MMDR विवाद के बीच ओडिशा विधानसभा का मानसून सत्र खत्म, पांच दिन में ही सिमटा सदन का कामकाज

विपक्ष के लगातार विरोध से कार्यवाही बाधित; बाढ़ की स्थिति को देखते हुए 3 अक्टूबर से पहले ही सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

ओडिशा विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार को निर्धारित समय से पहले समाप्त हो गया। राज्य में लगातार बारिश और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। सत्र 22 सितंबर को शुरू हुआ था और इसे 3 अक्टूबर तक चलना था, लेकिन प्रभावी रूप से सदन केवल पांच कार्यदिवस ही चल सका।https://naibharatnews.com/%e0%a4%93%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%a4%e0%a5%8d/

सत्र के दौरान विधायी कामकाज से अधिक चर्चा सदन के भीतर हुए राजनीतिक टकराव को लेकर रही। खास तौर पर खनिज एवं खनिज विकास एवं विनियमन (MMDR) संशोधन अधिनियम, 2026 को लेकर बीजू जनता दल और कांग्रेस के सदस्यों ने लगातार विरोध किया। कई मौकों पर विपक्षी सदस्य वेल में पहुंचे और नारेबाजी के कारण कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

पहले दिन से ही टकराव की स्थिति

22 सितंबर को सत्र की शुरुआत दिवंगत पूर्व जनप्रतिनिधियों और अन्य लोगों को श्रद्धांजलि के साथ हुई। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शोक प्रस्ताव पेश किया। इसके बाद सदन में MMDR संशोधन और स्कूली पाठ्यपुस्तकों में कथित त्रुटियों को लेकर विपक्ष का विरोध तेज हो गया।

कांग्रेस के विधायक MMDR संशोधन को वापस लेने की मांग को लेकर वेल में पहुंचे, जबकि बीजद सदस्यों ने पाठ्यपुस्तकों से जुड़े आरोपों को उठाया। हंगामा बढ़ने पर अध्यक्ष ने पहले सदन की कार्यवाही दोपहर 1.10 बजे तक और बाद में शाम 4 बजे तक स्थगित कर दी।

इस तरह सत्र के पहले ही दिन नियमित विधायी कामकाज प्रभावित हुआ।

दूसरे दिन भी प्रश्नकाल के दौरान हंगामा

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23 सितंबर को स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। प्रश्नकाल शुरू होते ही बीजद और कांग्रेस के सदस्य वेल में पहुंच गए और MMDR संशोधन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।

बीजद विधायकों ने पाठ्यपुस्तकों में कथित गलतियों का मुद्दा भी उठाया। उपाध्यक्ष भबानी शंकर भोई ने सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और सदन को चलने देने की अपील की, लेकिन विरोध जारी रहा। इसके बाद सदन की कार्यवाही शाम 4 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

MMDR बना पूरे सत्र का सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा

सत्र के दौरान MMDR संशोधन अधिनियम लगातार विपक्ष के विरोध का मुख्य कारण बना रहा।

बीजद और कांग्रेस ने संशोधित कानून को लेकर राज्य के खनिज संसाधनों और संभावित राजस्व प्रभाव का सवाल उठाया। विपक्ष की ओर से कानून को ओडिशा के हितों के प्रतिकूल बताए जाने और इसे वापस लेने की मांग की गई। 28 सितंबर को भी विपक्षी सदस्य काले स्कार्फ और प्लेकार्ड लेकर वेल में पहुंचे और नारेबाजी की।

वहीं सरकार की ओर से विपक्ष के आकलनों पर सवाल उठाया गया। MMDR संशोधन से ओडिशा को होने वाले वास्तविक वित्तीय प्रभाव का अंतिम आकलन अभी स्पष्ट नहीं बताया गया है।

यही अंतर—विपक्ष के संभावित भारी राजस्व नुकसान के दावे और सरकार की ओर से अंतिम वित्तीय आकलन पूरा नहीं होने की स्थिति—इस विवाद को राजनीतिक रूप से लगातार गर्म बनाए रहा।

चौथे दिन भी नहीं थमा विरोध

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25 सितंबर को सत्र के चौथे कार्यदिवस पर भी प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सदस्य वेल में पहुंच गए। MMDR कानून और पाठ्यपुस्तकों में कथित त्रुटियों को लेकर नारेबाजी हुई।

रिपोर्टों के अनुसार उस दिन प्रश्नकाल शुरू होने के लगभग चार मिनट बाद ही उपाध्यक्ष भबानी शंकर भोई ने सदन की कार्यवाही शाम 4 बजे तक स्थगित कर दी।

इससे यह स्पष्ट हो गया कि सत्र के दौरान विपक्ष और सरकार के बीच मुद्दों को लेकर टकराव लगातार बना हुआ था।

अंतिम दिन फिर वेल में पहुंचा विपक्ष

28 सितंबर को जब विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई, तब भी स्थिति बदली नहीं।

