फॉर्म-6 और SIR विवाद पर कांग्रेस का हमला, CEC ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप

कांग्रेस ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए; सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बीच SIR और फॉर्म-6 को लेकर राजनीतिक टकराव तेज।

नाई भारत | 5 अक्टूबर 2026

नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और फॉर्म-6 को लेकर चल रहा विवाद सोमवार को एक नए राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गया। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि चुनाव आयोग के फैसलों पर राजनीतिक प्रभाव का असर दिखाई दे रहा है।

कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों पर काम किया तथा संविधान की भावना के साथ विश्वासघात किया। कांग्रेस ने इसे चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।

हालांकि, ये कांग्रेस द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं और अभी इन्हें न्यायिक रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से बढ़ा विवाद

मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से जवाब मांगा। याचिका में चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका से जुड़े सवाल उठाए गए हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड और पक्षकारों के जवाब पर विचार करने की बात कही है।

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। इसलिए मामले की वास्तविक कानूनी स्थिति आगे की सुनवाई और रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

फॉर्म-6 बना विवाद का केंद्र

नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाला फॉर्म-6 भी विवाद के केंद्र में है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि अदालत ने फॉर्म-6 में किए गए किसी बदलाव को मंजूरी नहीं दी थी। अदालत अब संबंधित रिकॉर्ड के माध्यम से यह देखना चाहती है कि विवादित बदलाव किस प्रक्रिया के तहत हुआ और इसके लिए किस स्तर पर अनुमति दी गई थी।

इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर फॉर्म-6 में कथित रूप से “गैरकानूनी और एकतरफा” बदलाव करने का आरोप लगाया।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के दावे को खारिज करते हुए अपनी प्रक्रिया को कानूनी प्रावधानों के अनुरूप बताया है।

SIR को लेकर विपक्ष के सवाल

कांग्रेस ने फॉर्म-6 के मुद्दे को SIR की व्यापक प्रक्रिया से जोड़ते हुए मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं।

पार्टी का कहना है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से हटाने से पहले पर्याप्त सत्यापन, सूचना और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित की जानी चाहिए।

विपक्षी दलों ने SIR की पारदर्शिता को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनावी रिकॉर्ड को अधिक सटीक बनाने के लिए किया जा रहा है और इसका उद्देश्य डुप्लीकेट, मृत या अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना है।

चुनाव आयोग ने आरोपों का किया खंडन

चुनाव आयोग ने कांग्रेस और राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि SIR से संबंधित उसके कदम निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत उठाए गए हैं।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसके फैसलों को राजनीतिक उद्देश्य से जोड़ना उचित नहीं है और मतदाता सूची का शुद्धिकरण लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया का आवश्यक हिस्सा है।

अब न्यायिक रिकॉर्ड पर टिकी नजर

फॉर्म-6, SIR और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच मामला अब न्यायिक जांच के दायरे में भी आ गया है।

आने वाली सुनवाई में केंद्र और चुनाव आयोग की ओर से दिए जाने वाले जवाब महत्वपूर्ण होंगे। इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि फॉर्म-6 से संबंधित विवादित बदलाव किस प्रक्रिया के तहत हुआ, उसकी अनुमति किस स्तर पर दी गई और चुनाव आयोग के भीतर निर्णय किस प्रकार लिया गया।

फिलहाल कांग्रेस के आरोप राजनीतिक दावे हैं, जबकि चुनाव आयोग ने उन्हें खारिज किया है। मामले पर अंतिम स्थिति सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई और संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।