खनिज अधिकारों से जुड़े संशोधन और निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर बीजेडी ने तेज किया राजनीतिक अभियान
नाई भारत | 27 सितंबर 2026 , भुवनेश्वर: ओडिशा की राजनीति में सोमवार, 28 सितंबर को बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। विपक्षी बीजू जनता दल (BJD) ने भुवनेश्वर के लोअर पीएमजी में बड़े जनआंदोलन की घोषणा की है। पार्टी के अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक भी इस प्रदर्शन में शामिल होंगे। बीजेडी ने इसे केंद्र के Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Act, 2026 के खिलाफ अपने राज्यव्यापी आंदोलन की शुरुआत बताया है।
MMDR कानून बना मुख्य राजनीतिक मुद्दा
https://naibharatnews.com/ओडिशा-विधानसभा-में-पहले-द/
बीजेडी का सबसे बड़ा विरोध MMDR Amendment Act को लेकर है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि नए प्रावधानों से खनिज संसाधनों और खनिज-समृद्ध भूमि से जुड़े राज्यों के अधिकार प्रभावित होंगे तथा इससे ओडिशा के राजस्व हितों पर असर पड़ सकता है। बीजेडी ने इस कानून को वापस लेने की मांग की है।
पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष देबी प्रसाद मिश्रा, उपाध्यक्ष प्रताप जेना, विधायक अरुण कुमार साहू, पूर्व मंत्री सुदाम मरांडी और वरिष्ठ महासचिव प्रीतिरंजन घड़ेई ने हाल में पार्टी की रणनीति स्पष्ट की थी। बीजेडी ने कहा है कि वह इस मुद्दे को विधानसभा से लेकर सड़क तक उठाएगी।
बीजेडी नेताओं ने दावा किया है कि ओडिशा देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में है और कानून में बदलाव का राज्य की वित्तीय स्थिति पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, ये आंकड़े और कानून के प्रभाव को लेकर पार्टी की व्याख्या राजनीतिक दावे हैं; इन्हें सरकार और कानून के आधिकारिक प्रावधानों के संदर्भ में देखा जाना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट के 2024 फैसले का भी हवाला
https://naibharatnews.com/mmdr-संशोधन-पर-ओडिशा-में-सियास/
MMDR विवाद में बीजेडी ने 25 जुलाई 2024 के सुप्रीम कोर्ट के नौ-न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ के फैसले को भी अपने तर्क का आधार बनाया है। पार्टी नेताओं के अनुसार, उस फैसले में राज्यों के खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर कर लगाने की शक्ति से संबंधित महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई थी।
पूर्व मंत्री प्रताप जेना ने दावा किया है कि उस फैसले के बाद ओडिशा के लिए पुराने बकाये और भविष्य के खनन राजस्व के रूप में बड़ी राशि की संभावना बनी थी। बीजेडी का आरोप है कि नए MMDR संशोधन से उस अवसर पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
विधानसभा में पहले ही हो चुका है टकराव
MMDR मुद्दा केवल सड़क तक सीमित नहीं रहा है। ओडिशा विधानसभा के मौजूदा सत्र में भी इस कानून को लेकर लगातार हंगामा हुआ है। BJD और कांग्रेस के विधायकों ने सदन में विरोध प्रदर्शन किया और कानून में संशोधन वापस लेने की मांग उठाई।
24 सितंबर को विधानसभा में विरोध के दौरान विपक्षी सदस्य वेल में पहुंचे और नारेबाजी की। इसके चलते सदन की कार्यवाही बाधित हुई और बाद में दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।
इसके बाद नवीन पटनायक ने ओडिशा से जुड़े भाजपा सांसदों की संसद में कानून को लेकर भूमिका पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार से इसके क्रियान्वयन को रोकने और पूरे विषय की समीक्षा कराने की मांग की।
चुनाव आयोग और SIR भी बीजेडी के अभियान में
MMDR के साथ-साथ निर्वाचन आयोग और मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर भी नवीन पटनायक ने हाल में अपना रुख स्पष्ट किया है।
25 सितंबर को पटनायक ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और SIR प्रक्रिया पर दोबारा व्यापक समीक्षा की बात कही। उनका यह बयान निर्वाचन आयोग के भीतर SIR प्रक्रिया, मतदाता फॉर्म, नाम हटाने और आंकड़ों से जुड़े कथित मतभेदों की रिपोर्टों के बाद आया।
इस मुद्दे पर बीजेडी का रुख विपक्षी दलों की व्यापक राजनीतिक मांगों से भी जुड़ रहा है। पार्टी SIR प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और पुनर्विचार की मांग कर रही है।
भाजपा सरकार पर दोहरे मोर्चे से हमला
28 सितंबर के प्रदर्शन के जरिए बीजेडी एक साथ कई राजनीतिक मुद्दों को सामने रखने की तैयारी में है। एक तरफ पार्टी खनिज संसाधनों और राज्य के राजस्व अधिकारों को लेकर MMDR संशोधन का विरोध कर रही है, वहीं दूसरी ओर निर्वाचन प्रक्रिया और SIR को लेकर केंद्र की संस्थागत व्यवस्था पर सवाल उठा रही है।
बीजेडी का आरोप है कि ओडिशा के हितों से जुड़े मुद्दों पर राज्य की भाजपा सरकार को केंद्र के सामने अधिक स्पष्ट और मजबूत रुख अपनाना चाहिए। दूसरी ओर, भाजपा और सरकार पक्ष ने MMDR कानून को लेकर विपक्ष की आलोचना को राजनीतिक विरोध बताया है और कानून के संभावित लाभों का पक्ष रखा है। इसलिए दोनों पक्षों के दावों को उनके राजनीतिक संदर्भ में देखना महत्वपूर्ण है।
नवीन पटनायक के नेतृत्व में शक्ति प्रदर्शन
28 सितंबर का कार्यक्रम बीजेडी के लिए केवल एक विरोध सभा नहीं, बल्कि राज्यव्यापी आंदोलन के अगले चरण के रूप में पेश किया गया है। पार्टी ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है।
PMG में होने वाले इस प्रदर्शन में नवीन पटनायक की मौजूदगी आंदोलन का प्रमुख राजनीतिक केंद्र होगी। MMDR Amendment Act को वापस लेने की मांग, ओडिशा के खनिज और वित्तीय हितों का मुद्दा तथा चुनाव आयोग और SIR से जुड़े सवाल—इन सभी को लेकर बीजेडी सोमवार को सरकार के खिलाफ अपना राजनीतिक संदेश सड़क से देने की तैयारी में है।

