नराज में 870 एकड़ का लैंड बैंक, ओडिशा के सेमीकंडक्टर मिशन को मिल सकता है नया औद्योगिक आधार

कटक के नराज को हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के संभावित केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी; कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचा और निवेश इकोसिस्टम पर जोर

भुवनेश्वर — ओडिशा ने सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में अपनी दीर्घकालिक औद्योगिक रणनीति को मजबूत करने की दिशा में कटक के नराज में लगभग 870 एकड़ के समर्पित लैंड बैंक को महत्वपूर्ण आधार के रूप में सामने रखा है। प्रस्तावित क्षेत्र का उद्देश्य केवल औद्योगिक भूमि उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत विनिर्माण से जुड़े निवेश के लिए एक व्यापक औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार करना है।

नराज का यह क्षेत्र कटक-भुवनेश्वर औद्योगिक क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाते हुए हाई-टेक कंपनियों और सेमीकंडक्टर से जुड़ी परियोजनाओं को आकर्षित करने के लिए विकसित किए जाने की दिशा में है।

जमीन से आगे की औद्योगिक रणनीति

सेमीकंडक्टर उद्योग की जरूरतें सामान्य मैन्युफैक्चरिंग से अलग होती हैं। इस क्षेत्र में विश्वसनीय बिजली, पानी और अन्य उपयोगिताओं के साथ उच्च गुणवत्ता वाली लॉजिस्टिक्स, कुशल मानव संसाधन, तकनीकी सप्लायर और तेज कनेक्टिविटी की आवश्यकता होती है।

इसी वजह से नराज की योजना को केवल बड़े भूखंड के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य में संभावित सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर के लिए शुरुआती औद्योगिक आधार के तौर पर देखा जा रहा है।

राज्य की रणनीति में औद्योगिक बुनियादी ढांचे और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को एक साथ विकसित करने पर जोर है, ताकि हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े उपकरणों, कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही को बेहतर तरीके से संभाला जा सके।

कटक-भुवनेश्वर क्षेत्र को मिल सकता है हाई-टेक निवेश का लाभ

नराज की स्थिति कटक और भुवनेश्वर के बीच होने के कारण इसे पूर्वी भारत के हाई-टेक औद्योगिक विस्तार के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जा रहा है।

भुवनेश्वर से निकटता, हवाई संपर्क और आसपास मौजूद औद्योगिक बुनियादी ढांचा संभावित निवेशकों के लिए उपयोगी आधार प्रदान कर सकता है।

यदि सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े बड़े निवेश यहां आते हैं, तो उनका प्रभाव केवल मुख्य विनिर्माण इकाइयों तक सीमित नहीं रह सकता। उपकरण, पैकेजिंग, परीक्षण, लॉजिस्टिक्स, तकनीकी सेवाओं और अन्य सहायक उद्योगों के लिए भी नए अवसर बन सकते हैं।

भारत की चिप रणनीति के बीच ओडिशा की तैयारी

भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता विकसित करने के लिए केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारें निवेश आकर्षित करने पर जोर दे रही हैं। चिप डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग, टेस्टिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को एक साथ विकसित करने की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर प्रयास जारी हैं।

ओडिशा भी इसी बदलते औद्योगिक परिदृश्य में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है। राज्य पहले से मौजूद औद्योगिक आधार और बुनियादी ढांचे को नई पीढ़ी के तकनीकी उद्योगों से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

नराज का लैंड बैंक इसी व्यापक रणनीति का एक हिस्सा है।

सबसे बड़ी चुनौती: इकोसिस्टम तैयार करना

हालांकि, सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए जमीन उपलब्ध होना अपने आप में पर्याप्त नहीं है। परियोजनाओं को वास्तविक उत्पादन तक पहुंचाने के लिए स्थिर बिजली आपूर्ति, विश्वसनीय औद्योगिक सुविधाएं, कुशल इंजीनियर और तकनीकी कर्मचारी, सप्लायर नेटवर्क तथा मजबूत लॉजिस्टिक्स की जरूरत होगी।

इसके अलावा सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश लंबे समय और बड़ी पूंजी की मांग करता है। इसलिए नराज की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि लैंड बैंक को कितनी तेजी से वास्तविक औद्योगिक परियोजनाओं, तकनीकी साझेदारियों और सपोर्टिंग कंपनियों में बदला जा सकता है।

पूर्वी भारत में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग का संभावित केंद्र

ओडिशा की व्यापक महत्वाकांक्षा पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर राज्य को पूर्वी भारत में उन्नत विनिर्माण और तकनीक आधारित उद्योगों के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में विकसित करना है।

नराज का 870 एकड़ का लैंड बैंक इस रणनीति में एक महत्वपूर्ण शुरुआती आधार बन सकता है। इसके साथ यदि बुनियादी ढांचा, निवेश, कौशल विकास और सप्लायर इकोसिस्टम समान गति से विकसित होते हैं, तो कटक-भुवनेश्वर क्षेत्र में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए एक नया औद्योगिक गलियारा विकसित होने की संभावना बन सकती है।

फिलहाल नराज की अहमियत इसी तैयारी में है—ओडिशा सेमीकंडक्टर निवेश आने का इंतजार करने के बजाय उसके लिए औद्योगिक आधार तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

न्यूज़ एडिटर: सनातन दलबेहरा
नाई भारत / 18 सितंबर 2026