नई दिल्ली में NGT का दो दिवसीय सम्मेलन शुरू; 17 देशों के न्यायिक प्रतिनिधि, विशेषज्ञ और नीति-निर्माता पर्यावरणीय शासन, जलवायु न्याय और सतत विकास पर कर रहे मंथन
नई दिल्ली — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में “The Future of Environment and Climate Dynamics” विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन 19 और 20 सितंबर को हो रहा है।
सम्मेलन में भारत के न्यायिक और प्रशासनिक तंत्र के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ 17 देशों के न्यायिक प्रतिनिधि, पर्यावरण विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, शिक्षाविद और नीति-निर्माता हिस्सा ले रहे हैं। इसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण, पर्यावरणीय कानून और सतत विकास से जुड़े वैश्विक मुद्दों पर अनुभव और विचार साझा करना है।
पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन पर जोर
उद्घाटन संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की प्रकृति-केंद्रित सभ्यतागत परंपरा का उल्लेख करते हुए इसे आधुनिक पर्यावरणीय और जलवायु समाधान से जोड़ने की बात कही।
उन्होंने विकास और पर्यावरणीय स्थिरता को एक-दूसरे का विरोधी मानने के बजाय दोनों को साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने अक्षय ऊर्जा के विस्तार और भारत द्वारा पेरिस समझौते के तहत किए गए लक्ष्यों की समय से पहले उपलब्धि का भी उल्लेख किया। ये आंकड़े और आकलन सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए हैं।
जलवायु न्याय और विकसित-विकासशील देशों की बहस
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कार्बन उत्सर्जन की जिम्मेदारी को लेकर वैश्विक बहस का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि विकासशील देशों पर उत्सर्जन की जिम्मेदारी कई बार अनुपात से अधिक डाली जाती है और भारत के प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन को वैश्विक औसत के संदर्भ में रखा।
यह मुद्दा वैश्विक जलवायु वार्ताओं में जलवायु न्याय और समानता से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही बहस का हिस्सा है।
चार तकनीकी सत्रों में प्रमुख मुद्दों पर चर्चा
NGT के अनुसार सम्मेलन में चार तकनीकी सत्र रखे गए हैं।
इनमें Climate Justice, Equity and Inclusion, पर्यावरण कानून एवं शासन व्यवस्था, वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियां एवं सहयोग तथा भविष्य के लिए वन संरक्षण और पुनर्स्थापन जैसे विषय शामिल हैं।
इन सत्रों का उद्देश्य पर्यावरणीय नीतियों के निर्माण के साथ-साथ उनके क्रियान्वयन, निगरानी और प्रवर्तन से जुड़े व्यावहारिक सवालों पर चर्चा करना है।
CJI सूर्यकांत ने पर्यावरणीय न्याय व्यवस्था पर बात की
उद्घाटन कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने भारतीय पर्यावरणीय न्यायशास्त्र के विकास का उल्लेख किया।
PIB के अनुसार उन्होंने Precautionary Principle, Polluter Pays Principle, Absolute Liability और Public Trust Doctrine जैसे सिद्धांतों का उल्लेख किया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समानता, आजीविका और स्वास्थ्य जैसे संवैधानिक अधिकारों से जोड़ते हुए न्यायिक, वैज्ञानिक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
भूपेंद्र यादव ने भारत की पर्यावरणीय उपलब्धियों को रेखांकित किया
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने भारत की अक्षय ऊर्जा क्षमता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों का उल्लेख किया।
PIB के अनुसार उन्होंने बताया कि भारत की स्थापित बिजली क्षमता में गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 54.18 प्रतिशत तक पहुंच गई है। सरकार के अनुसार यह 2030 के 50 प्रतिशत लक्ष्य से अधिक है। मंत्री ने वन एवं वृक्ष आवरण, वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापन से जुड़े प्रयासों का भी उल्लेख किया।
NGT का मोबाइल एप भी लॉन्च
प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के दौरान National Green Tribunal Mobile Application भी लॉन्च किया।
यह कदम पर्यावरणीय मामलों से जुड़े न्यायिक तंत्र में डिजिटल पहुंच और सूचना उपलब्धता को बढ़ाने की दिशा में एक पहल के रूप में सामने आया है।
UNEP और ADB सहित अंतरराष्ट्रीय भागीदारी
सम्मेलन में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ United Nations Environment Programme (UNEP) और Asian Development Bank (ADB) जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भागीदारी भी है।
NGT के अनुसार सम्मेलन का उद्देश्य न्यायिक दृष्टिकोण, वैज्ञानिक ज्ञान और पर्यावरणीय शासन के अनुभवों का आदान-प्रदान करना तथा भविष्य में सहयोग के लिए व्यावहारिक सुझाव और रोडमैप तैयार करना है।
जलवायु चुनौती के सामने अगला कदम
सम्मेलन का व्यापक फोकस केवल पर्यावरणीय समस्याओं की पहचान तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में यह सवाल भी है कि जलवायु और पर्यावरण से जुड़े लक्ष्यों को प्रभावी कानून, संस्थागत व्यवस्था, वैज्ञानिक ज्ञान और जमीनी क्रियान्वयन के माध्यम से कैसे आगे बढ़ाया जाए।
जलवायु परिवर्तन का असर जल, कृषि, वन, शहरों, ऊर्जा और आजीविका जैसे अनेक क्षेत्रों पर पड़ता है। ऐसे में पर्यावरणीय कानून, न्यायिक व्यवस्था, वैज्ञानिक शोध और सरकारी नीतियों के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई दिल्ली में शुरू हुआ यह सम्मेलन इसी व्यापक संदर्भ में जलवायु न्याय, पर्यावरणीय शासन, सतत विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर आगे की दिशा तलाशने का मंच बन रहा है।
नाई भारत | NAI BHARAT NEWS DESK
19 सितंबर 2026

