नुआखाई संदेश: सीएम मोहन चरण माझी ने ओडिशा की कृषि परंपरा और सांस्कृतिक एकता को किया नमन

फसल उत्सव नुआखाई के अवसर पर मुख्यमंत्री ने मां समलेश्वरी का आशीर्वाद लेते हुए राज्यवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की

भुवनेश्वर: ओडिशा में कृषि और लोक-संस्कृति से जुड़े प्रमुख पर्व नुआखाई के अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राज्यवासियों को हार्दिक बधाई और पारंपरिक ‘जुहार’ अर्पित किया। उन्होंने नुआखाई को ओडिशा की कृषि विरासत, आस्था और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण पर्व बताया।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में मां समलेश्वरी से राज्य के लोगों के कल्याण की प्रार्थना करते हुए सभी परिवारों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

नुआखाई केवल नई फसल के स्वागत का पर्व नहीं है, बल्कि यह ओडिशा के ग्रामीण जीवन और कृषि संस्कृति से जुड़ी गहरी परंपरा का प्रतीक है। नई उपज को देवी-देवताओं को अर्पित करने के बाद ग्रहण करने की परंपरा किसानों और प्रकृति के बीच सदियों पुराने संबंध को दर्शाती है।

यह पर्व परिवारों और समुदायों को भी एक साथ जोड़ता है। नई फसल के आगमन को लेकर लोगों में उत्साह के साथ-साथ कृतज्ञता और सामूहिकता की भावना देखने को मिलती है। विशेष रूप से पश्चिमी ओडिशा में नुआखाई का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व बेहद व्यापक है, जहां इसे पारंपरिक रीति-रिवाजों और सामुदायिक उत्सवों के साथ मनाया जाता है।

मुख्यमंत्री माझी का संदेश ऐसे समय आया है जब ओडिशा के लोग नुआखाई को नई उम्मीद और उत्साह के साथ मनाने की तैयारी कर रहे हैं। मां समलेश्वरी का स्मरण इस पर्व से जुड़े आध्यात्मिक विश्वास और पश्चिमी ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत को भी रेखांकित करता है।

नुआखाई की पहचान केवल खेतों में आई नई फसल तक सीमित नहीं है। यह ओडिशा की कृषि जड़ों, पारिवारिक संबंधों और सांस्कृतिक परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का भी संदेश देता है।

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