MMDR विवाद: सुजाता बनाम अपराजिता, मीडिया के सामने आमने-सामने तर्क

खनिज राजस्व और राज्य के अधिकार पर सुजाता ने उठाए सवाल, अपराजिता सारंगी ने विपक्ष की व्याख्या पर जताई आपत्ति

नाई भारत | भुवनेश्वर | 28, सितंबर 2026, ओडिशा में MMDR Amendment Act, 2026 को लेकर राजनीतिक बहस अब विधानसभा और सड़क से निकलकर मीडिया के सामने भी तेज हो गई है। बीजद नेता सुजाता राउत कार्तिकेयन और भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी ने कानून को लेकर अलग-अलग पक्ष रखते हुए इस विवाद को राज्य के खनिज संसाधनों और राजस्व के व्यापक सवाल से जोड़ दिया है।सुजाता ने अपने सार्वजनिक बयानों में ओडिशा के खनिज संसाधनों से जुड़े राजस्व और राज्य की कराधान संबंधी शक्तियों को प्रमुख मुद्दा बनाया है। उनका तर्क है कि संशोधित व्यवस्था का प्रभाव राज्य के वित्तीय हितों पर पड़ सकता है। उन्होंने इस संदर्भ में 2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले और खनिज अधिकारों से संबंधित राज्य की शक्तियों का भी उल्लेख किया है।बीजद का कहना है कि ओडिशा जैसे खनिज उत्पादक राज्य के लिए इस कानून के वित्तीय प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पार्टी इसी मुद्दे को लेकर केंद्र के खिलाफ राजनीतिक अभियान चला रही है।दूसरी ओर, अपराजिता सारंगी ने MMDR संशोधन को लेकर विपक्ष द्वारा पेश की जा रही व्याख्या पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि कानून के प्रावधानों को राजनीतिक आरोपों के बजाय उनके वास्तविक स्वरूप और उद्देश्य के आधार पर समझने की जरूरत है।इस तरह दोनों नेताओं के बीच विवाद केवल एक कानून के समर्थन या विरोध तक सीमित नहीं रह गया है। सुजाता की ओर से बहस का केंद्र ओडिशा के खनिज राजस्व और राज्य के अधिकार हैं, जबकि अपराजिता कानून की व्याख्या और उसके प्रावधानों को लेकर विपक्ष के दावों को चुनौती दे रही हैं।MMDR मुद्दे ने ओडिशा की राजनीति में इसलिए भी महत्व हासिल किया है क्योंकि राज्य की अर्थव्यवस्था में खनिज क्षेत्र की बड़ी भूमिका है। ऐसे में संशोधित कानून से जुड़े राजस्व, अधिकार और प्रशासनिक शक्तियों के सवाल आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का हिस्सा बने रहने की संभावना है।विधानसभा के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली है। बीजद और कांग्रेस के सदस्यों ने संशोधन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया, जबकि भाजपा की ओर से कानून का बचाव किया गया।अब राजनीतिक टकराव का एक महत्वपूर्ण मंच मीडिया भी बन गया है। सुजाता और अपराजिता के बयानों ने MMDR विवाद को दो अलग-अलग राजनीतिक दृष्टिकोणों के बीच सार्वजनिक बहस में बदल दिया है।आने वाले समय में इस बहस का केंद्र यही रहेगा कि संशोधित MMDR व्यवस्था का ओडिशा के खनिज राजस्व, राज्य के अधिकार और केंद्र-राज्य संबंधों पर वास्तविक प्रभाव क्या होगा।