राजनाथ सिंह और CM मोहन चरण माझी की मौजूदगी में 2,000वें एयरो-इंजन का मील का पत्थर; ₹218 करोड़ की नई उत्पादन क्षमता
कोरापुट: ओडिशा के कोरापुट जिले के सुनाबेड़ा स्थित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) परिसर में मंगलवार को भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता से जुड़ा महत्वपूर्ण पड़ाव सामने आया। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की मौजूदगी में HAL कोरापुट ने अपना 2,000वां एयरो-इंजन भारतीय रक्षा क्षेत्र को सौंपा और दूसरी ‘शक्ति’ इंजन उत्पादन लाइन का उद्घाटन किया।
नई उत्पादन लाइन पर करीब ₹218 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। इसके पूरी तरह स्थापित होने के बाद सालाना 100 तक शक्ति इंजन तैयार करने की क्षमता विकसित होगी। इन इंजनों का उपयोग देश में विकसित ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) जैसे प्लेटफॉर्मों की जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा। परियोजना के 2028-29 तक पूरी तरह स्थापित होने की योजना है।
2,000 इंजन की उपलब्धि
HAL कोरापुट का सफर करीब छह दशक पुराना है। 1964 में स्थापित यह केंद्र भारतीय वायुसेना और रक्षा क्षेत्र की इंजन संबंधी जरूरतों को पूरा करने में लंबे समय से योगदान देता रहा है। 2,000वें एयरो-इंजन की डिलीवरी इस तकनीकी और औद्योगिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अवसर पर कहा कि भारत को एयरो-इंजन तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए डिजाइन, विकास, परीक्षण, उत्पादन और रखरखाव—पूरी श्रृंखला में घरेलू क्षमता विकसित करनी होगी। उनके अनुसार उन्नत प्रणोदन तकनीक में दक्षता भारत की एयरोस्पेस और रक्षा संप्रभुता के लिए महत्वपूर्ण है।
Su-30MKI इंजन उत्पादन भी बढ़ेगा

HAL द्वारा AL-31FP इंजन की वार्षिक उत्पादन क्षमता को 30 से बढ़ाकर 50 इंजन प्रति वर्ष करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसके लिए ₹335 करोड़ के निवेश की जानकारी रक्षा मंत्रालय ने दी है। ये इंजन भारतीय वायुसेना के Su-30MKI लड़ाकू विमान से जुड़े हैं।
राजनाथ सिंह ने स्वदेशी एयरो-इंजन क्षमता को भारत की दीर्घकालिक रक्षा आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए भविष्य के उन्नत विमान कार्यक्रमों, विशेषकर AMCA, के लिए घरेलू प्रणोदन क्षमता विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
ओडिशा के लिए रणनीतिक महत्व
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने HAL कोरापुट के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों के योगदान की सराहना की। उन्होंने रक्षा उत्पादन और तकनीकी क्षमता में ओडिशा की भूमिका को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
HAL कोरापुट की नई उत्पादन क्षमता से केवल इंजन निर्माण ही नहीं, बल्कि इससे जुड़े इंजीनियरिंग, तकनीकी सेवाओं, रखरखाव और सहायक औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

केंद्र सरकार का व्यापक लक्ष्य भारत को रक्षा उपकरणों के प्रमुख खरीदार से आगे बढ़ाकर डिजाइनर, डेवलपर और निर्माता के रूप में स्थापित करना है। इस दिशा में स्वदेशी एयरो-इंजन तकनीक को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुनाबेड़ा में 2,000वें इंजन की उपलब्धि और दूसरी ‘शक्ति’ उत्पादन लाइन की शुरुआत इसलिए केवल HAL की उपलब्धि नहीं, बल्कि ओडिशा की औद्योगिक क्षमता और भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता के अगले चरण का महत्वपूर्ण संकेत भी है।
नाई भारत | ओडिशा
6 अक्टूबर 2026

