नौ दिवसीय विधानसभा सत्र से पहले SIR की नई मतदाता सूची को लेकर सियासी बहस तेज, MMDR कानून, पाठ्यपुस्तक विवाद और जनहित के अन्य मुद्दे भी रहेंगे चर्चा के केंद्र में।
भुवनेश्वर: ओडिशा विधानसभा का सातवां सत्र मंगलवार से शुरू होने जा रहा है और उससे ठीक पहले जारी हुई नई मतदाता सूची ने राज्य की राजनीति में एक और संवेदनशील मुद्दा जोड़ दिया है। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद राज्य में मतदाताओं की संख्या घटकर करीब 3.16 करोड़ रह गई है।
विपक्षी BJD पहले ही SIR के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर सवाल उठा चुका है। अब विधानसभा सत्र के दौरान मतदाता सूची, सत्यापन प्रक्रिया और पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने से जुड़े सवाल राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकते हैं।
22 सितंबर से 3 अक्टूबर तक सत्र
17वीं ओडिशा विधानसभा का सातवां सत्र 22 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलेगा। इस अवधि में नौ कार्य दिवस होंगे।
सोमवार को विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक हुई। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सभी दलों से सहयोग की अपील की और सरकार ने जनहित के मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार रहने की बात कही।
लेकिन विधानसभा शुरू होने से पहले ही कई मुद्दे राजनीतिक रूप से सक्रिय हो चुके हैं। इनमें MMDR Amendment Act, पाठ्यपुस्तकों में कथित त्रुटियां, किसानों की समस्याएं, कानून-व्यवस्था, बाढ़ प्रबंधन और महानदी जल विवाद शामिल हैं।
अब SIR की मतदाता सूची भी इस बहस में महत्वपूर्ण विषय बन गई है।
17.66 लाख की नेट कमी, लेकिन कहानी सिर्फ इतनी नहीं
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के अनुसार अंतिम सूची में 3,16,32,754 मतदाता हैं।
SIR से पहले के आंकड़े की तुलना में अंतिम सूची में लगभग 17.66 लाख मतदाताओं की नेट कमी हुई है। हालांकि इसे केवल “एक दिन में 17.66 लाख नाम काटे गए” के रूप में समझना सही नहीं होगा।
5 जुलाई को जारी ड्राफ्ट सूची में 20,12,557 मतदाताओं के नाम नहीं थे, क्योंकि उनके enumeration forms प्राप्त नहीं हुए थे। इसके बाद दावे, आपत्तियों और सत्यापन की प्रक्रिया चली। अंतिम चरण में 2,90,497 नाम जोड़े गए, जबकि 44,777 नाम सत्यापन के बाद अयोग्य पाए जाने पर हटाए गए।
यानी ड्राफ्ट और अंतिम सूची के आंकड़ों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
करीब 58 लाख मामलों में नोटिस
SIR के दौरान बड़े पैमाने पर सत्यापन हुआ।
निर्वाचन कार्यालय के अनुसार 12,98,779 unmapped electors को सत्यापन के लिए नोटिस दिया गया। इसके अलावा 45,37,613 मतदाताओं के रिकॉर्ड में logical discrepancies मिलने पर उन्हें भी नोटिस जारी किया गया।
दोनों श्रेणियों को मिलाकर 58,36,392 नोटिस जारी हुए। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया में बूथ स्तर के अधिकारियों ने सुनवाई और सत्यापन किया तथा पात्र मतदाताओं के नाम पुनः शामिल किए गए।
किन कारणों से नाम हटे?
CEO कार्यालय के अनुसार SIR के दौरान अलग-अलग कारणों से नाम हटाए गए।
बताए गए आंकड़ों में करीब:
8.8 लाख स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके मतदाता,
8.32 लाख मृत मतदाता,
1.58 लाख डुप्लीकेट प्रविष्टियां,
करीब 2 लाख अनुपस्थित मतदाता और
लगभग 14 हजार आयु संबंधी विसंगतियों वाले मामले शामिल हैं।
निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि हटाई गई प्रविष्टियों के पीछे सत्यापन किया गया था।
विदेशी नागरिकों की प्रविष्टियां भी हटाईं गईं
CEO कार्यालय के आंकड़ों में कुछ विदेशी नागरिकों से जुड़ी प्रविष्टियां भी शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार इनमें करीब 200 ऐसे तिब्बती, जिन्होंने भारतीय नागरिकता हासिल नहीं की थी, 100 से अधिक नेपाली नागरिक, 100 से अधिक अन्य विदेशी नागरिक, तीन फिलिपीनो और एक श्रीलंकाई नागरिक शामिल थे।
गजपति जिले के चंद्रगिरि में रहने वाले करीब 300 तिब्बतियों के नाम हटने की रिपोर्ट भी सामने आई है। इससे नागरिकता और मतदाता पात्रता से जुड़े सवालों को अलग स्थानीय संदर्भ मिला है।
विपक्ष का सवाल क्या है?
BJD अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने SIR के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को गंभीर मुद्दा बताया है। पार्टी ने यह सवाल उठाया है कि कहीं पात्र मतदाता भी प्रक्रिया में प्रभावित तो नहीं हुए।
यह विपक्ष का राजनीतिक आरोप/दावा है; निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि हटाई गई प्रविष्टियों को सत्यापन के आधार पर हटाया गया और पात्र मतदाताओं को दावे-आपत्तियों के दौरान शामिल करने का अवसर मिला।
यही अंतर विधानसभा में संभावित बहस का आधार बन सकता है—निर्वाचन सूची को शुद्ध करने की प्रक्रिया और पात्र नागरिकों के मतदान अधिकार की सुरक्षा, दोनों को कैसे सुनिश्चित किया गया।
MMDR से लेकर SIR तक कई मोर्चे
विधानसभा में SIR अकेला राजनीतिक मुद्दा नहीं होगा।
BJD और कांग्रेस ने MMDR Amendment Act, 2026 को प्रमुख मुद्दा बनाया है। नवीन पटनायक ने मुख्यमंत्री माझी से इस कानून को लेकर विधानसभा में सर्वसम्मत प्रस्ताव लाने की मांग की है।
इसके अलावा पाठ्यपुस्तक विवाद, किसान, कानून-व्यवस्था, बाढ़ प्रबंधन, कीमतें और महानदी जल विवाद भी विपक्ष की प्राथमिकताओं में हैं।
सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री मुकेश महालिंग ने कहा है कि लगभग छह विधेयक पेश किए जाने की संभावना है और राज्यहित से जुड़े विषयों पर चर्चा के लिए सरकार तैयार है।
अब नजर विधानसभा पर
SIR की अंतिम सूची जारी होने के बाद अब बहस केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी। विधानसभा में यह सवाल महत्वपूर्ण होगा कि सत्यापन के दौरान कितने पात्र मतदाता वापस सूची में आए, कितने मामलों में आपत्तियां स्वीकार हुईं और भविष्य में मतदाता अपने नाम से जुड़ी किसी समस्या को कैसे ठीक करा सकते हैं।
दूसरी ओर, सरकार के सामने यह बताने का अवसर होगा कि इतने बड़े स्तर पर हुए पुनरीक्षण में सत्यापन की प्रक्रिया किस तरह लागू की गई।
22 सितंबर से शुरू होने वाला विधानसभा सत्र इसलिए केवल विधेयकों का सत्र नहीं होगा। SIR की नई मतदाता सूची भी सरकार और विपक्ष के बीच बहस का एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है।
नाई भारत | NAI BHARAT NEWS DESK
21 सितंबर 2026

