SEMICON India 2026 में ASCON AEAD Security Chip का प्रदर्शन; शोध, चिप डिजाइन और तकनीकी प्रतिभा के जरिए ओडिशा की नई भूमिका सामने आई
नई दिल्ली — ओडिशा की सेमीकंडक्टर कहानी अब केवल औद्योगिक निवेश, जमीन और मैन्युफैक्चरिंग परियोजनाओं तक सीमित नहीं रह गई है। NIT राउरकेला में विकसित स्वदेशी सुरक्षा चिप ने SEMICON India 2026 में राज्य की अकादमिक शोध क्षमता और देश के बढ़ते चिप-डिजाइन इकोसिस्टम में ओडिशा की भूमिका को राष्ट्रीय मंच पर सामने रखा है।
नई दिल्ली के यशोभूमि में 17 से 19 सितंबर तक आयोजित SEMICON India 2026 में NIT राउरकेला की ओर से विकसित ASCON AEAD Security Chip (C2S0091) को प्रदर्शित किया गया।
यह चिप देश के 20 संस्थानों के सेमीकंडक्टर योगदान को दर्शाने वाले एक विशेष प्रतीकात्मक मॉडल का हिस्सा रही, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति में देश की नई पीढ़ी के चिप डिजाइनरों का प्रतिनिधित्व करने वाले छात्र और शोधार्थी शामिल रहे।
NIT राउरकेला के शोधार्थी ने किया डिजाइन
ASCON AEAD Security Chip को NIT राउरकेला के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के PhD शोधार्थी प्रदीप कुमार महांती ने डिजाइन किया। इस परियोजना में उन्हें प्रोफेसर अयास कांत स्वाईं और प्रोफेसर कमलकांत महापात्र का मार्गदर्शन मिला।
यह चिप इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और संसाधन-सीमित एम्बेडेड सिस्टम के लिए सुरक्षित डेटा एन्क्रिप्शन और ऑथेंटिकेशन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित की गई है।
इसका महत्व इस तथ्य में भी है कि सेमीकंडक्टर क्षमता केवल चिप बनाने वाली फैक्ट्री लगाने से निर्धारित नहीं होती। चिप आर्किटेक्चर, डिजाइन, सुरक्षा तकनीक और स्वदेशी बौद्धिक संपदा भी इस इकोसिस्टम के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
MeitY के Chip-to-Startup Programme से जुड़ा विकास
यह चिप इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के Chip-to-Startup (C2S) Programme के तहत विकसित की गई।
NIT राउरकेला की C2S परियोजना का नेतृत्व प्रोफेसर कमलकांत महापात्र और प्रोफेसर अयास कांत स्वाईं ने किया।
डिजाइन तैयार होने के बाद चिप को Semiconductor Complex Limited (SCL), मोहाली में fabricated किया गया। इस तरह परियोजना ने अकादमिक शोध से आगे बढ़कर वास्तविक सिलिकॉन निर्माण तक का चरण पूरा किया।
राउरकेला से शुरू हुआ लंबा सेमीकंडक्टर सफर
SEMICON India 2026 में यह प्रदर्शन किसी एक परियोजना की अचानक उपलब्धि नहीं है। NIT राउरकेला लंबे समय से सेमीकंडक्टर शिक्षा, चिप डिजाइन और तकनीकी मानव संसाधन विकास से जुड़ा रहा है।
संस्थान की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, NIT राउरकेला वर्ष 1999 से सेमीकंडक्टर शिक्षा, चिप डिजाइन और मैनपावर डेवलपमेंट से संबंधित गतिविधियों में योगदान दे रहा है।
इस लंबे अकादमिक प्रयास ने छात्रों और शोधकर्ताओं को चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन और सिस्टम-स्तरीय अनुप्रयोगों से जुड़ने का अवसर दिया है।
ओडिशा की औद्योगिक रणनीति को मिला शोध का दूसरा स्तंभ
NIT राउरकेला की उपलब्धि ऐसे समय सामने आई है जब ओडिशा स्वयं सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में अपना औद्योगिक आधार तैयार करने की कोशिश कर रहा है।
राज्य में Silicon Carbide, advanced packaging, power electronics और electronics manufacturing से जुड़ी परियोजनाओं पर काम हो रहा है। इसके साथ नए औद्योगिक क्षेत्रों और निवेश के लिए बुनियादी ढांचे को विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
इससे ओडिशा की सेमीकंडक्टर रणनीति के दो अलग लेकिन जुड़े हुए पक्ष सामने आते हैं—
