नुआखाई में आस्था, नई फसल और संबलपुरी पहचान का संगम: सुरेश पुजारी ने मां समलेश्वरी के किए दर्शन

राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने संबलपुर की अधिष्ठात्री देवी मां समलेश्वरी के मंदिर में पूजा-अर्चना कर लिया आशीर्वाद; नुआखाई के अवसर पर पारंपरिक नवअन्न अर्पण और सेवन में हुए शामिल

संबलपुर: ओडिशा के प्रमुख कृषि एवं लोकपर्व नुआखाई के अवसर पर संबलपुर में आस्था, कृषि परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम देखने को मिला। राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने इस पावन अवसर पर क्षेत्र की अधिष्ठात्री देवी मां समलेश्वरी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

मां समलेश्वरी के मंदिर परिसर में मंत्री ने पारंपरिक नवअन्न का सेवन भी किया। इस अवसर ने नुआखाई की उस परंपरा को सामने रखा, जिसमें नई फसल को सबसे पहले देवी-देवताओं को समर्पित कर कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।

नई फसल से जुड़ा पर्व

नुआखाई केवल नई फसल के आगमन का उत्सव नहीं है। यह किसान, मिट्टी, प्रकृति और ईश्वर के बीच सदियों से चले आ रहे संबंध का प्रतीक है। खेतों में तैयार हुई नई उपज किसानों के महीनों के परिश्रम का परिणाम होती है और इसी कारण नुआखाई में नई फसल के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव प्रमुख रहता है।

नवअन्न की परंपरा इसी भावना को धार्मिक और सामाजिक स्वरूप प्रदान करती है। नई उपज को देवी को अर्पित करने के बाद ग्रहण करना समृद्धि और आने वाले कृषि वर्ष के लिए शुभकामना का प्रतीक माना जाता है।

मां समलेश्वरी और संबलपुर की सांस्कृतिक पहचान

संबलपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान में मां समलेश्वरी का विशेष स्थान है। नुआखाई के दौरान देवी की आराधना पूरे क्षेत्र की सामूहिक आस्था से जुड़ जाती है।

मंदिर इस अवसर पर केवल पूजा का स्थान नहीं रहता, बल्कि लोगों की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान के मिलन का केंद्र बन जाता है। पीढ़ियों से चली आ रही परंपराएं नुआखाई के माध्यम से आज भी जीवंत दिखाई देती हैं।

किसानों और राज्यवासियों के लिए मंगलकामना

नुआखाई के अवसर पर सुरेश पुजारी ने ओडिशा के लोगों के सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की। उन्होंने विशेष रूप से राज्य के किसान भाइयों के जीवन में खुशहाली और समृद्धि की प्रार्थना की।

कृषि समुदाय के लिए नुआखाई का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह पर्व उनके श्रम और नई फसल से सीधे जुड़ा हुआ है। खेत से घर तक पहुंचने वाली नई उपज के प्रति सम्मान इस पर्व की मूल भावना में शामिल है।

संबलपुरी जीवन का जीवंत हिस्सा नुआखाई

नुआखाई ने लंबे समय से संबलपुरी समाज के जीवन में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक भूमिका निभाई है। इस अवसर पर परिवार एकजुट होते हैं, बुजुर्गों का सम्मान किया जाता है, पारंपरिक पकवान तैयार किए जाते हैं और लोग एक-दूसरे के साथ शुभकामनाएं साझा करते हैं।

इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है सामाजिक एकता और सामूहिकता। नई फसल का स्वागत व्यक्तिगत खुशी के बजाय पूरे समुदाय की साझा खुशी के रूप में किया जाता है।

परंपरा से आधुनिक पीढ़ी तक

नुआखाई की परंपरा यह भी बताती है कि किसी समाज की सांस्कृतिक पहचान केवल उसके इतिहास में नहीं, बल्कि उसकी रोजमर्रा की परंपराओं में जीवित रहती है। नई फसल, पारंपरिक भोजन, देवी की आराधना और परिवारों का मिलन—ये सभी मिलकर संबलपुर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं।

मां समलेश्वरी मंदिर में सुरेश पुजारी की नुआखाई उपस्थिति इसी जीवंत परंपरा की झलक देती है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि कृषि, आस्था, सामाजिक एकता और संबलपुरी संस्कृति के बीच गहरे संबंध का प्रतीक भी है।

नुआखाई के माध्यम से संबलपुर की सांस्कृतिक विरासत एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आती है। यह पर्व नई फसल के स्वागत के साथ-साथ अपनी जड़ों, परंपराओं और सामुदायिक मूल्यों से जुड़े रहने का संदेश भी देता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *