2020 के लोकसभा रिकॉर्ड में उठी थी एम्स सैटेलाइट सेंटर की मांग; 2026 में राज्य में दूसरे एम्स को लेकर केंद्र के रुख पर फिर चर्चा
भुवनेश्वर: पश्चिमी ओडिशा में प्रस्तावित संबलपुर एम्स को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। वर्षों से संसद और ओडिशा की राजनीति में उठते रहे इस मुद्दे पर अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर केंद्र सरकार के स्तर पर इस प्रस्ताव की वर्तमान स्थिति क्या है।
संबलपुर में एम्स जैसी केंद्रीय चिकित्सा संस्था की मांग कोई नई राजनीतिक घोषणा नहीं है। इसका संसदीय रिकॉर्ड भी मौजूद है। 4 फरवरी 2020 को तत्कालीन संबलपुर लोकसभा सांसद नितेश गंगा देव ने लोकसभा में संबलपुर में एम्स सैटेलाइट सेंटर स्थापित करने की मांग उठाई थी। आधिकारिक लोकसभा रिकॉर्ड में इस मांग का उल्लेख दर्ज है।
संसद में वर्षों पुरानी मांग
नितेश गंगा देव की ओर से उठाए गए मुद्दे में पश्चिमी ओडिशा के लिए उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता का उल्लेख किया गया था। इससे पहले भी 2019 में संबलपुर में एम्स की मांग से संबंधित उनका संसदीय हस्तक्षेप दर्ज है।
हालांकि, संसद में किसी सांसद द्वारा मांग उठाया जाना अपने आप में केंद्र सरकार की मंजूरी नहीं माना जा सकता। 2020 का रिकॉर्ड मांग को प्रमाणित करता है, एम्स की स्वीकृति को नहीं।
2024 में राज्य सरकार ने फिर उठाया मुद्दा
ओडिशा में भाजपा सरकार बनने के बाद संबलपुर एम्स की मांग को फिर प्रमुखता मिली।
2024 में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा से मुलाकात के दौरान ओडिशा में स्वास्थ्य क्षेत्र के विस्तार तथा संबलपुर में दूसरे एम्स के प्रस्ताव पर चर्चा की थी।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से भी संबलपुर को राज्य के दूसरे एम्स के संभावित स्थान के रूप में प्रस्तुत किया था।
इससे संबलपुर एम्स का मुद्दा पश्चिमी ओडिशा के विकास और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी बड़ी बहस का हिस्सा बन गया।
2026 में केंद्र के रुख से नया सवाल

इस पूरे मामले में जुलाई 2026 का घटनाक्रम महत्वपूर्ण है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने राज्यसभा में बीजद सांसद मानस रंजन मंगराज के सवाल के जवाब में कहा कि संबलपुर या ओडिशा के किसी अन्य हिस्से में दूसरा एम्स स्थापित करने का कोई प्रस्ताव केंद्र के पास नहीं है।
यदि यह संसदीय जवाब अपने संदर्भ और आधिकारिक रिकॉर्ड में इसी रूप में दर्ज है, तो यह पहले सार्वजनिक रूप से दिए गए राजनीतिक बयानों और वर्तमान केंद्रीय स्थिति के बीच अंतर को सामने लाता है।
धमेंद्र प्रधान की भूमिका पर नजर
संबलपुर के मौजूदा लोकसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नाम भी इस बहस से जुड़ा रहा है।
संबलपुर में विकास और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर प्रधान पहले सार्वजनिक रूप से बात करते रहे हैं। 2026 में भाजपा की ओर से भी संबलपुर एम्स प्रस्ताव के संबंध में जमीन और केंद्र की प्रक्रिया को लेकर दावे किए गए थे।
हालांकि, उपलब्ध सामग्री में जुलाई 2026 के राज्यसभा जवाब या कथित जे.पी. नड्डा पत्र पर धर्मेंद्र प्रधान की कोई ताजा, स्पष्ट प्रतिक्रिया स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सकी है।
इसलिए उनकी ओर से कोई नई स्थिति मान लेना उचित नहीं होगा।
कथित नड्डा पत्र पर सावधानी जरूरी
इस बीच जे.पी. नड्डा के नाम से मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को लिखे गए एक कथित पत्र की चर्चा भी सामने आई है।
लेकिन नाई भारत ने उस पत्र की मूल प्रति को आधिकारिक स्वास्थ्य मंत्रालय या केंद्र सरकार के स्रोत से स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं किया है।
इसलिए यह कहना कि “नड्डा ने संबलपुर एम्स को खारिज कर दिया” अभी पुष्ट सरकारी तथ्य के रूप में प्रकाशित करना उचित नहीं होगा।
एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि मार्च 2026 में संबलपुर में सीजीएचएस वेलनेस सेंटर को लेकर नड्डा से संबंधित एक आधिकारिक संचार की रिपोर्ट सामने आई थी। वह मामला सीजीएचएस सुविधा से संबंधित था, एम्स की मंजूरी या अस्वीकृति से नहीं।
दोनों मामलों को एक-दूसरे से जोड़ना तथ्यात्मक भ्रम पैदा कर सकता है।
पश्चिमी ओडिशा यूथ एक्शन कमेटी की मांग

