खंडगिरि में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ अभियान में लिया हिस्सा; गीले-सूखे कचरे के अलगाव और सार्वजनिक स्थानों की सफाई पर जोर
भुवनेश्वर | 1 अक्टूबर: भुवनेश्वर को देश के स्वच्छ शहरों की सूची में आगे ले जाने की कोशिश अब केवल नगर निकाय की सफाई व्यवस्था तक सीमित नहीं रहने वाली है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने गुरुवार को नागरिकों से घर के साथ-साथ सड़कों, कॉलोनियों और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता को भी अपनी जिम्मेदारी मानने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने खंडगिरि में भुवनेश्वर नगर निगम द्वारा आयोजित ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ स्वच्छता अभियान में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत आयोजित किया गया था। मुख्यमंत्री ने स्वयं श्रमदान करते हुए सफाई गतिविधि में भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान माझी ने कहा कि भुवनेश्वर फिलहाल राष्ट्रीय स्वच्छता रैंकिंग में नौवें स्थान पर है। उन्होंने नागरिकों से सामूहिक रूप से प्रयास करने की अपील की ताकि शहर अपनी स्थिति में सुधार कर सके। ओडिशा सरकार के दस्तावेजों में भी भुवनेश्वर के नौवें स्थान का उल्लेख किया गया है।
सफाई की शुरुआत घर से, जिम्मेदारी सड़क तक

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग सामान्यतः अपने घर, आंगन और परिसर को साफ रखते हैं, लेकिन यही सोच घर के बाहर की सड़क और पूरी कॉलोनी तक ले जाने की जरूरत है।
उन्होंने नागरिकों से सफाई कर्मचारियों के साथ सहयोग करने, घर पर ही गीले और सूखे कचरे को अलग करने, निर्धारित सफाई वाहनों को कचरा सौंपने और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने से बचने की अपील की। उन्होंने लोगों से दूसरों को भी खुले में कचरा डालने से रोकने का आग्रह किया।
इस दृष्टिकोण में नागरिक व्यवहार को शहरी स्वच्छता व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। केवल अभियान के दिन सफाई करने के बजाय रोजमर्रा के स्तर पर कचरा प्रबंधन और सार्वजनिक स्थानों के प्रति जिम्मेदारी को बनाए रखना इसका प्रमुख पहलू है।
सफाई मित्रों के योगदान को मान्यता
मुख्यमंत्री ने भुवनेश्वर की सफाई व्यवस्था में सफाई मित्रों की भूमिका की सराहना की और उनके निरंतर काम के लिए आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सफाई कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा और आवास से जुड़े विषयों पर प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।
माझी ने महात्मा गांधी के स्वच्छता संबंधी विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि 2014 के बाद स्वच्छता ही सेवा जैसे अभियानों के माध्यम से स्वच्छता को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया गया है।
PRAGATI-50 से मिली नई जिम्मेदारी
यह अभियान ऐसे समय हुआ है जब भुवनेश्वर और पुरी को केंद्र की PRAGATI-50 पहल के तहत देश के 50 मॉडल सैनिटेशन शहरों में शामिल किया गया है।
स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत इस पहल में ठोस कचरा प्रबंधन, इस्तेमाल किए गए पानी का प्रबंधन, स्वच्छता व्यवस्था और नागरिक भागीदारी जैसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाना है। चयनित शहरों को ऐसी व्यवस्थाओं के उदाहरण के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है जिन्हें दूसरे शहरी क्षेत्रों में भी अपनाया जा सके।
भुवनेश्वर के लिए इसका मतलब केवल स्वच्छता रैंकिंग में सुधार की कोशिश नहीं, बल्कि कचरा प्रबंधन, सार्वजनिक स्थानों और नागरिक भागीदारी की व्यवस्था को लगातार मजबूत करना भी है।
अधिकारी और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद
कार्यक्रम में आवास एवं शहरी विकास मंत्री कृष्ण चंद्र महापात्र, एकाम्र विधायक बाबू सिंह, BMC मेयर सुलोचना दास, पूर्व विधायक प्रियदर्शी मिश्रा, समाजसेवी जगन्नाथ प्रधान, BMC आयुक्त चंचल राणा, पार्षद, नगर निगम कर्मचारी और सफाई मित्र सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
खंडगिरि से दिए गए संदेश का मुख्य केंद्र यह रहा कि किसी शहर की स्वच्छता केवल नगर निकाय की मशीनरी से तय नहीं होती। घर से कचरे का सही पृथक्करण, निर्धारित व्यवस्था के जरिए उसका निपटान और सार्वजनिक स्थानों पर जिम्मेदार व्यवहार भी स्वच्छ शहर की बुनियादी जरूरतें हैं।
भुवनेश्वर के सामने अब चुनौती अभियान को एक दिन तक सीमित रखने के बजाय इसे नागरिकों की नियमित आदत और शहर की दैनिक व्यवस्था का हिस्सा बनाने की है।
नाई भारत | भुवनेश्वर
1 अक्टूबर 2026

