ओडिया वर्चुअल एकेडमी की कार्यशाला में शोध, दस्तावेजीकरण और युवा पीढ़ी से जुड़ाव पर चर्चा
भुवनेश्वर: भगवान जगन्नाथ से जुड़ी परंपरा, दर्शन, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को शोध एवं डिजिटल माध्यमों से व्यापक स्तर पर सामने लाने की दिशा में ओडिया वर्चुअल एकेडमी ने पहल तेज की है।
भुवनेश्वर में आयोजित श्रीजगन्नाथ चेतना विषयक कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों के शोधकर्ताओं, लेखकों, विद्वानों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। चर्चा का केंद्र जगन्नाथ संस्कृति के विविध पहलुओं का अध्ययन, दस्तावेजीकरण और नई पीढ़ी तक उसकी जानकारी पहुंचाना रहा।
समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए ओडिया वर्चुअल एकेडमी के सचिव तथा OKAC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार राउत ने कहा कि डिजिटल युग में युवा पीढ़ी को अपनी विरासत और संस्कृति से जोड़ने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम एकेडमी के डिजिटल प्लेटफॉर्म को शोध आधारित सामग्री से समृद्ध करने तथा जगन्नाथ चेतना से संबंधित ज्ञान को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने में मदद करेंगे।
कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में जगन्नाथ परंपरा के कई आयामों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। इनमें श्रीजगन्नाथ तत्व का विकास, नबकलेबर, देवी-देवताओं के पारंपरिक वेश, महाप्रसाद, रथ निर्माण एवं प्रतिष्ठा विधि, विभिन्न यात्राएं, श्रीमंदिर का इतिहास, कला एवं स्थापत्य, मंदिर की नीतियां और सेवक परंपरा जैसे विषय शामिल रहे।
इसके अलावा विश्वभर में जगन्नाथ परंपरा का विस्तार, ओडिया और संस्कृत साहित्य में जगन्नाथ, मठ संस्कृति, नृत्य-संगीत परंपरा, विभिन्न कलाओं और शिल्प में जगन्नाथ की अभिव्यक्ति, अलग-अलग मतवाद तथा श्रीक्षेत्र के महत्व पर भी चर्चा हुई।
कार्यशाला का संचालन संयोजक डॉ. कृष्णकेशव षडंगी और समन्वयक डॉ. भुवनानंद अधिकारी ने किया।
कार्यक्रम में हरेकृष्ण प्रतिहारी, श्रीनिवास आचार्य, असित महांती, भास्कर मिश्रा, पूर्णचंद्र मिश्रा, पीताबास राउतराय, अभय कुमार नायक, कृष्णकेशव षडंगी, बाबाजी चरण पटनायक, प्रेमानंद महापात्र, कृष्णचंद्र मिश्रा, विश्वनाथ सामंतराय, देवप्रसाद दाश, पूर्णचंद्र गोच्छिकार, नरेश चंद्र दाश, सुभाष चंद्र दाश, मृत्युंजय रथ, चिंतामणि बिस्वाल, पद्मनाभ त्रिपाठी, सनत सुजातानंद दास और मनस्विनी मिश्रा सहित विभिन्न जिलों से आए शोधकर्ता एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
वरिष्ठ तकनीकी प्रबंधक स्मृतिरंजन मिश्रा, सलाहकार सूर्य मिश्रा, सच्चिदानंद पंडा, देवानंद भंज, देवेंद्र नाथ महांती तथा एकेडमी के विशेष अधिकारी श्रीनिवास मिश्रा भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
कार्यशाला से यह संदेश सामने आया कि शोध, दस्तावेजीकरण और डिजिटल तकनीक को साथ लेकर चलने से जगन्नाथ संस्कृति से जुड़ी सामग्री को संरक्षित करने के साथ-साथ नई पीढ़ी और वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाया जा सकता है।
नाई भारत | भुवनेश्वर

