सुभद्रा लाभार्थी महिलाओं से घरों में दीप प्रज्वलित करने की अपील; जिलों में रंगोली, प्रतियोगिताएं और सामुदायिक कार्यक्रमों की तैयारी
भुवनेश्वर: ओडिशा में सुभद्रा योजना के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर इस बार सालगिरह का कार्यक्रम सरकारी मंचों तक सीमित नहीं रहेगा। राज्यभर में लाभार्थी महिलाओं को एक तय समय पर अपने घरों में दीप जलाने के लिए आमंत्रित किया गया है।
17 सितंबर को शाम 6:30 बजे होने वाला दीप प्रज्वलन इस वर्ष के सुभद्रा दिवस का प्रमुख आकर्षण रहेगा। इसके साथ ही अलग-अलग जिलों में रंगोली, प्रतियोगिताओं और सामुदायिक कार्यक्रमों की तैयारी की गई है।
एक समय, हजारों घरों में दीप
सुभद्रा दिवस की सबसे अलग विशेषता इसका घरेलू स्वरूप है।
सरकार की अपील के अनुसार लाभार्थी महिलाएं शाम 6:30 बजे अपने घरों में दीप जलाकर इस अवसर में भाग लेंगी। इससे योजना की दूसरी वर्षगांठ को एक सामूहिक राज्यव्यापी कार्यक्रम का रूप देने की कोशिश की गई है।
गांवों से लेकर शहरों तक अलग-अलग परिवारों की भागीदारी इस आयोजन को स्थानीय स्तर तक ले जाएगी।
जिलों में रंगोली और प्रतियोगिताओं की तैयारी
दीप प्रज्वलन के अलावा जिला और स्थानीय स्तर पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जाने की तैयारी है।
इनमें रंगोली कार्यक्रम, विभिन्न प्रतियोगिताएं और सामुदायिक आयोजन शामिल हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए लाभार्थी महिलाओं और स्थानीय समुदायों को सुभद्रा दिवस से जोड़ने की योजना है।
इस तरह इस वर्ष की सालगिरह में आर्थिक सहायता के साथ सामाजिक और सामुदायिक भागीदारी को भी स्थान दिया गया है।
17 सितंबर 2024 से शुरू हुई थी योजना
ओडिशा सरकार ने 17 सितंबर 2024 को सुभद्रा योजना शुरू की थी।
आधिकारिक योजना दस्तावेज के अनुसार पात्र महिलाओं को पांच वर्षों में कुल ₹50,000 की सहायता देने का प्रावधान है। यानी प्रत्येक वर्ष ₹10,000, जिसे दो बराबर किस्तों में ₹5,000-₹5,000 के रूप में दिया जाता है। राशि DBT के माध्यम से पात्र लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है।
योजना का उद्देश्य महिलाओं को वित्तीय सहायता देने के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता, वित्तीय समावेशन और उद्यमिता को प्रोत्साहित करना है।
एक करोड़ से ज्यादा महिलाओं तक पहुंच
सुभद्रा योजना का दायरा पिछले दो वर्षों में काफी बढ़ा है।
ओडिशा के मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, 28 अगस्त 2026 को पांचवीं किस्त के दौरान राज्य की 1 करोड़ 3 लाख से अधिक महिलाओं के बैंक खातों में सहायता राशि सीधे हस्तांतरित की गई।
मार्च 2026 में चौथी किस्त के समय भी सरकार ने एक करोड़ से अधिक लाभार्थियों तक ₹5,000 की किस्त पहुंचने की जानकारी दी थी।
इस व्यापक लाभार्थी आधार के कारण सुभद्रा दिवस की दूसरी वर्षगांठ को राज्यव्यापी स्तर पर मनाया जा रहा है।
पांचवीं किस्त के बाद अब सालगिरह
सुभद्रा दिवस ऐसे समय में आ रहा है जब सरकार ने हाल ही में योजना की पांचवीं किस्त जारी की है।
28 अगस्त को नयागढ़ जिले के लाठीपड़ा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पांचवीं किस्त का शुभारंभ किया था। सरकार ने उस समय बताया कि 1.03 करोड़ से अधिक महिलाओं को सीधे भुगतान किया गया।
सरकार ने यह भी बताया कि IIM संबलपुर और SBI के एक सर्वे के अनुसार, सर्वे में शामिल 80 प्रतिशत लाभार्थी सुभद्रा सहायता को दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा और उद्यम स्थापित करने की दिशा में इस्तेमाल कर रही थीं। यह आंकड़ा सरकारी तौर पर प्रस्तुत सर्वेक्षण का निष्कर्ष है।
सुभद्रा का फोकस सिर्फ सहायता राशि तक सीमित नहीं
सरकारी दस्तावेजों में सुभद्रा को केवल नकद सहायता योजना के रूप में नहीं, बल्कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने वाले कार्यक्रम के रूप में रखा गया है।
योजना के मूल उद्देश्यों में वित्तीय स्वतंत्रता, डिजिटल वित्तीय साक्षरता, उद्यमिता, स्वास्थ्य एवं शिक्षा संबंधी परिणामों में सुधार और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करना शामिल है।
राज्य सरकार ने आगे सुभद्रा प्लस के तहत भी कई पहलों की घोषणा की है, जिनमें बचत, सुरक्षा, उद्यमिता, शिक्षा और महिला समूहों से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं।
दो साल पूरे, तीसरे साल की शुरुआत
सुभद्रा योजना का मूल ढांचा पांच वर्षों के लिए है। इसलिए दो साल पूरे होने के साथ योजना अब अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर रही है।
ओडिशा के आर्थिक सर्वेक्षण में भी सुभद्रा को महिला आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ते हुए इसके पांच वर्षीय ₹50,000 सहायता ढांचे और एक करोड़ से अधिक महिलाओं तक पहुंच का उल्लेख किया गया है।
अब योजना के अगले चरण में केवल लाभार्थियों की संख्या ही नहीं, बल्कि सहायता राशि का उपयोग, महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी और इससे पैदा होने वाले दीर्घकालिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण होंगे।
6:30 बजे दीप से बनेगा राज्यव्यापी जुड़ाव
गुरुवार की शाम सुभद्रा दिवस का स्वरूप सरकारी कार्यक्रमों से निकलकर घरों तक पहुंचने वाला है।
शाम 6:30 बजे दीप जलाने की अपील के साथ हजारों-लाखों लाभार्थी महिलाएं एक ही समय पर इस आयोजन का हिस्सा बनेंगी। जिलों में होने वाली रंगोली और प्रतियोगिताएं इसे स्थानीय स्तर पर अलग-अलग रूप देंगी।
सुभद्रा योजना के दो वर्ष पूरे होने का यह आयोजन इसलिए भी अलग है कि इसमें योजना के लाभार्थी स्वयं उत्सव का केंद्र बनाए जा रहे हैं।
अब सुभद्रा अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर रही है—और आने वाला समय यह तय करेगा कि वित्तीय सहायता से आगे बढ़कर योजना महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता को किस स्तर तक प्रभावित करती है।

