ओडिशा विधानसभा में जन विश्वास विधेयक 2026 पेश, नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर जोर

उद्योग मंत्री संपद चंद्र स्वाईं ने सदन में रखा विधेयक; लाइसेंस, मंजूरी और छोटे उल्लंघनों से जुड़े प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव

नाई भारत , 24 सितंबर 2026 , भुवनेश्वर: ओडिशा विधानसभा में गुरुवार को ओडिशा जन विश्वास विधेयक, 2026 पेश किया गया। उद्योग, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री संपद चंद्र स्वाईं ने विधेयक को सदन के समक्ष रखा।

यह प्रस्ताव राज्य में नियामकीय सुधार के अगले चरण के रूप में सामने आया है। इससे पहले 2025 में ओडिशा जन विश्वास अधिनियम के जरिए छोटे अपराधों से जुड़े कई प्रावधानों में बदलाव की दिशा में कदम उठाया गया था।

राज्य कैबिनेट की मंजूरी के बाद सामने आए विवरण के अनुसार, 2026 के प्रस्तावित विधेयक में 11 विभागों के अधीन आने वाले 16 राज्य कानूनों की 62 व्यवस्थाओं में संशोधन का प्रावधान है।

दो हिस्सों में प्रस्तावित बदलाव

विधेयक के प्रावधानों को दो अनुसूचियों में बांटा गया है।

पहली अनुसूची में 11 कानूनों से जुड़े 35 संशोधन प्रस्तावित हैं। इनका मुख्य संबंध छोटे, तकनीकी और प्रक्रियात्मक उल्लंघनों से जुड़े प्रावधानों को तर्कसंगत बनाने से है।

दूसरी अनुसूची में पांच कानूनों से संबंधित 27 संशोधन शामिल हैं, जिनका उद्देश्य नौ प्रकार की नियामकीय मंजूरियों को सरल बनाना है।

लाइसेंस और मंजूरी की प्रक्रिया में बदलाव

प्रस्तावित विधेयक में कुछ लाइसेंस और पंजीकरण की वैधता अवधि बढ़ाने, बार-बार नवीनीकरण की जरूरत कम करने तथा उपयुक्त मामलों में सूचना-आधारित पंजीकरण या एनओसी व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव है।

कुछ गतिविधियों में जहां पहले से स्थानीय निकाय का वैध ट्रेड लाइसेंस मौजूद है, वहां अलग-अलग विभागों से दोहराव वाली अनुमति की आवश्यकता को कम करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।

छोटे उल्लंघनों के लिए अनुपातिक व्यवस्था

विधेयक में छोटे और प्रक्रियात्मक उल्लंघनों के लिए मौजूदा दंड व्यवस्था को अधिक अनुपातिक बनाने की दिशा में बदलाव प्रस्तावित हैं। कुछ मामलों में आपराधिक प्रावधानों की जगह मौद्रिक दंड तथा सरल प्रशासनिक या अपीलीय प्रक्रिया का प्रावधान लाने की बात कही गई है।

राज्य सरकार के अनुसार, इन सुधारों का उद्देश्य अनुपालन का बोझ घटाना, मुकदमों और प्रक्रियात्मक देरी को कम करना तथा नागरिकों और कारोबारियों के लिए नियामकीय व्यवस्था को अधिक स्पष्ट बनाना है।

अब विधानसभा में विधेयक की आगे की प्रक्रिया के बाद इसके प्रावधानों का अंतिम स्वरूप स्पष्ट होगा।

नाई भारत | भुवनेश्वर