एक तरफ मैन्युफैक्चरिंग और औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर, दूसरी तरफ रिसर्च, चिप डिजाइन और स्वदेशी तकनीकी क्षमता।
छोटी चिप, बड़ा औद्योगिक संदेश
सेमीकंडक्टर आधुनिक अर्थव्यवस्था के लगभग हर महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्र की आधारभूत जरूरत बन चुके हैं। दूरसंचार, ऑटोमोबाइल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऊर्जा, औद्योगिक ऑटोमेशन, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स और कनेक्टेड डिवाइस—सभी में चिप तकनीक की भूमिका बढ़ रही है।
ऐसे वातावरण में स्वदेशी चिप डिजाइन और बौद्धिक संपदा किसी भी देश की तकनीकी क्षमता के महत्वपूर्ण संकेतक हैं।
भारत की Semicon 2.0 रणनीति भी डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग, अनुसंधान और प्रतिभा विकास सहित सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के विभिन्न हिस्सों को मजबूत करने पर केंद्रित है।
वैश्विक सेमीकंडक्टर दौड़ में भारतीय प्रतिभा
SEMICON India 2026 में भारत के साथ दुनिया के कई देशों की कंपनियां, शोध संस्थान, नीति निर्माता और तकनीकी विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं।
सेमीकंडक्टर उद्योग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती मांग, सप्लाई चेन में विविधता और तकनीकी आत्मनिर्भरता की जरूरत के बीच भारत अपने लिए एक व्यापक भूमिका तलाश रहा है।
इसी संदर्भ में NIT राउरकेला जैसी संस्थाओं का योगदान केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं रह जाता। ऐसे संस्थान चिप आर्किटेक्चर, साइबर सुरक्षा, डिजाइन इंजीनियरिंग और प्रशिक्षित तकनीकी मानव संसाधन उपलब्ध कराने में भूमिका निभा सकते हैं।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सराहा योगदान
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने SEMICON India 2026 में NIT राउरकेला की भागीदारी और संस्थान के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं तथा छात्रों के योगदान की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने स्वदेशी चिप डिजाइन को ओडिशा की प्रतिभा, नवाचार और शोध क्षमता से जोड़ते हुए संस्थान के योगदान पर गर्व व्यक्त किया।
SEMICON India के दौरान ओडिशा सरकार यूरोप, जापान और दक्षिण कोरिया की निवेश टीमों के साथ भी बातचीत कर रही है। राज्य का लक्ष्य उन्नत उद्योगों में नए निवेश और तकनीकी साझेदारियां आकर्षित करना है।
रिसर्च से उद्योग तक का रास्ता
NIT राउरकेला की ASCON AEAD Security Chip एक संभावित तकनीकी श्रृंखला को सामने लाती है—
शैक्षणिक शोध → स्वदेशी चिप डिजाइन → फैब्रिकेशन → कुशल मानव संसाधन → औद्योगिक अनुप्रयोग।
भारत के लिए सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने की चुनौती इसी श्रृंखला को मजबूत करने की है। केवल आयातित तकनीक के उपयोग या असेंबली से आगे बढ़कर घरेलू डिजाइन, IP और तकनीकी उत्पाद तैयार करना इस दिशा में महत्वपूर्ण होगा।
ओडिशा के लिए इसका अर्थ और व्यापक है। राज्य के प्रस्तावित औद्योगिक पार्क और सेमीकंडक्टर परियोजनाएं जहां भौतिक बुनियादी ढांचा तैयार कर सकती हैं, वहीं NIT राउरकेला जैसे संस्थान शोध, इंजीनियरिंग प्रतिभा और स्वदेशी तकनीक की क्षमता को मजबूत कर सकते हैं।
SEMICON India 2026 में NIT राउरकेला की चिप ने इसी व्यापक तस्वीर को सामने रखा है—ओडिशा सेमीकंडक्टर क्षेत्र में केवल जमीन और कारखानों के जरिए नहीं, बल्कि अपने शोध संस्थानों, इंजीनियरों और स्वदेशी तकनीकी क्षमता के जरिए भी अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है।
न्यूज़ एडिटर: सनातन दलबेहरा
नाई भारत / 18 सितंबर 2026

