ओडिशा जन विश्वास बिल 2026: छोटे उल्लंघनों पर आपराधिक कार्रवाई में कमी, लाइसेंस और मंजूरी प्रक्रिया को सरल बनाने की तैयारी

16 राज्य कानूनों के 62 प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव; कारोबार, एमएसएमई और आम नागरिकों के अनुपालन बोझ को कम करने पर जोर

नाई भारत | भुवनेश्वर | 28 सितंबर 2026

ओडिशा में नियामकीय व्यवस्था को सरल बनाने की दिशा में ओडिशा जन विश्वास बिल, 2026 को एक व्यापक सुधार प्रस्ताव के रूप में आगे बढ़ाया गया है। इस विधेयक का उद्देश्य केवल छोटे अपराधों को गैर-आपराधिक बनाना नहीं, बल्कि लाइसेंस, अनुमति, पंजीकरण और सरकारी अनुपालन की पूरी प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और कम जटिल बनाना है।

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प्रस्तावित विधेयक में 16 राज्य कानूनों के 62 प्रावधानों में संशोधन किया जाना है। ये कानून 11 सरकारी विभागों के प्रशासनिक दायरे में आते हैं। सुधारों को दो हिस्सों में बांटा गया है—पहला, छोटे और प्रक्रियात्मक उल्लंघनों को आपराधिक दायरे से बाहर करना और दूसरा, विभिन्न नियामकीय मंजूरियों को तर्कसंगत तथा सरल बनाना।

छोटे नियम तोड़ने पर हर बार आपराधिक मामला नहीं

बिल के पीछे सबसे महत्वपूर्ण विचार यह है कि किसी मामूली तकनीकी या प्रक्रियात्मक गलती को हर स्थिति में आपराधिक अपराध के रूप में नहीं देखा जाए।

प्रस्तावित व्यवस्था में सामान्य प्रक्रियागत चूक और गंभीर या जानबूझकर किए गए उल्लंघन के बीच अंतर करने पर जोर दिया गया है।

छोटे उल्लंघनों के मामलों में जेल जैसी आपराधिक सजा के बजाय अनुपातिक आर्थिक दंड या प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता अपनाने का प्रस्ताव है। वहीं गंभीर उल्लंघन, बार-बार नियम तोड़ने या सार्वजनिक सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले मामलों में कड़ी कार्रवाई की व्यवस्था बनाए रखने की बात कही गई है।

62 संशोधनों को दो अनुसूचियों में बांटा गया

बिल के तहत प्रस्तावित सुधारों को दो अनुसूचियों में रखा गया है।

अनुसूची-1 में 11 कानूनों से जुड़े 35 संशोधन हैं। इनका मुख्य उद्देश्य छोटे, तकनीकी और प्रक्रियात्मक अपराधों को तर्कसंगत बनाना और कई मामलों में उनका आपराधिक स्वरूप समाप्त करना है।

अनुसूची-2 में पांच कानूनों से जुड़े 27 संशोधन हैं। इनके माध्यम से नौ नियामकीय मंजूरियों की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव है। इसमें दोहराई जाने वाली मंजूरियों को कम करना, कुछ लाइसेंस और पंजीकरण की वैधता अवधि बढ़ाना तथा जहां संभव हो वहां पूर्व अनुमति की जगह सूचना आधारित अनुपालन व्यवस्था लागू करना शामिल है।

कारोबारियों के लिए क्या बदल सकता है?

किसी व्यवसाय के लिए सबसे बड़ी परेशानी कई बार किसी एक नियम से नहीं बल्कि अनेक छोटे-छोटे अनुपालनों से पैदा होती है।

बार-बार लाइसेंस नवीनीकरण, एक जैसी जानकारी अलग-अलग विभागों में देना, समान उद्देश्य के लिए अलग-अलग मंजूरी लेना और मामूली प्रक्रियागत गलती पर कानूनी कार्रवाई का जोखिम छोटे कारोबारियों के लिए अतिरिक्त बोझ बन सकता है।

जन विश्वास बिल इसी स्तर पर बदलाव का प्रस्ताव रखता है।

सरकार का तर्क है कि जहां एक ही उद्देश्य को कम प्रक्रियाओं के माध्यम से पूरा किया जा सकता है, वहां अनावश्यक मंजूरियों और दोहराव को कम किया जाना चाहिए। इससे एमएसएमई, स्टार्टअप, दुकानदारों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों के लिए अनुपालन व्यवस्था अपेक्षाकृत आसान हो सकती है।

सिर्फ बड़े उद्योग नहीं, आम लोगों से भी जुड़ा है बिल

इस विधेयक का प्रभाव केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है।

इसमें गोदाम, होम्योपैथी, पशुधन, सिंचाई, मेडिकल पंजीकरण, ग्राम पंचायत, पशु चिकित्सा, उद्योग सहायता, नगर निकाय, कृषि बाजार, बिजली सुधार और शहरी पुलिस व्यवस्था से जुड़े कानून भी शामिल हैं।

इस कारण कानून लागू होने के बाद इसका असर अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों पर पड़ सकता है।

किसान, छोटे व्यापारी, स्थानीय सेवा प्रदाता, पेशेवर, छोटे उद्यमी और नगर या पंचायत स्तर की अनुमति लेने वाले नागरिक भी इससे जुड़े प्रावधानों के दायरे में आ सकते हैं।

किन कानूनों में बदलाव प्रस्तावित है?