बीजद और कांग्रेस के सदस्य MMDR संशोधन के विरोध में वेल में पहुंच गए। कुछ सदस्य अध्यक्ष के आसन के सामने नारेबाजी करते दिखाई दिए। अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने सदस्यों से शांत रहने और अपनी सीटों पर लौटने की अपील की, लेकिन विरोध जारी रहा।

कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद सदन को 11.30 बजे तक स्थगित कर दिया गया। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर भी हंगामा जारी रहा और बाद में सदन को शाम 4 बजे तक स्थगित करना पड़ा।

बीजद का वॉकआउट, कांग्रेस का विरोध जारी

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अंतिम दिन बीजद के सदस्य सदन से बाहर निकलकर MMDR मुद्दे पर अपने राजनीतिक विरोध में शामिल हुए, जबकि कांग्रेस के विधायक सदन के भीतर विरोध करते रहे।

इस बीच सदन की निर्धारित कार्यवाही सीमित रूप से ही आगे बढ़ सकी। लगातार व्यवधान के कारण सत्र के अधिकांश दिनों में प्रश्नकाल भी सामान्य रूप से नहीं चल पाया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार पांचों कार्यदिवसों में प्रश्नकाल संचालित नहीं हो सका।

बाढ़ की स्थिति बनी सत्र समाप्त करने की वजह

राजनीतिक टकराव के बीच राज्य में बारिश और बाढ़ की स्थिति ने सरकार के सामने एक अलग प्रशासनिक चुनौती खड़ी कर दी।

सरकार का तर्क था कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास कार्यों पर ध्यान देने के लिए विधायकों का अपने-अपने क्षेत्रों में पहुंचना जरूरी है। इसी आधार पर मुख्य सचेतक सरोज कुमार प्रधान ने सत्र को समाप्त करने का प्रस्ताव रखा।

भाजपा विधायक उपासना महापात्र और लक्ष्मण बाग ने प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके बाद अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।

चार विधेयक हुए पारित

लगातार हंगामे के बावजूद विधानसभा में चार विधेयक पारित किए गए।

इनमें तीन विधेयकों के नाम स्पष्ट रूप से सामने आए हैं—

  • ओडिशा स्टेट टैक्स ऑन प्रोफेशन, ट्रेड्स, कॉलिंग्स एंड एम्प्लॉयमेंट्स बिल, 2026
  • इंडियन स्टाम्प (ओडिशा संशोधन) बिल, 2026
  • ओडिशा जन विश्वास बिल, 2026

रिपोर्टों के अनुसार सत्र में कुल चार विधेयक पारित हुए। हालांकि उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में चौथे विधेयक का नाम समान रूप से स्पष्ट नहीं है, इसलिए बिना आधिकारिक पुष्टि के उसका नाम जोड़ना उचित नहीं होगा।

पाठ्यपुस्तक विवाद भी बना रहा महत्वपूर्ण मुद्दा

MMDR के अलावा सरकारी स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों में कथित गलतियों का मुद्दा भी पूरे सत्र में विपक्ष के विरोध का हिस्सा रहा।

बीजद ने इस मामले में स्कूल एवं जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड की जवाबदेही पर सवाल उठाए और उनके इस्तीफे की मांग भी की। सरकार की ओर से सुधारात्मक कदम उठाए जाने की बात कही गई।

इस मुद्दे ने MMDR विवाद के साथ मिलकर सदन के भीतर विपक्ष और सरकार के बीच टकराव को और बढ़ाया।

पांच दिन के कामकाज ने छोड़े कई सवाल

22 सितंबर से शुरू हुआ यह सत्र मूल कार्यक्रम के अनुसार 3 अक्टूबर तक चलना था, लेकिन बाढ़ की स्थिति के कारण 28 सितंबर को ही समाप्त कर दिया गया। सदन ने निर्धारित नौ कार्यदिवसों में से केवल पांच दिन काम किया।

सत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि MMDR संशोधन पर राजनीतिक मतभेद विधानसभा के नियमित कामकाज पर लगातार प्रभाव डालते रहे।

विपक्ष ने इसे ओडिशा के खनिज संसाधनों और संभावित राजस्व से जुड़ा मुद्दा बनाया, जबकि सरकार ने विपक्ष के वित्तीय आकलन पर सवाल उठाते हुए राज्य के हितों की रक्षा का आश्वासन दिया।

अब विधानसभा का सत्र समाप्त हो चुका है, लेकिन MMDR संशोधन को लेकर राजनीतिक बहस खत्म नहीं हुई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा के बाहर भी राजनीतिक सभाओं, विरोध प्रदर्शनों और सार्वजनिक बहस का हिस्सा बना रह सकता है।

ओडिशा के लिए वास्तविक सवाल अब यह है कि संशोधित खनन व्यवस्था का राज्य के राजस्व, खनिज संसाधनों और भविष्य की वित्तीय स्थिति पर व्यावहारिक प्रभाव कितना पड़ता है। इसका अंतिम आकलन सामने आने के बाद ही इस विवाद के आर्थिक पक्ष की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।