2024 के बाद BJD का महिला संपर्क अभियान, मिशन शक्ति की विरासत फिर केंद्र में

गांधी जयंती से शुरू जनसंपर्क पदयात्रा में नवीन पटनायक के साथ सुजाता राउत पांडियन की सक्रियता ने बढ़ाया राजनीतिक महत्व

नाई भारत | भुवनेश्वर | 2 अक्टूबर 2026

ओडिशा की राजनीति में 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद बदले समीकरण के बीच बीजू जनता दल (BJD) ने गांधी जयंती से अपने महीने भर चलने वाले जनसंपर्क पदयात्रा अभियान की शुरुआत की है।

पार्टी अध्यक्ष नवीन पटनायक ने भुवनेश्वर के वार्ड नंबर 52 से अभियान का शुभारंभ किया। पार्टी के अनुसार यह अभियान वार्ड, पंचायत, ब्लॉक और शहरी निकायों तक ले जाया जाएगा और वरिष्ठ नेताओं से लेकर जमीनी कार्यकर्ताओं तक को इसमें शामिल किया जाएगा।

इस अभियान में सुजाता राउत पांडियन की सक्रियता ने राजनीतिक चर्चा को एक अलग दिशा दी है।

2024 के बाद महिला मतदाताओं पर फिर नजर

ओडिशा में लंबे समय तक BJD की राजनीति में महिला कल्याण, स्वयं सहायता समूह और महिला आर्थिक सशक्तिकरण महत्वपूर्ण मुद्दे रहे।

लेकिन 2024 के विधानसभा चुनाव ने राज्य की राजनीतिक तस्वीर बदल दी। 24 वर्षों के बाद BJD सत्ता से बाहर हुई और BJP ने सरकार बनाई।

2024 के चुनाव के बाद की राजनीतिक रिपोर्टिंग में Mission Shakti के विशाल SHG नेटवर्क और महिला मतदाताओं को BJD और BJP के बीच महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र के रूप में देखा गया। वहीं BJP ने Subhadra योजना और “Lakhpati Didi” जैसे अपने महिला-केंद्रित कार्यक्रमों के जरिए इसी सामाजिक आधार में अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश की।

यही कारण है कि BJD की वर्तमान पदयात्रा में महिला सशक्तिकरण का मुद्दा फिर प्रमुखता से दिखाई दे रहा है।

सुजाता राउत पांडियन का संदर्भ

सुजाता राउत पांडियन का प्रशासनिक कार्यकाल महिला-केंद्रित सरकारी कार्यक्रमों से जुड़ा रहा है। इसलिए उनकी वर्तमान राजनीतिक सक्रियता को BJD के महिला सशक्तिकरण संबंधी राजनीतिक संवाद से अलग करके देखना मुश्किल है।

यह भी स्पष्ट रहना चाहिए कि Mission Shakti किसी राजनीतिक दल की योजना नहीं बल्कि ओडिशा सरकार का कार्यक्रम है। इसकी शुरुआत 2001 में महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सशक्तिकरण के उद्देश्य से हुई थी। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार लगभग 6 लाख SHGs में करीब 70 लाख महिलाएं इससे जुड़ी हैं।

मिशन शक्ति केवल ऋण योजना नहीं

मिशन शक्ति का विस्तार बचत और ऋण से कहीं आगे हुआ।

सरकारी रिकॉर्ड में महिलाओं को बैंकिंग व्यवस्था, आजीविका, कौशल, बाजार और सामूहिक संगठनों से जोड़ने की व्यवस्था का उल्लेख है। SHGs कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन, हस्तशिल्प, सिलाई, मशरूम, बांस उत्पाद और अन्य गतिविधियों में भी शामिल हुए।

2022-23 की सरकारी गतिविधि रिपोर्ट के अनुसार 3,65,542 SHGs को ₹11,005.10 करोड़ का बैंक क्रेडिट उपलब्ध कराया गया था। रिपोर्ट में इसे महिला समूहों की आर्थिक गतिविधियों और आजीविका को मजबूत करने वाली वित्तीय समावेशन व्यवस्था के रूप में दर्ज किया गया है।

