, जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की समय रहते पहचान और जरूरत पड़ने पर रेफरल व्यवस्था को मजबूत करने से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने में मदद मिल रही है।
बैठक में इन व्यवस्थाओं को और मजबूत करने तथा जमीनी स्तर पर उनकी नियमित निगरानी जारी रखने पर जोर दिया गया।
पोषण सेवाओं में डेटा का इस्तेमाल
महिला एवं बाल विकास विभाग ने राज्य में पोषण की स्थिति को लेकर विस्तृत डेटा आधारित प्रस्तुति दी।
आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों के विकास और पोषण की निगरानी की जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर अधिक जरूरत वाले क्षेत्रों की पहचान कर लक्षित हस्तक्षेप करने पर जोर दिया गया।
बैठक में पोषण ट्रैकर के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों से लेकर राज्य स्तर तक पोषण सेवाओं की गुणवत्ता की निगरानी, कमजोर क्षेत्रों की पहचान और आवश्यक कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाना है।
समीक्षा के दौरान गंभीर और मध्यम कुपोषण की श्रेणी में आने वाले बच्चों की संख्या में उल्लेखनीय कमी का भी उल्लेख किया गया।
बुनियादी शिक्षा और सीखने की क्षमता पर समीक्षा
स्कूल एवं जन शिक्षा विभाग ने मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN) के क्षेत्र में हुई प्रगति की जानकारी दी।
विभिन्न जिलों में साक्षरता के स्तर में सुधार और संख्यात्मक ज्ञान के क्षेत्र में दर्ज प्रगति को बैठक में सामने रखा गया। शिक्षकों द्वारा उपयुक्त शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM) के इस्तेमाल तथा प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता मजबूत करने के प्रयासों की भी समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों से नियमित समीक्षा और क्षेत्रीय निरीक्षण जारी रखने को कहा, ताकि सफल उपायों को व्यापक स्तर पर लागू किया जा सके और जहां कमियां हैं, वहां समय पर सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।
जमीनी निगरानी मजबूत करने पर जोर
बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा को अलग-अलग कार्यक्रमों के बजाय आपस में जुड़े सामाजिक विकास के क्षेत्रों के रूप में देखने पर भी जोर दिया गया।
जिलाधिकारियों, वरिष्ठ जिला अधिकारियों और उप-जिलाधिकारियों को क्षेत्रीय दौरों के दौरान आंगनवाड़ी केंद्रों, स्कूलों और स्वास्थ्य संस्थानों का निरीक्षण करने तथा वहां उपलब्ध सेवाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव अनु गर्ग ने कहा कि सामाजिक क्षेत्र में योजनाओं की सफलता का अंतिम उद्देश्य नागरिकों के जीवन स्तर में ठोस और स्थायी सुधार लाना होना चाहिए। इसके लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय, नियमित निगरानी, जवाबदेही और सफल पहलों को व्यापक स्तर पर लागू करने की आवश्यकता है।
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों और प्रगति के आधार पर संबंधित विभागों और जिलों को लक्षित कार्रवाई, नियमित समीक्षा और बेहतर अंतर-विभागीय समन्वय को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
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