विश्वकर्मा पूजा से जगमगाया पारादीप, उद्योग मंत्री संपद चंद्र स्वाईं ने विभिन्न पूजा पंडालों का किया दौरा

देवशिल्पी विश्वकर्मा की आराधना के साथ पोर्ट सिटी में आस्था, श्रम, उद्योग और सामुदायिक सहभागिता का सप्ताहभर का उत्सव

नाई भारत / 18 सितंबर 2026
पारादीप, ओडिशा

पारादीप — देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा की वार्षिक पूजा के साथ ओडिशा का प्रमुख बंदरगाह शहर पारादीप इन दिनों उत्सव के रंग में रंग गया है। बंदरगाह, उद्योग, इंजीनियरिंग, परिवहन, मत्स्य और श्रमिक समुदाय से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखने वाला यह पर्व अब पूरे शहर के बड़े सामुदायिक आयोजन का रूप ले चुका है।

इसी क्रम में ओडिशा के उद्योग मंत्री संपद चंद्र स्वाईं ने पारादीप के विभिन्न विश्वकर्मा पूजा पंडालों का दौरा किया। उन्होंने पूजा-अर्चना की और आयोजन समितियों, श्रमिकों, औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े लोगों तथा स्थानीय नागरिकों से मुलाकात कर उन्हें पर्व की शुभकामनाएं दीं।

मंत्री के पंडाल भ्रमण ने इस आयोजन के उस औद्योगिक पक्ष को भी सामने रखा, जिसके कारण पारादीप में विश्वकर्मा पूजा की अपनी अलग पहचान बनी हुई है।

लाइटहाउस क्षेत्र से शुरू हुआ धार्मिक उत्सव

पारादीप के लाइटहाउस क्षेत्र के आसपास धार्मिक अनुष्ठानों के साथ पूजा समारोहों की शुरुआत हुई। ढोल, ताशा, मृदंग और घंटियों की ध्वनि के बीच श्रद्धालुओं ने समुद्र देवता की आराधना की।

इसके बाद निकली रंग-बिरंगी कलश यात्रा ने शहर में उत्सव का माहौल और गहरा कर दिया। पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों, संगीत और शोभायात्रा ने विश्वकर्मा पूजा को शहरव्यापी आयोजन का स्वरूप दिया।

उद्योग और श्रम से जुड़ा पर्व

पारादीप जैसे औद्योगिक और बंदरगाह शहर में विश्वकर्मा पूजा का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। यह पर्व मशीनों, औजारों, तकनीकी कौशल, इंजीनियरिंग और श्रम संस्कृति से सीधे जुड़ा हुआ है।

बंदरगाह संचालन, मैकेनिकल सेवाओं, निर्माण, परिवहन, इंजीनियरिंग, मत्स्य और विभिन्न औद्योगिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारी इस अवसर पर अपने औजारों और मशीनरी की पूजा करते हैं।

यह परंपरा काम के प्रति सम्मान, सुरक्षित कार्यस्थल, बेहतर उत्पादन और समृद्धि की कामना से भी जुड़ी हुई है।

उद्योग मंत्री ने कई पंडालों में की पूजा

उद्योग मंत्री संपद चंद्र स्वाईं ने पारादीप के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थापित पूजा पंडालों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया और आयोजकों तथा स्थानीय लोगों से बातचीत की।

उनका दौरा ऐसे समय हुआ जब शहर के औद्योगिक एवं श्रमिक समुदाय अपने कार्यस्थलों और संस्थानों में विश्वकर्मा पूजा को लेकर विशेष आयोजन कर रहे हैं।

थीम आधारित पंडाल बने आकर्षण

पारादीप में विभिन्न पूजा समितियों, ट्रेड यूनियनों और औद्योगिक संगठनों ने इस वर्ष आकर्षक थीम आधारित पंडाल तैयार किए हैं।

ओडिशा मरीन फिश प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन और भारतीय पोर्ट मजदूर संघ सहित विभिन्न स्थानीय पूजा समितियां और श्रमिक संगठन उत्सव में भाग ले रहे हैं।

शाम होते ही शहर के कई हिस्से रोशनी और सजावटी प्रवेश द्वारों से जगमगा उठते हैं। पंडालों की सजावट स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आने वाले आगंतुकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाएं

सप्ताहभर चलने वाले उत्सव को देखते हुए विभिन्न स्थानों पर आगंतुकों के लिए विशेष सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।

