SIR विवाद पर CM Majhi का Congress पर निशाना, चुनावी सुधारों को लेकर उठाए सवाल

ओडिशा के मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में कांग्रेस की SIR, EVM और बैलेट पेपर संबंधी मांगों पर साधा निशाना

भुवनेश्वर: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर किए गए अपने पोस्ट में मतदाता सूची की शुद्धता, EVM और निर्वाचन आयोग से जुड़े विपक्ष के सवालों को एक व्यापक राजनीतिक बहस के रूप में सामने रखा।

माझी ने अपने संदेश में कांग्रेस की उस राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाया जिसमें एक ओर SIR का विरोध किया जा रहा है और दूसरी ओर EVM तथा निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग को भी इसी बहस से जोड़ते हुए चुनावी व्यवस्था में तकनीकी बदलावों और सुधारों को लेकर कांग्रेस की प्राथमिकताओं पर प्रश्न खड़े किए।

मुख्यमंत्री का मुख्य जोर एक ऐसे मतदाता रजिस्टर पर रहा जिसमें योग्य मतदाताओं का नाम सुरक्षित रहे और गलत या दोहराए गए रिकॉर्ड की पहचान हो सके।

निर्वाचन आयोग के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया का उद्देश्य पात्र नागरिकों को शामिल करना तथा मृत, स्थानांतरित और दोहराए गए मतदाताओं से संबंधित रिकॉर्ड की पहचान करना भी है। आयोग ने मतदाता सूची की शुद्धता को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए महत्वपूर्ण बताया है।

SIR को लेकर विपक्ष की आपत्ति हालांकि अलग है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका जताई है और ऐसी स्थिति में शिकायत, आपत्ति तथा सुधार की प्रभावी व्यवस्था की मांग की है।

EVM को लेकर भी विपक्ष की ओर से लंबे समय से सवाल उठाए जाते रहे हैं। हालिया राजनीतिक घटनाक्रम में विपक्षी दलों ने बैलेट पेपर से मतदान की वापसी की मांग भी उठाई है।

इस बीच SIR का मुद्दा अब केवल मतदाता सूची तक सीमित नहीं रहा। इसके साथ निर्वाचन आयोग की संस्थागत भूमिका, चुनावी प्रक्रिया में तकनीक का इस्तेमाल और मतदाताओं के अधिकार जैसे सवाल भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गए हैं।

माझी का ताजा बयान इसी व्यापक विवाद के बीच आया है। मुख्यमंत्री पहले भी SIR को लेकर कांग्रेस पर राजनीतिक उद्देश्य से गलत सूचना फैलाने का आरोप लगा चुके हैं और प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक तथा मतदाता सुरक्षा उपायों का उल्लेख कर चुके हैं।

निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाताओं के लिए SIR से संबंधित ऑनलाइन सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें पिछले SIR में नाम खोजने, आवश्यक दस्तावेज जमा करने और नए मतदाता पंजीकरण के लिए Form 6 जैसी सेवाएं शामिल हैं।

ऐसे समय में मुख्यमंत्री का राजनीतिक संदेश ओडिशा में भी SIR को लेकर चल रही बहस को नया आयाम देता है। एक तरफ सरकार और निर्वाचन व्यवस्था मतदाता सूची को अद्यतन और अधिक सटीक बनाने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं, वहीं विपक्ष प्रक्रिया में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं की सुरक्षा को प्राथमिक मुद्दा बता रहा है।

अब विवाद का केंद्र केवल यह नहीं है कि मतदाता सूची में संशोधन कैसे किया जाए, बल्कि यह भी है कि इस पूरी प्रक्रिया में जनता का विश्वास कैसे कायम रखा जाए।

नाई भारत |
6 अक्टूबर 2026