इस तरह मिशन शक्ति ने केवल सरकारी सहायता का ढांचा नहीं बनाया, बल्कि महिलाओं को बैंक, स्थानीय संस्थाओं, फेडरेशन और आजीविका गतिविधियों से जोड़ने वाला व्यापक नेटवर्क तैयार किया।

यही नेटवर्क अब राजनीतिक चर्चा का हिस्सा

BJD के लिए इस नेटवर्क का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह गांवों और स्थानीय समुदायों तक फैला हुआ है।

2024 के चुनाव से पहले और बाद की रिपोर्टों में SHG नेटवर्क को BJD के लंबे समय से चले आ रहे महिला समर्थन आधार के साथ जोड़ा गया। लेकिन 2024 के परिणामों ने यह भी दिखाया कि इतनी बड़ी सामाजिक संरचना को किसी एक राजनीतिक दल का स्थायी वोट बैंक मानना सही नहीं होगा।

महिला मतदाताओं के बीच BJP ने भी अपना राजनीतिक आधार बनाने की कोशिश की है। Subhadra योजना इसी व्यापक महिला-केंद्रित राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बनी।

BJD की नई रणनीति में क्या बदला?

गांधी जयंती से शुरू पदयात्रा को इसी बदले राजनीतिक वातावरण में देखना होगा।

BJD अब केवल अपने पुराने शासनकाल की उपलब्धियों का उल्लेख करने के बजाय वार्ड और पंचायत स्तर पर सीधा संपर्क बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

नवीन पटनायक का अभियान का नेतृत्व करना और सुजाता राउत पांडियन जैसी नेता की सक्रिय भागीदारी इस रणनीति को महिला सशक्तिकरण के पुराने राजनीतिक विमर्श से जोड़ती है।

लेकिन यह निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी कि इससे BJD को महिला मतदाताओं का समर्थन निश्चित रूप से वापस मिलेगा।

सुजाता के लिए क्या संकेत?

सुजाता राउत पांडियन की राजनीतिक सक्रियता को BJD के लिए महिला-केंद्रित संवाद को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है।

उनका प्रशासनिक अनुभव और महिला SHG से जुड़े कार्यक्रमों की जानकारी पार्टी को अपने पुराने शासन रिकॉर्ड को नए राजनीतिक संदर्भ में प्रस्तुत करने का अवसर देती है।

BJD समर्थक इसे पार्टी के महिला नेटवर्क से दोबारा जुड़ने की कोशिश के रूप में देख सकते हैं, जबकि राजनीतिक विरोधी इसकी अलग व्याख्या कर सकते हैं।

इसलिए सुजाता को अभी से किसी निश्चित चुनावी बदलाव की गारंटी के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।

गांधी जयंती की पदयात्रा का बड़ा राजनीतिक संदेश

BJD के इस अभियान में तीन बातें एक साथ दिखाई देती हैं—

नवीन पटनायक का नेतृत्व, 2024 के बाद संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने की कोशिश और मिशन शक्ति जैसी महिला-केंद्रित नीतियों की विरासत।

दूसरी ओर BJP सरकार भी महिला मतदाताओं के बीच अपने कार्यक्रमों और योजनाओं के माध्यम से राजनीतिक संवाद मजबूत कर रही है। इससे ओडिशा की राजनीति में महिला सशक्तिकरण और आर्थिक सहायता से जुड़े मुद्दों पर प्रतिस्पर्धा और बढ़ी है।

अब BJD की पदयात्रा इस बात की परीक्षा होगी कि उसका संगठन स्थानीय स्तर पर कितना सक्रिय होता है और जनता उसके पुराने शासन रिकॉर्ड तथा वर्तमान राजनीतिक संदेश को किस तरह देखती है।

फिलहाल गांधी जयंती से शुरू इस अभियान में महिला संगठन, मिशन शक्ति की विरासत और जमीनी जनसंपर्क—तीनों BJD की नई राजनीतिक कवायद के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में दिखाई दे रहे हैं।

नाई भारत | भुवनेश्वर | 2 अक्टूबर 2026