मतदाता सूची के मुद्दे पर ओडिशा कांग्रेस का प्रदर्शन, CEO कार्यालय के बाहर उठाई आवाज

SIR के बाद मतदाता सूची में बड़े बदलाव को लेकर कांग्रेस ने मांगी पारदर्शिता; पार्टी नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया पर उठाए सवाल

भुवनेश्वर: ओडिशा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में ओडिशा प्रदेश कांग्रेस ने शुक्रवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन कर मतदाता सूची और उसके पुनरीक्षण की प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे उठाए।कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान मतदाता सूची में नामों के बदलाव, सत्यापन प्रक्रिया तथा पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने से जुड़े सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि चुनावी सूची में किसी भी बदलाव की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और वास्तविक मतदाताओं को अपने नाम की स्थिति स्पष्ट रूप से जानने का अवसर मिलना चाहिए।यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है जब ओडिशा में SIR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जा चुकी है। CEO कार्यालय के अनुसार अंतिम सूची में 3,16,32,754 मतदाता दर्ज हैं। SIR से पहले राज्य में 3,33,99,591 मतदाता दर्ज थे।CEO कार्यालय के अनुसार पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में प्रविष्टियों का सत्यापन किया गया। अधिकारियों ने मृत मतदाताओं, स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं, अनुपस्थित मतदाताओं और डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाने की प्रक्रिया का उल्लेख किया है। अधिकारियों के अनुसार हटाए गए नामों पर सत्यापन किया गया था।दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने प्रक्रिया से जुड़े आंकड़ों और नामों के हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। BJD ने भी SIR प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के मैपिंग से बाहर रहने का आरोप लगाया है। यह आरोप राजनीतिक दलों के हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्तर पर आवश्यक है।ओडिशा कांग्रेस पहले से ही कई मुद्दों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास के नेतृत्व में पार्टी ने हाल के दिनों में खनिज संसाधनों और MMDR Amendment Act, 2026 सहित विभिन्न मुद्दों पर विरोध कार्यक्रम तेज किए हैं।मतदाता सूची को लेकर शुक्रवार का प्रदर्शन कांग्रेस के लिए चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को राज्य स्तर पर प्रमुखता से उठाने का एक और मंच बना। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि निर्वाचन प्रशासन कांग्रेस द्वारा उठाए गए मुद्दों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और मतदाता अपने नाम तथा विवरण को लेकर किस प्रकार आपत्तियां या सुधार अनुरोध दर्ज कराते हैं।