पश्चिमी ओडिशा यूथ एक्शन कमेटी की ओर से भी संबलपुर एम्स की स्थिति पर स्पष्टता की मांग का मुद्दा सामने आया है।
समिति की मांग का मूल सवाल यह है कि यदि संबलपुर एम्स का प्रस्ताव मौजूद है तो उसकी वर्तमान प्रशासनिक स्थिति क्या है, जमीन से जुड़ी प्रक्रिया कहां तक पहुंची है और केंद्र से उसे लेकर कोई औपचारिक मंजूरी मिली है या नहीं।
वहीं, यदि केंद्र के पास फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है, तो राज्य सरकार और केंद्र को यह स्पष्ट करना होगा कि पहले सार्वजनिक रूप से चर्चा में आए प्रस्ताव की वर्तमान स्थिति क्या है।
राजनीतिक दावों से अलग असली सवाल
संबलपुर एम्स को लेकर भाजपा और बीजद नेताओं के बीच पहले भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
फरवरी 2026 में भाजपा प्रवक्ता अजय आलोक ने प्रस्तावित संबलपुर एम्स और जमीन उपलब्ध कराने को लेकर बयान दिया था। इसके बाद बीजद नेता और पूर्व मंत्री रोहित पुजारी ने परियोजना की स्थिति पर सवाल उठाए थे।
इन बयानों को राजनीतिक दावों के रूप में देखा जाना चाहिए; इन्हें अपने आप में केंद्र सरकार की अंतिम प्रशासनिक मंजूरी नहीं माना जा सकता।
पश्चिमी ओडिशा के लिए मुद्दा क्यों अहम
संबलपुर पश्चिमी ओडिशा का प्रमुख शहर और क्षेत्रीय स्वास्थ्य एवं शिक्षा केंद्र है। क्षेत्र में उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की मांग लंबे समय से उठती रही है।
ओडिशा में एम्स भुवनेश्वर पहले से कार्यरत है। वहीं संबलपुर में वीआईएमएसएआर, बुर्ला जैसे प्रमुख संस्थान मौजूद हैं।
ऐसे में दूसरा एम्स स्थापित करने की मांग को पश्चिमी ओडिशा में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने से जोड़कर देखा जाता रहा है।
अब सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग

संबलपुर एम्स विवाद का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न अब यह नहीं है कि किस नेता ने क्या बयान दिया।
मुख्य सवाल है:
क्या भारत सरकार के पास वर्तमान में संबलपुर में दूसरा एम्स स्थापित करने का कोई औपचारिक प्रस्ताव है?
यदि है, तो उसकी स्थिति क्या है?
यदि नहीं है, तो पहले हुई घोषणाओं और प्रस्तावों का क्या हुआ?
इन सवालों का अंतिम जवाब केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आधिकारिक दस्तावेज या संसद में दिए गए स्पष्ट सरकारी जवाब से ही मिल सकता है।
फिलहाल उपलब्ध रिकॉर्ड यह जरूर दिखाता है कि संबलपुर में एम्स जैसी संस्था की मांग वर्षों से संसद में उठती रही है, लेकिन मांग, राजनीतिक घोषणा और केंद्र की औपचारिक मंजूरी—इन तीनों को एक ही चीज नहीं माना जा सकता।
नाई भारत | NAI BHARAT , 26 सितंबर 2026

