नवीन पटनायक ने केंद्र के कानून पर उठाए सवाल; बीजद ने राज्य के हित में आंदोलन तेज करने का ऐलान किया
भुवनेश्वर: खनिज संपदा से जुड़े अधिकारों और राज्य के संभावित राजस्व पर MMDR Amendment Act, 2026 को लेकर ओडिशा की राजनीति में टकराव तेज हो गया है। बीजू जनता दल (BJD) ने इस कानून को राज्य के खनिज हितों से जोड़ते हुए केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ अपना राजनीतिक अभियान तेज करने का फैसला किया है।बीजद अध्यक्ष और विधानसभा में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से विधानसभा में सर्वसम्मत प्रस्ताव लाने और संशोधन को वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि कानून से ओडिशा के खनिज संसाधनों पर राज्य के वित्तीय अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।नवीन पटनायक ने ओडिशा के भाजपा सांसदों को भी इस मुद्दे पर निशाने पर लिया है। उनका आरोप है कि लोकसभा में कानून पारित होने के दौरान राज्य के 20 भाजपा सांसदों ने विधेयक का समर्थन किया, जबकि इससे ओडिशा के हित प्रभावित होने की आशंका है। यह आरोप बीजद का राजनीतिक पक्ष है।बीजद का तर्क है कि 2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद खनिज-युक्त जमीन पर राज्यों की कर लगाने की शक्ति को लेकर ओडिशा के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय संभावनाएं बनी थीं। पार्टी का दावा है कि इस व्यवस्था से राज्य को हर वर्ष करीब ₹12,000 करोड़ तक का राजस्व मिलने की संभावना थी।हालांकि, केंद्र सरकार की स्थिति इससे अलग है। खान मंत्रालय ने कहा है कि संशोधन राज्यों से भूमि या खनिजों पर उनके अधिकार नहीं छीनता और राज्यों की खनिजों से संबंधित कर लगाने की शक्तियां समाप्त नहीं की गई हैं। मंत्रालय के अनुसार खनन से मिलने वाले लगभग 90 प्रतिशत कर और वैधानिक भुगतान पहले की तरह राज्यों को मिलते रहेंगे।इसी मतभेद ने अब MMDR कानून को केवल खनन नीति का विषय नहीं रहने दिया है। मामला ओडिशा के वित्तीय अधिकार, संघीय ढांचे और राज्य की खनिज संपदा से मिलने वाले संभावित राजस्व से जुड़ी बड़ी राजनीतिक बहस में बदल गया है।बीजद ने विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने के साथ राज्यव्यापी राजनीतिक आंदोलन की दिशा भी तय की है। पार्टी नेताओं ने विधानसभा में MMDR संशोधन को वापस लेने के लिए प्रस्ताव लाने की मांग दोहराई है।आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र के संशोधन पर राज्य सरकार की आधिकारिक स्थिति क्या रहती है और विधानसभा में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच किस प्रकार की चर्चा होती है।
NAI BHARAT, 25 SEPTEMBER 2026