आयोजन से जुड़े स्थानों पर एयर-कंडीशंड विश्राम क्षेत्र, निःशुल्क मॉकटेल और ठंडे पेयजल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसका उद्देश्य दूर-दराज से आने वाले लोगों को सुविधा देना और लंबे समय तक चलने वाले उत्सव के दौरान सार्वजनिक सुविधा बनाए रखना है।

40 से अधिक CCTV कैमरों से निगरानी

बड़े पैमाने पर संभावित भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।

मुख्य सड़कों और विभिन्न पूजा मंडपों के आसपास 40 से अधिक CCTV कैमरे लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। इनका इस्तेमाल भीड़ की निगरानी, यातायात एवं लोगों की आवाजाही पर नजर रखने और किसी भी स्थिति में त्वरित प्रबंधन के लिए किया जा रहा है।

30 लाख से अधिक लोगों के पहुंचने का अनुमान

आयोजन से जुड़े प्रतिनिधियों के अनुसार, सप्ताहभर चलने वाले विश्वकर्मा पूजा समारोह में 30 लाख से अधिक लोगों के पहुंचने का अनुमान है। ओडिशा के विभिन्न हिस्सों के अलावा पड़ोसी राज्यों से भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने की संभावना जताई गई है।

इतनी बड़ी संभावित भीड़ को देखते हुए यातायात, सुरक्षा, पेयजल, विश्राम और सार्वजनिक सुविधा जैसी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

विश्वकर्मा पूजा ने जोड़ा आस्था और कामकाजी जीवन

भगवान विश्वकर्मा को परंपरा में वास्तुकला, निर्माण, शिल्प, इंजीनियरिंग और तकनीकी ज्ञान से जोड़ा जाता है। दूसरी ओर पारादीप की पहचान ही बंदरगाह, उद्योग, लॉजिस्टिक्स और कुशल श्रम पर आधारित है।

यही कारण है कि यहां विश्वकर्मा पूजा धार्मिक आयोजन के साथ-साथ श्रमिक और औद्योगिक संस्कृति का भी उत्सव बन गई है।

इंजीनियर, मैकेनिक, मशीन ऑपरेटर, तकनीकी कर्मचारी और विभिन्न औद्योगिक प्रतिष्ठानों से जुड़े लोग इस दिन अपने कार्य उपकरणों और मशीनरी के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं।

उद्योग मंत्री के दौरे से सामने आया औद्योगिक जुड़ाव

संपद चंद्र स्वाईं का विभिन्न पंडालों में पहुंचना उत्सव के औद्योगिक पक्ष को प्रमुखता देता है। श्रमिकों, आयोजकों और स्थानीय लोगों के साथ उनकी बातचीत ने पारादीप के औद्योगिक समुदाय और राज्य की अर्थव्यवस्था के बीच संबंध को भी सामने रखा।

पारादीप में बंदरगाह गतिविधियों के साथ लॉजिस्टिक्स, इंजीनियरिंग, विनिर्माण, मत्स्य और सहायक सेवाओं से जुड़े हजारों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। विश्वकर्मा पूजा इन अलग-अलग कार्यक्षेत्रों से जुड़े समुदायों को एक साझा मंच पर लाती है।

सप्ताहभर संस्कृति और उत्सव का माहौल

अनुकूल मौसम के बीच आयोजकों और स्थानीय प्रतिनिधियों को उम्मीद है कि पूजा समारोह शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ेगा।

पंडालों की सजावट, पारंपरिक पूजा-अनुष्ठान, कलश यात्रा, रोशनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम और बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने पारादीप को एक अलग उत्सवी पहचान दी है।

लाइटहाउस क्षेत्र में शुरू हुए धार्मिक अनुष्ठानों से लेकर शहर के विभिन्न हिस्सों में सजे पंडालों तक, इस वर्ष का विश्वकर्मा पूजा उत्सव आस्था, श्रम, तकनीकी कौशल, उद्योग और सामुदायिक एकजुटता को एक साथ जोड़ता दिखाई दे रहा है।

औद्योगिक और बंदरगाह शहर के रूप में अपनी पहचान रखने वाला पारादीप इस सप्ताह एक ऐसे सार्वजनिक उत्सव का गवाह बन रहा है, जिसमें परंपरा और आधुनिक औद्योगिक जीवन एक ही मंच पर दिखाई दे रहे हैं।

न्यूज़ बाय स्पेशल रिपोर्टर: देबास्मिता परिडा
नाई भारत / 18 सितंबर 2026