जन विश्वास सुधार के दूसरे चरण में जिन राज्य कानूनों को शामिल किया गया है, उनमें प्रमुख रूप से ये कानून हैं—

  • ओडिशा वेयरहाउस अधिनियम, 1956
  • ओडिशा होम्योपैथिक अधिनियम, 1956
  • ओडिशा पशुधन विकास अधिनियम, 1957
  • ओडिशा आतिशबाजी एवं लाउडस्पीकर विनियमन अधिनियम, 1958
  • ओडिशा सिंचाई अधिनियम, 1959
  • ओडिशा मेडिकल रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1961
  • ओडिशा ग्राम पंचायत अधिनियम, 1964
  • ओडिशा पशु चिकित्सक अधिनियम, 1969
  • ओडिशा राज्य-उद्योग सहायता अधिनियम, 1978
  • ओडिशा माल परिवहन वाहन अधिग्रहण अधिनियम, 1986
  • ओडिशा विद्युत सुधार अधिनियम, 1995
  • ओडिशा नगरपालिका अधिनियम, 1950
  • ओडिशा कृषि उपज बाजार अधिनियम, 1956
  • ओडिशा नगर निगम अधिनियम, 2003
  • ओडिशा शहरी पुलिस अधिनियम, 2003

सरकार के अनुसार यह 2025 के ओडिशा जन विश्वास कानून के बाद नियामकीय सुधारों का अगला चरण है।

एमएसएमई के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

बड़ी कंपनियों के पास अलग से कानूनी और अनुपालन विभाग हो सकते हैं, लेकिन छोटे कारोबारियों के लिए प्रत्येक लाइसेंस, दस्तावेज और नवीनीकरण का खर्च और समय महत्वपूर्ण होता है।

ऐसे में यदि छोटे प्रक्रियागत उल्लंघनों को आपराधिक मामलों से अलग किया जाता है और लाइसेंस एवं अनुमति प्रक्रिया में दोहराव घटता है, तो अनुपालन का बोझ कम हो सकता है।

सरकार इसे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के साथ-साथ स्वरोजगार और छोटे उद्यमों के लिए भी उपयोगी सुधार के रूप में देख रही है।

आम नागरिक के लिए ‘ईज ऑफ लिविंग’ का सवाल

जन विश्वास सुधार का एक दूसरा पहलू आम नागरिक की रोजमर्रा की सरकारी प्रक्रियाओं से जुड़ा है।

यदि किसी नागरिक को किसी सेवा, पंजीकरण या स्थानीय अनुमति के लिए यह स्पष्ट हो कि कौन-सा दस्तावेज चाहिए, कौन-सी अनुमति जरूरी है और किस प्रक्रिया का पालन करना है, तो अनिश्चितता कम हो सकती है।

इसी तरह डिजिटल माध्यम से आवेदन और अनुपालन बढ़ने पर विभागों के चक्कर और कागजी प्रक्रिया कम करने की संभावना बनती है।

हालांकि वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित विभाग इन बदलावों को किस तरह लागू करते हैं।

जवाबदेही खत्म करने का प्रस्ताव नहीं

बिल का उद्देश्य नियमन को पूरी तरह समाप्त करना नहीं है।

सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और जनहित से जुड़े आवश्यक नियंत्रण बने रहेंगे। गंभीर या जानबूझकर किए गए उल्लंघनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की व्यवस्था भी जारी रहेगी।

अर्थात प्रस्तावित मॉडल में जोर इस बात पर है कि मामूली गलती और गंभीर उल्लंघन को एक ही स्तर पर नहीं रखा जाए।

डिजिटल व्यवस्था से घट सकता है कागजी बोझ

बिल में जहां संभव हो वहां सूचना आधारित अनुपालन और सरल डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने की दिशा भी दिखाई देती है।

यदि पंजीकरण, सूचना, मंजूरी और नवीनीकरण जैसी प्रक्रियाएं अधिक व्यवस्थित डिजिटल माध्यम से संचालित होती हैं, तो कारोबारियों और नागरिकों के लिए समय और प्रशासनिक लागत कम करने की संभावना बन सकती है।

लेकिन इसके लिए केवल कानून में संशोधन पर्याप्त नहीं होगा। विभागीय नियम, डिजिटल प्रणाली और अधिकारियों द्वारा वास्तविक स्तर पर उसका पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।

ओडिशा के नियामकीय सुधार का अगला चरण

ओडिशा जन विश्वास बिल 2026 को 2025 में शुरू हुए राज्य के जन विश्वास सुधारों के अगले चरण के रूप में देखा जा रहा है। इस बार दायरा केवल छोटे अपराधों के आपराधिक स्वरूप को बदलने तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि लाइसेंस, अनुमति और नियामकीय प्रक्रियाओं को भी सरल बनाने पर जोर है।

बिल का मूल विचार तीन स्तरों पर सामने आता है—सरल नियम, स्पष्ट प्रक्रिया और अनुपातिक कार्रवाई।

अब इस सुधार की वास्तविक परीक्षा इसके लागू होने के बाद होगी। यदि इससे बार-बार होने वाले नवीनीकरण, दोहराई जाने वाली मंजूरियां, अनावश्यक कागजी कार्रवाई और छोटे उल्लंघनों से जुड़े मुकदमों में कमी आती है, तो इसका प्रभाव केवल कारोबारी माहौल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम नागरिकों के सरकारी प्रक्रियाओं से जुड़ने के तरीके पर भी पड़ सकता है।