बारिश की रफ्तार घटी, लेकिन ओडिशा में राहत अभियान जारी; 13,221 लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए

49 राहत शिविर सक्रिय, 43 ODRAF-NDRF टीमें तैनात; प्रभावित जिलों में अब स्थानीय जलभराव और नुकसान पर नजर

भुवनेश्वर: ओडिशा में लगातार बारिश के बाद अब अधिकांश हिस्सों में वर्षा की गतिविधि कम हुई है। हालांकि, बाढ़, जलभराव और निचले इलाकों में पानी घुसने से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और निगरानी अभियान अभी जारी है।

29 सितंबर के ताजा स्थिति आकलन के अनुसार प्रशासन का फोकस अब बड़े पैमाने पर निकासी के साथ-साथ राहत शिविरों में सुविधाएं बनाए रखने और स्थानीय स्तर पर किसी भी नई समस्या पर तुरंत कार्रवाई करने पर है।

राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) जिला आपातकालीन संचालन केंद्रों (DEOC) के साथ 24 घंटे समन्वय बनाए हुए है।

13,221 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

प्रभावित क्षेत्रों से कुल 13,221 लोगों को निकाला गया है। विभिन्न जिलों में 49 राहत शिविर संचालित हैं।

बालेश्वर में सबसे अधिक 7,452 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। जाजपुर में 3,876 लोगों को निकाला गया। इसके अलावा जगतसिंहपुर, संबलपुर और बरगढ़ में भी प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।

बालेश्वर में सबसे अधिक प्रभावित आबादी

जिला-वार रिपोर्ट में बालेश्वर प्रमुख प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है।

जिले के छह ब्लॉक, 72 ग्राम पंचायत और 479 गांव प्रभावित बताए गए हैं। कुल प्रभावित आबादी 48,560 है और 15 राहत शिविर संचालित हैं।

जाजपुर में दो ब्लॉक, 12 ग्राम पंचायत और 36 गांव प्रभावित हैं तथा 5,059 लोग प्रभावित बताए गए हैं। यहां 19 राहत शिविर सक्रिय हैं।

भद्रक में पांच ब्लॉक, 57 ग्राम पंचायत और 172 गांव प्रभावित हुए हैं। यहां प्रभावित आबादी 18,691 बताई गई है।

नबरंगपुर, संबलपुर, बरगढ़, कंधमाल और जगतसिंहपुर में भी प्रभावित इलाकों की पहचान की गई है।

दैनिक बारिश में बड़ी कमी

29 सितंबर को सुबह 8.30 बजे समाप्त हुए 24 घंटों में राज्य में औसतन केवल 1.1 मिमी बारिश दर्ज की गई।

कटक जिले के बांकी-डमपाड़ा ब्लॉक में सर्वाधिक 45 मिमी बारिश दर्ज हुई। जिलों में कटक का औसत 9.5 मिमी, पुरी का 6.3 मिमी और गजपति का 4.9 मिमी रहा।

हालांकि सितंबर में कुल बारिश सामान्य से अधिक रही। 1 से 29 सितंबर के बीच राज्य में 316.2 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य औसत 233.4 मिमी है। यानी इस अवधि में 35.5 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई।

43 ODRAF-NDRF टीमें तैनात

बारिश कम होने के बावजूद आपदा प्रतिक्रिया तंत्र को सक्रिय रखा गया है।

राज्य में 43 ODRAF-NDRF टीमें तैनात हैं। इनमें 36 ODRAF और सात NDRF टीमें शामिल हैं।

बालेश्वर में 14, भद्रक में नौ, कोरापुट और जाजपुर में चार-चार, जगतसिंहपुर में तीन तथा नबरंगपुर में दो टीमें तैनात हैं। कटक और मुंडली में रिजर्व टीमें भी तैयार रखी गई हैं।

जरूरत पड़ने पर ये टीमें बचाव, निकासी और आपातकालीन कार्रवाई के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं।

पशुओं के लिए 907 मीट्रिक टन से अधिक चारा

राहत व्यवस्था में पशुधन को भी शामिल किया गया है।

प्रभावित जिलों में कुल 907.04 मीट्रिक टन पशु चारा पहुंचाया गया है। इसमें बालेश्वर को 400 MT, भद्रक को 380.5 MT, जाजपुर को 67.74 MT, मयूरभंज को 40 MT और कोरापुट को 18.80 MT शामिल है।

आठ जिलों में Yellow Warning

IMD के अनुसार ओडिशा के अलग-अलग हिस्सों में एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।

बालेश्वर, भद्रक, जाजपुर, केंद्रापड़ा, जगतसिंहपुर, कटक, क्योंझर और मयूरभंज के लिए Yellow Warning जारी की गई थी। स्थिति रिपोर्ट के समय मछुआरों के लिए कोई चेतावनी नहीं थी।

अब स्थानीय समस्याओं पर नजर

व्यापक बारिश में कमी के बाद भी प्रशासन की चुनौती खत्म नहीं हुई है।

निचले इलाकों में जलभराव, सड़कों पर पानी, शहरी अंडरपास बंद होने, कमजोर मकानों, कच्ची सड़कों, संभावित भूस्खलन और फसलों को नुकसान की निगरानी जारी है।

प्रशासन को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

राहत से अब सुरक्षित वापसी की ओर

ओडिशा में मौजूदा स्थिति को राहत अभियान के अगले चरण के रूप में देखा जा सकता है। बारिश कम हुई है, लेकिन हजारों लोग पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जा चुके हैं और राहत शिविर अभी भी संचालित हैं।

अब प्रशासन के सामने प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने, जलभराव वाले क्षेत्रों की निगरानी करने और परिस्थितियां सामान्य होने पर लोगों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की चुनौती है।

SEOC और जिला आपातकालीन केंद्रों के बीच लगातार समन्वय के साथ राज्य की आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था सक्रिय है। फिलहाल प्राथमिकता किसी भी स्थानीय स्थिति को दोबारा गंभीर रूप लेने से रोकने और प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाते रहने की है।

नाई भारत | भुवनेश्वर
29 सितंबर 2026