डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा—विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 में सिर्फ साफ-सफाई नहीं; लंबित मामलों, पुराने रिकॉर्ड, अनुपयोगी जगहों और ई-कचरे के निपटारे पर नया जोर
नई दिल्ली: भारत का स्वच्छता अभियान अब केवल सड़कों, कार्यालयों और शौचालयों की सफाई तक सीमित नहीं रह गया है। विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 के साथ इसका एक नया आयाम सामने आया है—सरकारी व्यवस्था के भीतर जमा फाइलों, अनुपयोगी सामग्री, खाली पड़ी जगहों और ई-कचरे को व्यवस्थित तरीके से हटाकर संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 16 सितंबर को विशेष अभियान 6.0 का वेब पोर्टल लॉन्च करते हुए कहा कि स्वच्छता अभियान ने समय के साथ व्यवहार परिवर्तन, बेहतर प्रशासन और कचरे से आर्थिक मूल्य पैदा करने की दिशा पकड़ी है।
₹5,000 करोड़ का सवाल: कचरा अब सिर्फ कचरा नहीं
विशेष स्वच्छता अभियानों के पिछले पांच वर्षों के आंकड़े इस बदलाव को एक अलग तस्वीर देते हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अभियानों और संबंधित निगरानी गतिविधियों के दौरान 24.20 लाख से अधिक स्थानों को कवर किया गया, 180.48 लाख से ज्यादा फाइलों का निस्तारण या समापन हुआ और स्क्रैप के निपटान से ₹5,102.91 करोड़ से अधिक राजस्व प्राप्त हुआ।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने 16 सितंबर को यह भी कहा कि अभियान के दौरान लगभग 1,000 लाख वर्ग फुट सरकारी कार्यालय स्थान खाली हुआ और करीब दो करोड़ फाइलों का निस्तारण किया गया।
यानी स्वच्छता का अर्थ अब केवल धूल और कचरा हटाना नहीं, बल्कि अनुपयोगी सरकारी सामग्री को संसाधन में बदलना भी है।
नई चुनौती: ई-कचरे का पहाड़
विशेष अभियान 6.0 में एक महत्वपूर्ण बदलाव ई-वेस्ट को लेकर है।
सरकार ने इस चरण में इलेक्ट्रॉनिक कचरे के संग्रह, अलग-अलग करने और पर्यावरणीय नियमों के अनुसार निपटान पर विशेष ध्यान तय किया है। इसके लिए नए डिजिटल पोर्टल में ई-वेस्ट की निगरानी के लिए अलग मॉड्यूल भी शामिल किया गया है।
यह बदलाव महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी कार्यालयों में कंप्यूटर, प्रिंटर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य तकनीकी सामान के पुराने होने के साथ ई-कचरे का प्रबंधन भी प्रशासनिक चुनौती बनता जा रहा है।
पुरानी फाइलों से खाली हो रही सरकारी जगह
विशेष अभियान का एक दूसरा पहलू रिकॉर्ड प्रबंधन है।
सरकारी कार्यालयों में वर्षों से जमा रिकॉर्ड, बंद फाइलें और अनुपयोगी सामग्री केवल भौतिक जगह ही नहीं घेरतीं, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली को भी प्रभावित कर सकती हैं।
अभियानों के दौरान फाइलों की समीक्षा और निस्तारण के साथ कार्यालयों में खाली हुई जगह को दूसरे उपयोगों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार ने इसे space management और बेहतर resource utilisation से जोड़ा है।
इसका मतलब है कि ‘स्वच्छता’ अब प्रशासनिक दक्षता के साथ भी जोड़ी जा रही है।
Special Campaign 6.0 की शुरुआत हो चुकी है
विशेष अभियान 6.0 का तैयारी चरण 16 से 30 सितंबर 2026 तक चलेगा।
इसके बाद इसका मुख्य क्रियान्वयन चरण 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित है। इस दौरान केंद्र सरकार के मंत्रालयों, विभागों, अधीनस्थ कार्यालयों, स्वायत्त संस्थानों, फील्ड कार्यालयों और विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों तक अभियान का विस्तार किया जाएगा।
तैयारी चरण में लंबित मामलों की पहचान, रिकॉर्ड की समीक्षा, अभियान स्थलों का चयन, जगह प्रबंधन और स्क्रैप निपटान जैसे काम किए जा रहे हैं।
सिर्फ सफाई नहीं, लंबित मामलों पर भी नजर
विशेष अभियान 6.0 का एक बड़ा हिस्सा pendency reduction यानी लंबित मामलों को कम करने से जुड़ा है।
सरकारी योजना में सार्वजनिक शिकायतों, सांसदों के संदर्भ, संसदीय आश्वासनों, राज्य सरकारों से जुड़े मामलों और अन्य लंबित संदर्भों की पहचान तथा समयबद्ध निस्तारण को भी शामिल किया गया है।
इससे अभियान का स्वरूप साफ-सफाई से आगे बढ़कर administrative housekeeping का हो जाता है।
‘वेस्ट टू वेल्थ’ का प्रशासनिक मॉडल
डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्वच्छता अभियान के अनुभव को “Waste to Wealth” की अवधारणा से भी जोड़ा।
पुराना सरकारी फर्नीचर, अनुपयोगी उपकरण, स्क्रैप और अन्य सामग्री अगर व्यवस्थित तरीके से निपटाई जाए तो वह राजस्व पैदा कर सकती है। सरकार द्वारा पिछले अभियानों में दर्ज स्क्रैप राजस्व इसी मॉडल का उदाहरण है।
इस दृष्टिकोण में सफाई का मतलब केवल खर्च करना नहीं, बल्कि अनुपयोगी संसाधनों की पहचान करके उनसे आर्थिक मूल्य निकालना भी है।
अब नागरिक व्यवहार की बारी
सरकारी कार्यालयों की सफाई और संसाधन प्रबंधन के साथ स्वच्छता अभियान का दूसरा बड़ा पक्ष नागरिक व्यवहार है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अभियान के वर्षों के दौरान लोगों में सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फैलाने और स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ी है। सरकार इसे behavioural change के रूप में देखती है।
लेकिन इस बदलाव की स्थिरता केवल सरकारी अभियानों से तय नहीं होगी। सड़क, बाजार, सार्वजनिक परिवहन, स्कूल और मोहल्लों में रोजमर्रा की आदतें भी इसकी दिशा तय करेंगी।
अगला लक्ष्य: स्वच्छता को व्यवस्था का हिस्सा बनाना
सरकार का घोषित उद्देश्य अब स्वच्छता को साल में एक महीने चलने वाली गतिविधि के रूप में सीमित रखना नहीं है।
विशेष अभियान 6.0 को एक ऐसी व्यवस्था के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है जिसमें साफ कार्यालय, कम लंबित मामले, बेहतर रिकॉर्ड प्रबंधन, खाली जगह का उपयोग, ई-कचरे का वैज्ञानिक निपटान और नागरिक-केंद्रित प्रशासन एक साथ जुड़े हों।
यही इस अभियान के नए चरण की सबसे बड़ी कहानी है।
भारत में स्वच्छता की अगली तस्वीर सिर्फ झाड़ू और सफाई तक सीमित नहीं है। अब सवाल यह भी है कि सरकारी व्यवस्था कितनी फाइलें हटाती है, कितनी जगह वापस उपयोग में लाती है, कितना ई-कचरा सही तरीके से निपटाती है और बेकार समझी जाने वाली सामग्री से कितना आर्थिक मूल्य पैदा करती है।

